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साक्षी मलिक के कोच पर बढ़ा विवाद, मंत्री बोले- बता रही पांच कोच, किसे दें इनाम?
अंकित चौहान/अमर उजाला, सोनीपत(हरियाणा)
Updated Sat, 21 Oct 2017 08:42 PM IST
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ओलंपिक मेडल विजेता पहलवान साक्षी मलिक
- फोटो : File Photo
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रियो ओलंपिक में पहला मेडल दिलाकर देश का खाता खोलने वाली साक्षी मलिक के कोच को लेकर फिर विवाद खड़ा हो गया है। साक्षी के कोच होने के पांच दावे सरकार के पास आ चुके हैं और सरकार के लिए यह तय करना टेढ़ी खीर हो गया है कि साक्षी का कोच किसे माना जाए।
क्योंकि खेल मंत्री अनिल विज कहते हैं कि इन सभी पांच कोच के लिए साक्षी मलिक ने खुद शपथ पत्र दिया है। इसलिए सरकार इन सभी के कागजात की जांच करा रही है कि किस कोच से कोचिंग लेकर साक्षी ने मेडल जीता है। इस तरह कोच का यह विवाद लंबा खिंचता दिख रहा है, जिससे साक्षी के कोच को मिलने वाली इनामी राशि का मामला भी अटक गया है।
साक्षी मलिक के रियो ओलंपिक में मेडल जीतकर वापस लौटने पर अगस्त 2016 में बहादुरगढ़ में प्रदेश स्तरीय सम्मान समारोह रखा गया था। जहां खुद सीएम खट्टर के अलावा प्रदेश सरकार के कई मंत्री शामिल हुए थे। वहां सीएम खट्टर ने अपने हाथों से साक्षी को ढाई करोड़ रुपये का डमी चेक सौंपा था तो कोच कुलदीप मलिक व मनदीप सिंह को भी दस-दस लाख रुपये के डमी चैक दिए गए थे।
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इनमें से कुलदीप मलिक ओलंपिक में साक्षी के चीफ कोच रहे है तो मनदीप सिंह उसको छोटूराम स्टेडियम में कुश्ती के गुर सिखाते हैं। उसके बाद साक्षी मलिक के कोच होने के कई दावे सरकार के पास आए, जिनमें से एक ईश्वर सिंह दहिया है जिन्होंने साक्षी को स्टेडियम में सबसे पहले कुश्ती के दांवपेच सिखाए। झज्जर के डीएसओ रहे राजबीर सिंह ने भी साक्षी के कोच होने का दावा ठोक दिया था कि जब वह 2009 में छोटूराम स्टेडियम में कुश्ती कोच थे, तब साक्षी ने चार साल तक उनसे कुश्ती के गुर सीखे।
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क्योंकि खेल मंत्री अनिल विज कहते हैं कि इन सभी पांच कोच के लिए साक्षी मलिक ने खुद शपथ पत्र दिया है। इसलिए सरकार इन सभी के कागजात की जांच करा रही है कि किस कोच से कोचिंग लेकर साक्षी ने मेडल जीता है। इस तरह कोच का यह विवाद लंबा खिंचता दिख रहा है, जिससे साक्षी के कोच को मिलने वाली इनामी राशि का मामला भी अटक गया है।
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साक्षी मलिक के रियो ओलंपिक में मेडल जीतकर वापस लौटने पर अगस्त 2016 में बहादुरगढ़ में प्रदेश स्तरीय सम्मान समारोह रखा गया था। जहां खुद सीएम खट्टर के अलावा प्रदेश सरकार के कई मंत्री शामिल हुए थे। वहां सीएम खट्टर ने अपने हाथों से साक्षी को ढाई करोड़ रुपये का डमी चेक सौंपा था तो कोच कुलदीप मलिक व मनदीप सिंह को भी दस-दस लाख रुपये के डमी चैक दिए गए थे।
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इनमें से कुलदीप मलिक ओलंपिक में साक्षी के चीफ कोच रहे है तो मनदीप सिंह उसको छोटूराम स्टेडियम में कुश्ती के गुर सिखाते हैं। उसके बाद साक्षी मलिक के कोच होने के कई दावे सरकार के पास आए, जिनमें से एक ईश्वर सिंह दहिया है जिन्होंने साक्षी को स्टेडियम में सबसे पहले कुश्ती के दांवपेच सिखाए। झज्जर के डीएसओ रहे राजबीर सिंह ने भी साक्षी के कोच होने का दावा ठोक दिया था कि जब वह 2009 में छोटूराम स्टेडियम में कुश्ती कोच थे, तब साक्षी ने चार साल तक उनसे कुश्ती के गुर सीखे।
साक्षी मलिक
- फोटो : File Photo
इस बीच ही साक्षी के गांव के रहने वाले एक कोच ने भी दावा कर दिया कि वह शुरूआत में साक्षी का कोच रहा है। इतने दावे आने के बाद सरकार ने साफ कर दिया था कि साक्षी मलिक जिस कोच के लिए अपना शपथ पत्र देगी, उसे उसका कोच माना जाएगा।
पहले साक्षी ने मनदीप व ईश्वर सिंह दहिया के लिए शपथ पत्र दिया था और उसके बाद कुलदीप के लिए शपथ पत्र दिया गया। सरकार इन तीन कोच में से तय करने में लगी थी कि साक्षी का कोच किसे माना जाए और उसे जल्द ही इनामी राशि 10 लाख रुपये दिए जाए। लेकिन खेलमंत्री अनिल विज की माने तो यह विवाद कम होने की जगह बढ़ गया है।
अनिल विज ने कहा कि साक्षी ने खुद ही इन सभी पांच कोच के लिए शपथ पत्र दिया है कि उन्होंने उसे कुश्ती सिखाई है। अब ऐसे में सरकार यह तय नहीं कर पा रही है कि किसे कोच माना जाए, क्योंकि सरकार किसी एक को 10 लाख रुपये का इनाम देगी। खेलमंत्री ने कहा कि इसका जल्द ही कोई हल निकाला जाएगा और साक्षी का कोच तय करके उसे इनामी राशि दी जाएगी। इसमें अभी कुछ समय जरूर लग सकता है।
पहले साक्षी ने मनदीप व ईश्वर सिंह दहिया के लिए शपथ पत्र दिया था और उसके बाद कुलदीप के लिए शपथ पत्र दिया गया। सरकार इन तीन कोच में से तय करने में लगी थी कि साक्षी का कोच किसे माना जाए और उसे जल्द ही इनामी राशि 10 लाख रुपये दिए जाए। लेकिन खेलमंत्री अनिल विज की माने तो यह विवाद कम होने की जगह बढ़ गया है।
अनिल विज ने कहा कि साक्षी ने खुद ही इन सभी पांच कोच के लिए शपथ पत्र दिया है कि उन्होंने उसे कुश्ती सिखाई है। अब ऐसे में सरकार यह तय नहीं कर पा रही है कि किसे कोच माना जाए, क्योंकि सरकार किसी एक को 10 लाख रुपये का इनाम देगी। खेलमंत्री ने कहा कि इसका जल्द ही कोई हल निकाला जाएगा और साक्षी का कोच तय करके उसे इनामी राशि दी जाएगी। इसमें अभी कुछ समय जरूर लग सकता है।
साक्षी नहीं करना चाहती एमडीयू में नौकरी
अनिल विज, खेलमंत्री
- फोटो : File Photo
साक्षी नहीं करना चाहती एमडीयू में नौकरी
ओलंपिक में मेडल जीतकर आने पर साक्षी मलिक को सरकार ने एमडीयू में खेल विभाग में नौकरी देने की बात कही थी, जिसके लिए यूनिवर्सिटी में पद भी सृजित किया गया। खेलमंत्री बोले कि साक्षी मलिक के लिए सरकार ने अपना हर वादा पूरा किया है और उसको नौकरी देने के लिए पद भी सृजित किया गया। इसके बावजूद वह अपने प्रदेश में नौकरी नहीं करना चाहती है। यहां साक्षी नौकरी क्यों नहीं करना चाहती है, यह खुद साक्षी ही बता सकती है।
ओलंपिक मेडल जीतकर आने के बाद जब साक्षी मलिक को इनाम दिया गया था, उसके कोच को भी उसी समय इनाम दिया जा रहा था। लेकिन उसके किस कोच को इनाम दिया जाए, उस समय यह तय नहीं हो पाया। जब सरकार इनाम देना चाहती है, तभी साक्षी की ओर से कोच के लिए शपथ पत्र आ जाता है। वह खुद पांच कोच के लिए शपथ पत्र दे चुकी है, जबकि सरकार को केवल एक कोच को इनाम देना है। इसमें सरकार की जांच प्रक्रिया चल रही है, उम्मीद है कि जल्द कोच तय करके इनाम दिया जाएगा।
अनिल विज, खेलमंत्री, हरियाणा सरकार
ओलंपिक में मेडल जीतकर आने पर साक्षी मलिक को सरकार ने एमडीयू में खेल विभाग में नौकरी देने की बात कही थी, जिसके लिए यूनिवर्सिटी में पद भी सृजित किया गया। खेलमंत्री बोले कि साक्षी मलिक के लिए सरकार ने अपना हर वादा पूरा किया है और उसको नौकरी देने के लिए पद भी सृजित किया गया। इसके बावजूद वह अपने प्रदेश में नौकरी नहीं करना चाहती है। यहां साक्षी नौकरी क्यों नहीं करना चाहती है, यह खुद साक्षी ही बता सकती है।
ओलंपिक मेडल जीतकर आने के बाद जब साक्षी मलिक को इनाम दिया गया था, उसके कोच को भी उसी समय इनाम दिया जा रहा था। लेकिन उसके किस कोच को इनाम दिया जाए, उस समय यह तय नहीं हो पाया। जब सरकार इनाम देना चाहती है, तभी साक्षी की ओर से कोच के लिए शपथ पत्र आ जाता है। वह खुद पांच कोच के लिए शपथ पत्र दे चुकी है, जबकि सरकार को केवल एक कोच को इनाम देना है। इसमें सरकार की जांच प्रक्रिया चल रही है, उम्मीद है कि जल्द कोच तय करके इनाम दिया जाएगा।
अनिल विज, खेलमंत्री, हरियाणा सरकार