मानसून सत्र में अपनों ने बढ़ाई सरकार की मुश्किलें, कांग्रेस के तीन विधायकों ने घेरा
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कांग्रेस के तीन विधायकों ने सदन में अपनी ही सरकार को घेरा। उनके तीखे सवाल मंत्रियों के लिए मुसीबत बन गए। कुलबीर जीरा ने प्रश्नकाल में अपने हलके में कुछ रूटों पर सरकारी बसें बंद होने का मुद्दा उठाया। रजिया सुल्ताना ने कहा कि वहां सवारियां कम होने की वजह से बसें बंद कर दी गईं। अगर सवारियां होंगी तो बसें दोबारा चली दी जाएंगी। फिलहाल वहां मिनी बसें चल रही हैं।
जीरा ने कहा कि 52 सीट वाली बस के लिए सवारियां नहीं हैं और 40 सीटों वाली मिनी बस भर के जा रही है, ऐसा कैसे हो सकता है। सिमरजीत बैंस ने कहा कि आज तक ट्रांसपोर्ट माफिया खत्म नहीं हुआ है। दिल्ली में निजी बसें जा रही हैं और सरकारी वोल्वो को रोक दिया गया है। अभी भी बस अड्डों में सरकारी बसों के रुकने का टाइम कम और निजी का ज्यादा है।
बात चलते-चलते बादलों की बसों पर आई। फिर बिक्रम मजीठिया ने कांग्रेसी ट्रांसपोर्टरों के नाम लिए और कहा जो गलत हो उसे अंदर कर दें। रजिया ने आश्वासन दिया कि जल्द टाइम टेबल तैयार हो जाएगा। सुरजीत धीमान फिर कांग्रेस की मुसीबत बने। उनके ड्रेनों की सफाई से संबंधित सवाल पर सुखबिंदर सरकारिया ने बताया कि बारिश से पहले सफाई हो चुकी है। धीमान बोले, मैं सहमत नहीं हूं, मैंने खुद देखा है कि सफाई नहीं हुई है।
मंत्रियों को मिली सुविधाओं पर राज्य सरकार भरेगी आयकर
पंजाब विधानसभा ने मंगलवार को मानसून सत्र के अंतिम दिन, राज्य के मंत्रियों को मिल रही सरकारी सुविधाओं पर लागू होने वाला आयकर राज्य सरकार द्वारा भरे जाने संबंधी संशोधन विधेयक दि ईस्ट पंजाब मिनिस्टर्स सैलरीज (संशोधन) बिल 2019 को मंजूरी दे दी। इस बिल पर सदन में बहस के दौरान मौजूद अकाली दल के सदस्यों ने सवाल खड़े किए।
इसके साथ ही विधानसभा ने उपमंत्रियों के वेतन और भत्तों संबंधी दि सैलरीज एंड अलाउंसेज आफ डिप्टी मिनिस्टर्स पंजाब (संशोधन) बिल 2019 और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के वेतन-भत्तों संबंधी दि सैलरीज एंड अलाइंसेज ऑफ लीडर ऑफ आपोजशिन इन लेजिसलेटिव असेंबली (संशोधन) बिल 2019 को भी मंजूरी दे दी।
विधानसभा में वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने दि ईस्ट पंजाब मिनिस्टर्स सैलरीज (संशोधन) बिल 2019 पेश किया। इस पर अकाली दल के चंदूमाजरा ने यह कहते हुए ऐतराज जताया कि वित्त मंत्री हमेशा सरकार का खजाना खाली का हवाला देते रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में किसानों समेत अन्य अहम मुद्दों पर सरकार को पैसों की जरुरत है, इसलिए ऐसे बिल का समर्थन नहीं किया जा सकता।
इस पर कांग्रेस के चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा कि विपक्षी सदस्यों को बिल को पढ़ लेना चाहिए था। इस बिल के तहत यह प्रावधान किया गया है कि अब सूबे के मंत्री अपने वेतन और भत्तों से संबंधित आयकर खुद भरेंगे और केवल उन्हें मिलने वाली सरकारी सुविधाओं, मकान-वाहन आदि संबंधी आयकर राज्य सरकार भरेगी।
चन्नी ने उदाहरण देते हुए सदन में कहा कि मुख्यमंत्री की आय 13 लाख रुपये बनती है लेकिन आयकर 17 लाख रुपये पर निर्धारित हुआ है। उन्होंने कहा कि पहले लाए गए बिल में इसी खामी को दूर करते हुए नया बिल लाया गया है। चन्नी ने कहा कि चंदूमाजरा ऐतराज तो कर रहे हैं लेकिन उनका आयकर सरकार भर रही है, जिसे छोड़ने को वे तैयार नहीं हैं।
कांग्रेस के कुलजीत नागरा ने अकाली सदस्यों पर निशाना साधते हुए चुनौती दी कि वे अपना आयकर खुद भरें। इस पर अकाली दल के विक्रम सिंह मजीठिया ने उन्हें कहा- सरकार आपकी है। अगर सरकार ऐसा कोई फैसला लेती है तो हम भी साथ हैं। आखिरकार मनप्रीत बादल ने बिल पर स्पष्टीकरण देते हुए अकाली सदस्यों पर कटाक्ष किया कि जिन्होंने 72 साल में कभी टैक्स नहीं दिया, वह इस बिल का विरोध कर रहे हैं।
बाद में इस बिल को सदन ने पारित कर दिया। इसके साथ ही, सदन ने दि सैलरीज एंड अलाउंसेज ऑफ डिप्टी मिनिस्टर्स पंजाब (संशोधन) बिल 2019 और दि सैलरीज एंड अलाइंसेज ऑफ लीडर ऑफ आपोजशिन इन लेजिसलेटिव असेंबली (संशोधन) बिल 2019 को भी अकालियों के विरोध के बीच मंजूरी दे दी।
सार्वजनिक खरीद पारदर्शिता एक्ट- 2019 को मंजूरी
पंजाब विधानसभा ने मंगलवार को ‘दी पंजाब ट्रांसपेरैंसी इन पब्लिक प्रक्यूरमैंट एक्ट 2019’ को मंजूरी दे दी। इसका मकसद कुशलता, आर्थिकता व पारदर्शिता को सुनिश्चित करने के लिए, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करना और बोलीदाताओं को निष्पक्ष अवसर मुहैया करवाना है। विधानसभा ने इस विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। यह विधेयक सभी खरीददारियों से संबंधित है, जिनका भुगतान संचित फंड, सार्वजनिक खातों व इत्तफाकिया फंड सहित सरकारी खातों से होता है। यह ड्राफ्ट सभी खरीद इकाईयों पर लागू होगा।