58 साल बीते नहीं सुलझा विवाद: चंडीगढ़ पर किसका हक? पंजाब और हरियाणा भाजपा नेता भी आमने-सामने
चंडीगढ़ पर किसका हक... पंजाब और हरियाणा दोनों ही अपना हक जताते रहे हैं। चंडीगढ़ को लेकर यह विवाद आज से 58 साल से चला आ रहा है।
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पंजाब व हरियाणा हमेशा से ही चंडीगढ़ पर अपना हक जताते रहे हैं। चंडीगढ़ को लेकर दोनों राज्यों के बीच विवाद इतना गहरा है कि केंद्र, पंजाब व हरियाणा में एक ही राजनीतिक दल व गठबंधन की सरकारें भी रहीं, फिर भी यह मुद्दा सुलझाने के लिए कोई खास पहल नहीं हो पाई।
2014 के दौरान केंद्र व हरियाणा में भाजपा सरकार आई थी। पंजाब में पहले ही शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन में भाजपा सत्ता में थी, फिर भी चंडीगढ़ के विवाद का समाधान निकालने को लेकर कोई खास पहल नहीं हो पाई। अब हरियाणा के लिए चंडीगढ़ में नया विधानसभा भवन बनाने को लेकर यह विवाद और गहरा गया है। चंडीगढ़ में 60-40 के अनुपात बरकरार रखने का विवाद आज तक खत्म नहीं हो पाया है। इस मामले को लेकर पंजाब व हरियाणा भारतीय जनता पार्टी के नेता भी आमने-सामने आ गए हैं। हरियाणा भाजपा नेता जहां खुलकर चंडीगढ़ में विधानसभा भवन के लिए जमीन आवंटित करने पर अपना हक जाते रहे हैं, वहीं पंजाब भाजपा नेताओं की तरफ से इसका विरोध किया जा रहा है।
इससे पहले 1991 से 1996 तक तीनों जगह कांग्रेस की सरकारें रही और इसके बाद 1998 से वर्ष 2004 तक तीनों जगह भाजपा और सहयोगी दलों की सरकारें भी बनीं, लेकिन फिर भी समाधान के लिए कदम आगे नहीं बढ़ पाए। वर्ष 2006 से 2007 तक केंद्र, हरियाणा और पंजाब में कांग्रेस की सरकारें फिर से आईं, लेकिन राजनीतिक कारणों के चलते यह मुद्दा सुलझाया नहीं जा सका। पंजाब से हरियाणा के अलग होने के 58 साल बाद भी राजनीतिक हालात ऐसे हैं कि विवाद का हल निकलता दिखाई नहीं दे रहा है और उलटा यह और गहराता जा रहा है।
चंडीगढ़ में 60-40 का अनुपात
चंडीगढ़ राजधानी को लेकर ही नहीं, बल्कि एसवाईएल नहर के निर्माण, चंडीगढ़ के प्रशासक पद पर हरियाणा के राज्यपाल की नियुक्ति और दोनों राज्यों के लिए अलग हाईकोर्ट बनाने, चंडीगढ़ में 60-40 अनुपात बरकरार रखने समेत ऐसे कई मुद्दे हैं, जिन्हें लेकर लंबे समय से विवाद कायम हैं। दोनों राज्यों की तरफ से चंडीगढ़ में प्रतिनियुक्ति पर अपने अधिकारियों को भेजा जाता है, लेकिन पिछले कुछ समय से केंद्र की तरफ से सीधे केंद्रीय कैडर के अधिकारियों की नियुक्ति भी शुरू कर दी गई है। इस कारण यहां पंजाब व हरियाणा के अधिकारियों का अनुपात कम होता जा रहा है। इसे लेकर दोनों राज्यों की तरफ से समय-समय पर एतराज भी जताया गया, लेकिन केंद्र से कुछ खास राहत नहीं मिली। उत्तरी क्षेत्रीय परिषद (एनजेडसी) की बैठक में भी दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री इस बार यह मुद्दा उठा चुके हैं और 60-40 के अनुपात सही रूप से लागू करने की मांग कर चुके हैं
दोनों राज्यों के बीच ऐसे बढ़ता गया विवाद
चंडीगढ़ शहर की सिटी ब्यूटीफुल के रूप में पहचान है। यह देश का इकलौता ऐसा शहर है, जिसे योजनाबद्ध तरीके से बसाया गया है। 1953 में प्रथम राष्ट्रपति डाॅ. राजेंद्र प्रसाद ने इसका उद्घाटन किया था। तब सब कुछ ठीक था, क्योंकि हरियाणा उस समय पंजाब का ही हिस्सा था। 1966 में हरियाणा को पंजाब से अलग कर नया राज्य बनाने के बावजूद दोनों राज्यों की राजधानी चंडीगढ़ को ही बनाया गया। इसके बाद ही दोनों राज्यों के बीच चंडीगढ़ पर अपने हक को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई। पंजाब व हरियाणा के अधिकतर सरकारी कार्यालय चंडीगढ़ में हैं। हरियाणा का सचिवालय, मिनी सचिवालय, चुनाव आयोग व खाद एवं आपूर्ति विभाग समेत अन्य मुख्य कार्यालय चंडीगढ़ में ही हैं, जिनको लेकर कभी विवाद नहीं हुआ लेकिन जब भी चंडीगढ़ में केंद्र व हरियाणा के किसी नई परियोजना की सुगबुगाहट होती है तो उस पर सियासी विवाद शुरू हो जाता है।