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ग्रांट मिलने के सालों बाद भी नहीं बनी ITI की बिल्डिंग, टारगेट भी पूरा नहीं कर सके

Mon, 03 Apr 2017 09:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 03 Apr 2017 09:17 AM IST
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Construction of ITI not even after the grant was cleared
cag - फोटो : अमर उजाला
केंद्र सरकार ने पंजाब केआईटीआई में सुधार को विशेष स्कीम लॉन्च की थी, जिसके तहत राज्य के 76 आईटीआई को ढाई-ढाई करोड़ रुपये दिए गए, लेकिन रकम जारी होने के कई साल बाद तक ये बिल्डिंग तक नहीं बना सके। 73 ट्रेड अपग्रेड होनी थीं, पर सिर्फ 48 ही हुईं। वहीं 80 नई ट्रेड शुरू होनी थीं, पर सिर्फ 43 ही शुरू हो सकीं। यह खुलासा कॉम्प्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया (कैग)के ऑडिट में हुआ है।
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कैग की रिपोर्ट के मुताबिक आईटीआई (महिला) करतारपुर की बिल्डिंग इसलिए बन सकी, क्योंकि इसकी इंस्टीट्यूट मैनेजमेंट कमेटी (आईएमसी) जमीन का इंतजाम नहीं कर सकी। जबकि, उसे लोन 2007-08 में ही मिल गया था। मार्च-2016 में जमीन मिली, पर निर्माण अब तक शुरू नहीं हुआ है। आईटीआई माणुके ने फरवरी-2011 में बिल्डिंग के लिए एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को पंद्रह लाख ट्रांसफर किए। मार्च-2012 में आईएमसी ने खुद बिल्डिंग बनाने का फैसला किया और पैसे वापस ले लिए। आईआईटी बरनाला ने मार्च-2008 में ढाई करोड़ मिलने के बाद जून-2010 में पुरानी बिल्डिंग रिपेयर कराने का फैसला किया। 
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पीडब्ल्यूडी को 52.25 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए गए। मार्च-16 में 44.95 खर्च हो चुके थे, पर काम पूरा नहीं हुआ था। आईटीआई खरड़ को गांव रडियाला के प्राइमरी स्कूल में शिफ्ट किया गया। नए ट्रेड शुरू करने को चार कमरे बनाने का फैसला किया गया। पर चालीस लाख रुपये किसी दूसरी जगह बिल्डिंग बनाने को डाइवर्ट कर दिए गए। आईटीआई संगरूर को पैसे 2009 में आ गए थे, निर्माण मार्च-2014 में शुरू हुआ। ठेकेदार को एक माह में काम पूरा करने की शर्त रखी गई थी, पर मार्च-2016 में भी काम जारी था। इसी तरह आईटीआई मानसा ने पहली मंजिल बनाने को पीडब्ल्यूडी केएग्जीक्यूटिव इंजीनियर को पैसे ट्रांसफर किए। ठेका हो गया, पर अधिकारी केखिलाफ विजिलेंस जांच शुरू हो गई और काम रोक दिया गया। 
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ट्रेड के लिए नहीं लिया एनसीवीटी का एफिलिएशन

Construction of ITI not even after the grant was cleared
court shimla
कैग केऑडिट में यह भी सामने आया है कि मकसूदपुर, तलवंडी चौधरियां और सुल्तानपुर लोधी के आईटीआई ने अपने विद्यार्थियों के लिए आइलेट्स, स्पोकेन इंग्लिश और पर्सनालिटी डेवलपमेंट की कोचिंग करवाईं, जिन पर 32.29 लाख रुपये खर्च हुए। जबकि इसका कोई प्रावधान नहीं था।

नहीं पूरा कर सके टारगेट
केंद्र सरकार ने नियम बनाए थे कि सभी आईटीआई में 70 प्रतिशत विद्यार्थी पास होने चाहिए, लेकिन नाभा आईटीआई इसमें असफल रहा। आईटीआई के लिए इंप्लायबिलिटी टारगेट भी रखा गया था। इसके मुताबिक पास-आउट होने केएक साल में 95 फीसदी विद्यार्थियों को नौकरी मिलनी चाहिए थी, लेकिन यहां चार से 67 फीसदी टारगेट ही पूरा हो सका।

ट्रेड के लिए नहीं लिया एनसीवीटी का एफिलिएशन
केंद्र सरकार ने प्रावधान किया था कि नए ट्रेड शुरू करते समय नेशनल काउंसिल फॉर वोकेशनल ट्रेनिंग क ी एफिलिएशन जरूरी होगी। अवधि खत्म होने केबाद री-एफिलिएशन भी करानी होगी। मार्च-2016 में यहां 43 नए ट्रेड बिना एफिलिएशन शुरू किए गए। जिसके चलते इन आईटीआई से पास हुए 1304 विद्यार्थियों को एनसीवीटी का सर्टिफिकेट नहीं मिला। बाद में कपूरथला, मकसूदपुर और तलवंडी चौधरियां आईटीआई ने कुछ ट्रेड का री-एफिलिएशन कराया। बाकी आईटीआई नाकाम रहे।
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