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पीयू में शासन सुधार.. 20 मार्च को विचार

Sun, 14 Mar 2021 02:19 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sun, 14 Mar 2021 02:19 AM IST
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Consideration of governance reform in PU on March 20
चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय में शासन सुधार को बनाई गई उच्च स्तरीय समिति को कर्मचारियों ने सुझाव दिए हैं। उन्होंने कहा कि सीनेट में कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। इससे शासन में सुधार होगा। सीनेट में राजनीति से ऊपर उठकर शिक्षक, कर्मचारी व विद्यार्थियों के हितों में निर्णय लिए जाने चाहिएं। शासन सुधार के समय ऐसा ढांचा तैयार किया जाए जो सबको पसंद आए।
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पीयू में कर्मचारियों की संख्या लगभग तीन हजार है। उनके मुद्दों का हल समय पर किया जाना चाहिए। कुछ मुद्दे हल होते हैं तो कुछ नहीं। हालांकि सीनेट में मुद्दे उठाए जाते रहे हैं। कर्मचारियों को समय से पदोन्नति, वेतनमान निर्धारण से लेकर कई तरह की सुविधाएं भी देनी होती हैं। इन सभी का रास्ता सिंडिकेट व सीनेट से होकर गुजरता है। कुछ कर्मचारी इसलिए खुश नहीं हैं कि उनके संगठनों का प्रतिनिधित्व नहीं हो पा रहा। ऐसे में उन्हें भी जगह दी जाए। सदस्य ऐसे बनाए जाएं जो बेहतर निर्णय ले पाएं। इसके लिए योग्यता आदि भी तय किया जाना जरूरी है। महिलाओं को भी सीनेट में जगह दी जानी चाहिए। लोकसभा में जिस तरह प्रावधान है, सीनेट में भी वैसा ही होना चाहिए। इससे महिलाएं और सशक्त होंगी और उन्हें भी नई जानकारियां हासिल हो सकेंगी।
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क्या कहते हैं कर्मचारी नेता
पीयू के कर्मचारियों, शिक्षकों व विद्यार्थियों के हित में निर्णय लेने वालों की आवश्यकता है। विश्वविद्यालय की कार्यशैली को जो लोग जानते हैं, उन्हें जगह मिलनी चाहिए। राजनीति का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। -दीपक कौशिक, कर्मचारी नेता
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पीयू में रोस्टर आज तक लागू नहीं हो पाया। यदि सीनेट में इसे प्रमुखता से उठाया जाता तो लागू हो जाता। ऐसे में एससी/एसटी व बीसी एसोसिएशन से भी एक सदस्य सीनेट में शामिल किया जाना चाहिए। -हरप्रीत सिंह, कर्मचारी नेता

तकनीकी कर्मचारियों की तमाम समस्याएं हैं, जिन्हें सीनेट में उठाने वाले नहीं हैं। ऐसे में पीयू के कर्मचारियों की जितनी एसोसिएशन हैं, उन सभी से एक-एक व्यक्ति को सीनेट में सदस्य बनाया जाना चाहिए। -संजीव वर्मा, कर्मचारी नेता
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