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भाजपा गठबंधन का कांग्रेस को झटका: पूर्व जेल मंत्री सरवन सिंह फिल्लौर बेटे संग ढींढसा की पार्टी में शामिल, दोआबा में होगा फायदा
Mon, 17 Jan 2022 11:08 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Mon, 17 Jan 2022 11:08 PM IST
सार
भाजपा गठंबधन ने सोमवार को पंजाब में कांग्रेस को बड़ा झटका दिया है। पूर्व जेल मंत्री सरवन सिंह फिल्लौर और बेटे दमनवीर सिंह फिल्लौर ने कांग्रेस को अलविदा कह शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) का दामन थाम लिया है।
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शिअद संयुक्त में शामिल होने पर पूर्व जेल मंत्री सरवन सिंह फिल्लौर का स्वागत करते सुखदेव सिंह ढींढसा।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम में पूर्व जेल मंत्री सरवन सिंह फिल्लौर और बेटे दमनवीर सिंह फिल्लौर ने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी है और शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) में शामिल हो गए हैं। शिरोमणि अकाली दल संयुक्त सुखदेव सिंह ढींढसा की पार्टी है। ढींढसा इस बार कैप्टन अमरिंदर सिंह की पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस व भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं।
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दोनों नेताओं के शिअद संयुक्त में शामिल होने पर इसे दोआबा में कांग्रेस के लिए बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। जहां फिल्लौर परिवार का काफी राजनीतिक दबदबा है। सरवन सिंह फिल्लौर छह बार के विधायक रहे हैं और कांग्रेस में अपनी उपेक्षा होने पर उन्होंने अपने बेटे दमनवीर सिंह फिल्लौर के साथ सोमवार को कांग्रेस पार्टी छोड़ दी और शिरोमणि अकाली दल संयुक्त के अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुखदेव सिंह ढींढसा की मौजूदगी में शिरोमणि अकाली दल संयुक्त की सदस्यता ली। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस कदम से गठबंधन को दोआबा क्षेत्र में 5-6 सीटों का फायदा होना तय है।
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सरवन सिंह फिल्लौर पहले शिरोमणि अकाली दल (बादल) के साथ थे। 2016 में उन्होंने शिअद को छोड़ कांग्रेस का हाथ थाम लिया था। पार्टी में उनका स्वागत करते हुए सुखदेव सिंह ढींढसा ने कहा कि सरवन सिंह फिल्लौर और दमनवीर सिंह फिल्लौर बीते कई दशक से उत्पीड़ित वर्गों के उत्थान के लिए काम करने के लिए जाने जाते हैं और उन्होंने पिछले कई वर्षों से दिन-रात दोआबा के लोगों, विशेष रूप से फिल्लौर के लोगों की सेवा की है। इस मौके पर ढींढसा ने कहा कि फिल्लौर जैसे नेताओं को उनकी कड़ी मेहनत के बावजूद कांग्रेस में कोई स्थान और सम्मान नहीं था, क्योंकि कांग्रेस और उसके नेता केवल पंजाब और उसके संसाधनों का शोषण कर पैसा बनाने में रुचि रखते हैं।
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