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एडवाइजर परिदा बोले- लॉकडाउन खुला तो चंडीगढ़ में ऑड-ईवन से गाड़ियां चलाने पर करेंगे विचार

Fri, 10 Apr 2020 03:56 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो रिशु राज सिंह, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Fri, 10 Apr 2020 03:56 PM IST
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Consideration will be driving with Odd-Even system in Chandigarh, ut advisor said
यूटी एडवाइजर मनोज परिदा - फोटो : फाइल फोटो
हर आईएएस अफसर को बाढ़, दंगे आदि से निपटने की ट्रेनिंग मिलती है, लेकिन वर्तमान स्थिति काफी अलग है। आजकल काम 10 गुना बढ़ गया है और कर्मचारी कई गुना कम हो गए हैं। ज्यादातर काम अब खुद ही करने पड़ते हैं। हम सभी के लिए यह एक चुनौती है। चंडीगढ़ के सभी अफसर काफी अच्छा काम कर रहे हैं। अगर 15 अप्रैल को लॉकडाउन खुला तो चंडीगढ़ में ऑड-ईवन से गाड़ियां चलाने का विचार है। यह कहना है शहर के एडवाइजर मनोज परिदा का। उन्होंने अमर उजाला से एक खास बातचीत में शहर से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर खुलकर बातचीत की।
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पेश है इंटरव्यू के कुछ अंश....

सवाल: 15 अप्रैल को क्या लॉकडाउन खुलेगा?
जवाब :
इस बारे में फैसला 14 अप्रैल को ही होगा। चंडीगढ़ में अभी जैसी स्थिति है, अगर यही जारी रही तो कुछ शर्तों के साथ छूट दी जा सकती है। हालांकि केंद्र शासित प्रदेश होने की वजह से भारत सरकार की मंजूरी जरूरी होगी। पंजाब-हरियाणा का क्या रुख रहता है, यह भी देखना होगा। इन्हीं के आधार पर फैसला लिया जाएगा।
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सवाल: लॉकडाउन को खोला जाता है, तो क्या शहरवासियों पर कोई शर्त रखी जाएगी?
जवाब:
पूरी तरह से शहर को तो नहीं खोला जाएगा। स्कूल-कॉलेजों को बंद रखा जाएगा। ऑफिसों की संख्या को 25 प्रतिशत तक किया जा सकता है। सार्वजनिक परिवहन को भी 25 प्रतिशत तक ही चलाया जाएगा। चंडीगढ़ में ज्यादातर लोगों के पास अपनी गाड़ियां हैं, ऐसे में ऑड-ईवन योजना लागू की जा सकती है। इस तरह के प्लान को प्रशासन ने तैयार किया है, लेकिन इस पर फैसला 14 को ही लिया जाएगा।
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सवाल: पंचकूला और मोहाली से संक्रमण चंडीगढ़ में न फैले, इसके लिए क्या तैयारी है?
जवाब:
चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा की राजधानी है। दोनों राज्यों के दफ्तर चंडीगढ़ में ही हैं। ऐसे में चंडीगढ़ को इनके लिए बंद नहीं किया जा सकता है। अनिवार्य सेवाओं में लगे और सरकारी कामों में लगे लोगों को जारी किये गए पास की संख्या काफी ज्यादा हो गई है। अब इन्हें कम करने का विचार है। बॉर्डर पर सख्ती बरती जाएगी। एक-एक व्यक्ति के आईडी कार्ड चेक होंगे कि वह किस मकसद से चंडीगढ़ में आ रहा है। इसके अलावा सैनिटाइजेशन का काम भी शहर के बॉर्डर पर किया जाएगा।

सवाल: प्रशासन के आदेश के बावजूद कुछ फैक्ट्री मालिक अपने कर्मचारियों को पूरी तनख्वाह नहीं दे रहे हैं?
जवाब:
किसी भी कर्मचारी के साथ अगर ऐसा होता है तो वह शहर के डीसी और लेबर कमिश्नर से शिकायत कर सकता है। प्रशासन की तरफ से आदेश जारी किए गए हैं कि किसी भी कर्मचारी की सैलरी रोकी नहीं जाएगी, न ही किसी को काम से निकाला जाएगा। फैक्ट्री मालिक व व्यापारियों के नुकसान की भरपाई के लिए भारत सरकार एक राहत पैकेज तैयार कर रही है, जिसकी जल्दी घोषणा की जा सकती है।

सवाल: लॉकडाउन अगर जारी रहता है तो सरकारी स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई कैसे होगी, क्योंकि ज्यादातर बच्चे गरीब परिवारों से संबंध रखते हैं।
जवाब:
सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले ज्यादातर बच्चों के पास कंप्यूटर और इंटरनेट की सुविधा नहीं है, प्रशासन इस बात को अच्छे से समझता है। इस समस्या को सुलझाने के लिए प्रशासन और शिक्षा विभाग बहुत तेजी से कार्य कर रहा है लेकिन इसमें कुछ समय लग सकता है। इसके लिए पूरी व्यवस्था तैयार करनी है। यह समस्या अगले कुछ दिनों तक रह सकती है।

सवाल: आपकी दिनचर्या कितनी बदली है, पूरा दिन कैसे गुजारते हैं?
जवाब:
मेरा काम 10 गुना बढ़ गया है जबकि कर्मचारी कई गुना कम हो गए हैं। ऐसे में अब बहुत से काम मुझे खुद करने पड़ते हैं लेकिन हमें इसी की ट्रेनिंग मिली है। सभी विभागों की जिम्मेदारी मेरे ऊपर है इसलिए मुझे 24 घंटे फोन पर उपलब्ध रहना पड़ता है। दिन में कई बार कैबिनेट सेक्रेटरी के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बैठकें होती हैं। अनिवार्य सेवाओं की शिकायतों को दूर करने की जिम्मेदारी भी मेरे पास है। रोजाना शाम 4 बजे यूटी सचिवालय में एक बैठक होती है, जिसमें प्रशासक को रिपोर्ट देनी होती है। ऐसे में पूरा दिन व्यस्त ही रहता है।

सवाल: इस लॉकडाउन में शहरवासियों की तरफ से आपको किस तरह के सुझाव मिल रहे हैं?
जवाब:
प्रत्येक वर्ग से अलग-अलग सुझाव मिल रहे हैं। एक आदमी का सुझाव मिला कि उन्हें राशन तो मिल गया है लेकिन सीफूड नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा कुछ लोगों का सुझाव आया कि उन्हें सुखना लेक पर कुछ समय घूमने की इजाजत दी जाए। लोगों को बताना पड़ रहा है कि अमेरिका का सेंट्रल पार्क भी बंद है, ऐसे में घर पर ही रहें। लोग अभी भी समझ नहीं पा रहे हैं तो कभी गुस्सा, कभी आनंद आता है। ऑफिस के टेंशन को दूर करने के लिए ट्विटर पर एक्टिव रहता हूं। लोगों के मैसेज का रिप्लाई करता हूं। यह अच्छा अनुभव है।
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