पंजाब: सोनिया गांधी नहीं चाहती थीं पंजाब में घोषित हो मुख्यमंत्री चेहरा, 2017 की जीत से उत्साहित राहुल-प्रियंका ने लिया फैसला
कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने पांचों राज्यों में बिना मुख्यमंत्री चेहरे के चुनाव लड़ने का एलान किया था। अब कांग्रेस पंजाब को छोड़कर अन्य चार राज्यों में बिना मुख्यमंत्री चेहरे के ही चुनाव लड़ेगी। अन्य राज्यों की अपेक्षा पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व पंजाब से काफी आस लगाए हुए है।
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी चुनाव से पहले पंजाब में मुख्यमंत्री चेहरा घोषित नहीं करना चाहती थीं। इसके बाद भी राहुल और प्रियंका गांधी ने पंजाब का चुनाव मुख्यमंत्री चेहरे के साथ लड़ने का फैसला किया। इस फैसले के पीछे की बड़ी वजह पंजाब के नेताओं द्वारा लगातार मुख्यमंत्री चेहरा घोषित करने की मांग और 2017 में चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री चेहरा घोषित कर चुनाव के आए सकारात्मक परिणाम का होना रहा।
हालांकि कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने पांचों राज्यों में बिना मुख्यमंत्री चेहरे के चुनाव लड़ने का एलान किया था। अब कांग्रेस पंजाब को छोड़कर अन्य चार राज्यों में बिना मुख्यमंत्री चेहरे के ही चुनाव लड़ेगी। अन्य राज्यों की अपेक्षा पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व पंजाब से काफी आस लगाए हुए है। इसको लेकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पंजाब को लेकर होने वाले फैसलों में सीधे दखल दे रहे हैं। मुख्यमंत्री चेहरे के एलान के साथ ही कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाए जाने से लेकर कांग्रेस संगठन की बागडोर नवजोत सिंह सिद्धू को दिए जाने तक के फैसले में राहुल और प्रियंका गांधी ने सीधे हस्तक्षेप किया है।
पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने बताया कि अन्य राज्यों की तरह पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी पंजाब में भी चुनाव बिना मुख्यमंत्री चेहरे के ही लड़ना चाहती थी, लेकिन राहुल और प्रियंका ने उनके इस फैसले का विरोध किया और चुनाव से पहले ही मुख्यमंत्री चेहरा घोषित करने का फैसला किया। इसके लिए राहुल गांधी के कुछ करीबियों ने सर्वे भी किया। सर्वे के परिणाम में सिद्धू को पीछे करते हुए चन्नी को लोगों ने पहली पसंद बताया। इसके बाद राहुल की ओर से पंजाब के सांसदों, विधायकों और कार्यकर्ताओं द्वारा मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर सर्वे कराया गया, जिसमें 80 प्रतिशत से अधिक ने हामी भरी। 2017 के परिणामों ने भी राहुल गांधी को इस फैसले को लेने में काफी मदद की। हालांकि 2022 में राहुल गांधी के इस फैसले से पार्टी को कितना फायदा होगा यह आने वाला समय ही बताएगा।
चन्नी के इर्द-गिर्द ही रहेगा प्रचार
कांग्रेस का मुख्यमंत्री चेहरा घोषित होने के बाद अब पार्टी ने चुनाव प्रचार को चन्नी के इर्दगिर्द सीमित करने का फैसला किया है। प्रचार के लिए चन्नी के पुष्पा फिल्म की तर्ज पर विशेष पोस्टर बनाए गए हैं, जिसमें चन्नी को पंजाब का शेर कहा गया है।
निखिल अल्वा के सर्वे में भी 69 प्रतिशत लोगों ने चन्नी को किया था पसंद
पार्टी के सर्वे से पहले राहुल गांधी के करीबी और मार्गेट अल्वा के बेटे निखिल अल्वा के सर्वे में भी नवजोत सिंह सिद्धू पिछड़ गए थे। निखिल के सर्वे में चरणजीत सिंह चन्नी को 69 प्रतिशत, नवजोत सिंह सिद्धू के पक्ष में 12 प्रतिशत और 9 प्रतिशत लोगों ने सुनील जाखड़ के पक्ष में वोट किया था।
चन्नी के आगे बढ़ने की 5 बड़ी वजह
- केंद्रीय नेतृत्व के फैसले को बड़े मौके के रूप में लिया
- आम आदमी की छवि को सीएम बनने के बाद भी बनाए रखा
- कभी भी कांग्रेस पार्टी के बाहर जाकर नहीं बोला
- विरोधियों के बयानों पर कभी प्रतिक्रिया नहीं दी
- केंद्रीय नेतृत्व के साथ हर बड़े फैसले में साथ खड़े रहे
सिद्धू के पिछड़ने की 5 बड़ी वजह
- केंद्रीय नेतृत्व से बाहर जाकर सार्वजनिक मंच पर बयानबाजी
- पार्टी घोषणा पत्र से पहले पंजाब मॉडल पेश कर आलाकमान को दी चुनौती
- स्वयं को सार्वजनिक मंच पर ईमानदार और दूसरे नेताओं को भ्रष्ट कहना सिद्धू को भारी पड़ा
- केंद्रीय नेतृत्व के हर फैसले के विरोध में खड़ा होना
- सिद्धू के लगातार आक्रामक तेवर राजनीति के मैदान को खेल का मैदान समझ बैठे
मुख्यमंत्री चेहरा घोषित करना केंद्रीय नेतृत्व की मजबूरी बना
पंजाब में मुख्यमंत्री चेहरा घोषित करना केंद्रीय नेतृत्व की मजबूरी बन चुका था। पार्टी के नेताओं का कहना है कि लगातार उठने वाली मांग और बदलते समीकरणों को लेकर आलाकमान को पंजाब में मुख्यमंत्री चेहरा घोषित करना पड़ा। सूत्रों की मानें तो आप का मुख्यमंत्री चेहरा घोषित होने के बाद कांग्रेस पर भी मुख्यमंत्री चेहरा घोषित किए जाने को लेकर दबाव अधिक बढ़ गया था। सर्वे में भी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सीएम चेहरा घोषित कर चुनाव लड़ने की सलाह केंद्रीय नेतृत्व को दी थी। इसके बाद राहुल गांधी को आगे आकर इस बड़े फैसले पर मुहर लगानी पड़ी।
केंद्रीय चुनाव समिति ने खारिज कर दी थी मांग
मुख्यमंत्री चेहरा घोषित किए जाने की पंजाब के नेताओं की मांग को केंद्रीय चुनाव समिति ने खारिज कर दिया था। इसके बाद सिद्धू और चन्नी लगातार सार्वजनिक मंच से मुख्यमंत्री चेहरा घोषित करने की मांग कर रहे थे। ऐसी परिस्थितियों को देखते हुए केंद्रीय नेतृत्व के विरोध में जाकर राहुल और प्रियंका ने इस फैसले को अंजाम तक पहुंचाया।