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Highcourt: रेवाड़ी के सीजेएम के खिलाफ दर्ज हुई थी अवमानना याचिका, हाईकोर्ट ने छह साल बाद की खारिज

Sat, 29 Oct 2022 10:23 AM IST
निवेदिता वर्मा विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 29 Oct 2022 10:23 AM IST
सार

रेवाड़ी निवासी पुरुषोत्तम दास की मां ने बेटे पर धोखे से जमीन हड़पने का आरोप लगाया था। इस मामले में सीजेएम की कोर्ट सुनवाई कर रही थी। पुरुषोत्तम दास ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए दखल की अपील की। हाईकोर्ट ने इस मामले में आगे सुनवाई पर रोक लगा दी थी।

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Contempt petition filed against CJM of Rewari dismissed by Punjab Haryana Highcourt after six years
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट

विस्तार

दूसरों को इंसाफ देने वाले जज साहब को अपने लिए इंसाफ पाने को 6 साल का लंबा इंतजार करना पड़ा। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 6 साल बाद उनके खिलाफ दर्ज न्यायालय की अवमानना के मामले में उन्हें निर्दोष पाया और याचिका खारिज कर उन्हें एक लाख रुपये मुआवजे के तौर पर देने का आदेश दिया है।

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रेवाड़ी निवासी पुरुषोत्तम दास की मां ने बेटे पर धोखे से जमीन हड़पने का आरोप लगाया था। इस मामले में सीजेएम की कोर्ट सुनवाई कर रही थी। पुरुषोत्तम दास ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए दखल की अपील की। हाईकोर्ट ने इस मामले में आगे सुनवाई पर रोक लगा दी थी। लंबे समय तक सुनवाई टलती रही। मामला 2007 का था। ऐसे में ट्रायल कोर्ट ने पुरुषोत्तम दास को नोटिस जारी किया। नोटिस जारी होने के बाद वह पेश भी हुए और बयान भी दर्ज करवाए। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए फिर से दखल की अपील की। हाईकोर्ट ने इस मामले में अंतिम आदेश जारी करने पर 13 फरवरी 2015 को रोक लगा दी। 
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रोक के बावजूद 18 फरवरी को सीजेएम ने पुरुषोत्तम को दोषी करार दे सजा सुना दी। सजा के खिलाफ पुरुषोत्तम ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी। इस मामले में हाईकोर्ट ने संज्ञान लेकर सीजेएम के खिलाफ न्यायालय की अवमानना का नोटिस जारी कर दिया। कोर्ट ने अब पाया कि हाईकोर्ट के आदेश की प्रति 19 फरवरी 2015 को ई मेल के माध्यम से भेजी गई थी। साथ ही तब तक आदेश वेबसाइट पर भी अपलोड नहीं था। न्यायालय ने यह भी पाया कि अवमानना की कार्रवाई करने से पहले उसे सुनवाई का मौका ही नहीं दिया गया। ऐसे में हाईकोर्ट ने अब उन्हें इन्साफ देते हुए उनके खिलाफ याचिका को खारिज कर दिया है। साथ ही उन्हें एक लाख रुपये का मुआवजा देने का जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रेवाड़ी को आदेश दिया है।

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