पंजाब कांग्रेस में फिर रार: बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र बढ़ाए जाने पर भड़के जाखड़-रंधावा, समर्थन में आए कैप्टन
आतंकवाद और सीमा पार से अपराधों के खिलाफ जीरो टालरेंस बनाए रखने के उद्देश्य से केंद्र ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश सीमाओं के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा से भारतीय क्षेत्र के अंदर 50 किमी के क्षेत्र में तलाशी लेने, संदिग्धों को गिरफ्तार करने और आपत्तिजनक वस्तुएं जब्त करने का अधिकार दिया है।
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सीमा सुरक्षा बल के अधिकार क्षेत्र को लेकर केंद्रीय मंत्रालय के ताजा निर्देशों पर पंजाब कांग्रेस की रार एक बार फिर सामने आ गई है। पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रधान सुनील जाखड़ ने बुधवार को मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से इस बारे में सवाल किया है। वहीं डिप्टी सीएम सुखजिंदर रंधावा ने सीएम का बचाव करते हुए केंद्र पर निशाना साधा है। इनसे इतर पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केंद्र के इस फैसले का स्वागत किया है।
मुख्यमंत्री चन्नी ने पांच अक्तूबर को केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात के दौरान पंजाब में भारत-पाक सीमा को सील करने का आग्रह किया था। एक हफ्ते बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र को 50 किमी क्षेत्र में गिरफ्तारी, जब्ती और तलाशी के लिए बढ़ा दिया है।
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अपने ट्वीटर हैंडल पर जाखड़ ने मुख्यमंत्री चन्नी को संबोधित करते हुए लिखा- आपने क्या पूछा है सावधान रहें! क्या चरणजीत चन्नी ने अनजाने में पंजाब का आधा हिस्सा केंद्र सरकार को सौंप दिया है। 25000 वर्ग किमी (कुल 50,000 वर्ग किमी में से) को अब बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र में रखा गया है। पंजाब पुलिस स्तब्ध है। क्या हम अब भी राज्यों के लिए अधिक स्वायत्तता चाहते हैं?
वहीं पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केंद्र के फैसले का समर्थन करते हुए ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा कि हमारे सैनिक कश्मीर में मारे जा रहे हैं। हम देख रहे हैं कि पाकिस्तान समर्थित आतंकियों द्वारा पंजाब में अधिक से अधिक हथियार और ड्रग्स पहुंचाए जा रहे हैं। बीएसएफ की बढ़ी मौजूदगी और ताकत ही हमें मजबूत बनाएगी। हमें केंद्रीय सुरक्षा बलों को राजनीति में नहीं घसीटना चाहिए।
रंधावा ने बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र बढ़ाने के फैसले की निंदा की
बीएसएफ एक्ट की धारा 139 में हाल ही में किए गए संशोधन को संघीय ढांचे पर हमला करार देते हुए पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने केंद्र सरकार को यह फैसला तुरंत वापस लेने को कहा है। बुधवार को जारी बयान में रंधावा, जिनके पास गृह विभाग भी है, ने कहा कि यह तर्कहीन फैसला सीमा सुरक्षा बलों के उभार की भावना के बिल्कुल विरुद्ध है, जो अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनात रहते हैं और रक्षा की अग्रणी पंक्ति के तौर पर काम करते हैं। उन्होंने कहा कि अंदरूनी इलाकों में पुलिसिंग करना सीमा सुरक्षा बलों का काम नहीं है और ऐसा करना अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा प्रति उनकी प्राथमिक ड्यूटी निभाने के क्षमता को कमजोर करेगा।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि वह मामले की हल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जल्द मिलेंगे। रंधावा ने स्पष्ट कहा कि मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने न तो यह मुद्दा केंद्र के समक्ष उठाया है और न ही अंतरराष्ट्रीय सीमा के साथ बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र को बढ़ाने के लिए कहा है। केंद्रीय और राज्य की एजेंसियों के बीच बेहतर सहयोग की जरूरत पर देते देते हुए रंधावा ने कहा कि गैरकानूनी गतिविधियों को रोकने के लिए तुरंत कार्रवाई करने के लिए जानकारी सांझा करके ऐसे तालमेल को बढ़ाना चाहिए।
केंद्र ने बढ़ा दिया है बीएसएफ का अधिकार
ताजा आदेश के अनुसार बीएसएफ, जिसे केवल पंजाब, पश्चिम बंगाल और असम राज्यों में 15 किलोमीटर तक कार्रवाई करने का अधिकार था, को अब बिना किसी बाधा या केंद्र या राज्य सरकारों से अग्रिम अनुमति के बिना अपने अधिकार क्षेत्र को 50 किमी तक फैलाने के लिए अधिकृत किया गया है।