पंजाब में भाजपा मॉडल की झलक: चन्नी को सीएम बना कांग्रेस ने चौंकाया, उत्तराखंड व गुजरात में बीजेपी ऐसा पहले कर चुकी
रविवार को कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब का नया मुख्यमंत्री चुन लिया है। मीडिया में जिन चेहरों की चर्चा थी उनसे इतर चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब की सत्ता की कमान हाईकमान ने सौंपी है। रविवार शाम को जब चन्नी के नाम का एलान हुआ तो हर कोई चौंक गया। ठीक वैसे ही जैसे इससे पहले भाजपा ने उत्तराखंड और गुजरात में सभी को चौंकाया। लोग इसे पंजाब में भाजपा मॉडल की झलक मान रहे हैं।
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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भाजपा की तर्ज पर पंजाब में चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाने की घोषणा की। भाजपा की ही तरफ कांग्रेस का यह फैसला बेहद चौंकाने वाला रहा। चन्नी को सीएम बनाने के लिए कांग्रेस को कई दिग्गजों को दरकिनार करना पड़ा। ठीक ऐसे ही भाजपा ने उत्तराखंड और गुजरात में कई दिग्गजों को दरकिनार कर पुष्कर सिंह धामी और भूपेंद्र पटेल को अपना मुख्यमंत्री बनाया। पंजाब में कांग्रेस ने दिग्गज नेता प्रताप सिंह बाजवा, सुनील जाखड़, सुखजिंदर सिंह रंधावा, नवजोत सिंह सिद्धू समेत कई वरिष्ठ नेताओं को नजरअंदाज कर चन्नी को सत्ता की कमान सौंप दी।
चरणजीत सिंह चन्नी लगातार तीसरी बार विधायक जरूर बने लेकिन वह पंजाब के मंत्री के तौर पर साढ़े चार साल ही काम कर पाए हैं। वह कैप्टन की सरकार में तकनीकी शिक्षा मंत्री थे। सीएम की दौड़ में प्रताप बाजवा भी थे। बाजवा 2002 से 2007 तक पंजाब के मंत्री रह चुके हैं। इसके अलावा लोकसभा सदस्य और पंजाब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। मौजूदा समय प्रताप सिंह बाजवा राज्यसभा सांसद हैं।
राणा गुरजीत सिंह मंत्री के अलावा सांसद भी रह चुके हैं। वह दोआबा के दिग्गज नेता हैं। इसी तरह मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा भी सीएम की रेस में थे, उनका नाम फाइनल हो चुका था। वह तीसरी बार विधायक हैं। उनके पिता संतोख सिंह रंधावा दो बार प्रदेश कांग्रेस के प्रधान रह चुके हैं। सुनील जाखड़ को भी किनारे किया गया है। जाखड़ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के अलावा मंत्री भी रह चुके हैं। वहीं गुरदासपुर से लोकसभा सांसद रहे हैं।
भाजपा ने उत्तराखंड में भी इसी तरह कई दिग्गजों को किनारे किया और पुष्कर सिंह धामी को सत्ता की कमान सौंप दी। जबकि इस रेस में बीसी खंडूरी, सतपाल महाराज, रमेश पोखरियाल निशंक समेत कई दिग्गज शामिल थे लेकिन भाजपा हाईकमान ने पुष्कर सिंह धामी को सीएम बना दिया बिल्कुल वैसा ही दृष्य पंजाब में कांग्रेस ने दोहराया है।
पंजाब में ब्रह्म मोहिंदरा भी काफी वरिष्ठ नेता हैं और तीन बार मंत्री रह चुके हैं। इसके अलावा रवनीत सिंह बिट्टू हैं, जो तीसरी बार लगातार सांसद बने और दिवंगत सीएम बेअंत सिंह के पौत्र हैं। लिहाजा, कांग्रेस ने सभी दिग्गजों की दौड़ में से चन्नी को छांट लिया।
एक तरफ राज्य में कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिद्धू की जंग जगजाहिर रही है तो वहीं प्रताप सिंह बाजवा से भी सिद्धू के अच्छे संबंध नहीं रहे हैं। इसके अलावा जाखड़ को सीएम बनाए जाने की स्थिति में सिखों की नाराजगी का खतरा रहा। इसलिए चन्नी को सीएम बनाकर कांग्रेस ने गुटबाजी को खत्म किया है तो वहीं दलितों के साथ सिखों को भी साधने का काम किया है।