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मेयर चुनाव में क्या कांग्रेस 17 साल पुराना इतिहास दोहरा पाएगी, देखिए समीकरण
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 18 Dec 2017 10:35 AM IST
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कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा
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पंजाब में इतिहास दोहराने के बाद जनवरी 2018 में होने वाले चंडीगढ़ मेयर चुनाव में क्या कांग्रेस 17 साल पुराना इतिहास फिर से दोहरा पाएगी? नगर निगम में कांग्रेस के मात्र चार पार्षद है। ऐसे में मेयर चुनाव के लिए कांग्रेस की नजर सिर्फ भाजपा की गुटबाजी पर है। भाजपा के पार्षदों और नेताओं की ऐसी ही गुटबाजी का फायदा कांग्रेस साल 2001 में ले चुकी है। उस समय कांग्रेस के सिर्फ तीन ही पार्षद थे जबकि भाजपा-अकाली गठबंधन के 17 पार्षद होने के बावजूद कांग्रेस के राजकुमार गोयल ने मेयर और गुरचरण दास काला ने सीनियर डिप्टी मेयर पद पर कब्जा किया था।
उस समय भाजपा के अपने ही पार्षदों ने अपने ही उम्मीदवार रजना शाही को बुरी तरह से चुनाव हरा दिया था। ऐसे में कांग्रेस नेताओं को मानना है कि भाजपा के नेताओं में इस समय साल 2001 की तरह ही गुटबाजी है। उस समय राज कुमार गोयल और गुरचरण दास काला पार्षद का चुनाव 1996 में पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन के समर्थन से जनता पार्टी से ही जीते थे लेकिन बाद में वह कांग्रेस में शामिल हो गए थे जिससे कांग्रेस के तीन पार्षद हो गए थे उस समय कांग्रेस की हालत काफी पतली थी। उस समय भी नौ मनोनीत पार्षदों के वोट थे।
भाजपा में इस समय चार गुट है जो पार्षद टंडन, सांसद खेर, पूर्व सांसद सत्यपाल जैन और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन के गुट में बंटे हैं। कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि अगर भाजपा में से ही बगावत कर कोई पार्षद खड़ा होता है तो कांग्रेस उस उम्मीदवार को समर्थन दे देंगी। कांग्रेस पार्टी भाजपा के पार्षदों के संपर्क में है हर गतिविधि पर नजर रखे हुए हैं। कांग्रेस का मानना है कि एक गुट का ऑफिशियल उम्मीदवार बनने पर भाजपा का दूसरा गुट नाराज होना आवश्यक है।
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अगर कांग्रेस को भाजपा के अधिकतर पार्षदों से क्रास वोटिंग करने का मैसेज आ गया तो कांग्रेस अपना उम्मीदवार मैदान में उतारेंगी। ऐसा होने पर देवेंद्र सिंह बबला को कांग्रेस मेयर चुनाव के लिए मैदान में उतार सकती है। मालूम हो कि बबला को इस साल जनवरी माह में हुए वित्त एवं अनुबंध कमेटी के चुनाव में भाजपा के बीच हुई क्रास वोटिंग का फायदा मिला था और उन्होंने भाजपा के ही उम्मीदवार हीरा नेगी को चुनाव हरा दिया था। इस समय भाजपा में मेयर पद के लिए अरुण सूद और देवेश मौदगिल दो दावेदार है। सूद टंडन और मोदगिल पूर्व सांसद जैन के गुट के है।
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उस समय भाजपा के अपने ही पार्षदों ने अपने ही उम्मीदवार रजना शाही को बुरी तरह से चुनाव हरा दिया था। ऐसे में कांग्रेस नेताओं को मानना है कि भाजपा के नेताओं में इस समय साल 2001 की तरह ही गुटबाजी है। उस समय राज कुमार गोयल और गुरचरण दास काला पार्षद का चुनाव 1996 में पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन के समर्थन से जनता पार्टी से ही जीते थे लेकिन बाद में वह कांग्रेस में शामिल हो गए थे जिससे कांग्रेस के तीन पार्षद हो गए थे उस समय कांग्रेस की हालत काफी पतली थी। उस समय भी नौ मनोनीत पार्षदों के वोट थे।
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भाजपा में इस समय चार गुट है जो पार्षद टंडन, सांसद खेर, पूर्व सांसद सत्यपाल जैन और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन के गुट में बंटे हैं। कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि अगर भाजपा में से ही बगावत कर कोई पार्षद खड़ा होता है तो कांग्रेस उस उम्मीदवार को समर्थन दे देंगी। कांग्रेस पार्टी भाजपा के पार्षदों के संपर्क में है हर गतिविधि पर नजर रखे हुए हैं। कांग्रेस का मानना है कि एक गुट का ऑफिशियल उम्मीदवार बनने पर भाजपा का दूसरा गुट नाराज होना आवश्यक है।
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अगर कांग्रेस को भाजपा के अधिकतर पार्षदों से क्रास वोटिंग करने का मैसेज आ गया तो कांग्रेस अपना उम्मीदवार मैदान में उतारेंगी। ऐसा होने पर देवेंद्र सिंह बबला को कांग्रेस मेयर चुनाव के लिए मैदान में उतार सकती है। मालूम हो कि बबला को इस साल जनवरी माह में हुए वित्त एवं अनुबंध कमेटी के चुनाव में भाजपा के बीच हुई क्रास वोटिंग का फायदा मिला था और उन्होंने भाजपा के ही उम्मीदवार हीरा नेगी को चुनाव हरा दिया था। इस समय भाजपा में मेयर पद के लिए अरुण सूद और देवेश मौदगिल दो दावेदार है। सूद टंडन और मोदगिल पूर्व सांसद जैन के गुट के है।
पहली बार मनोनीत पार्षद नहीं करेंगे मतदान
चंडीगढ़ कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
1996 से लेकर इस साल तक प्रशासन की ओर से नियुक्त नौ मनोनीत पार्षद मेयर, सीनियर और डिप्टी मेयर चुनाव में मतदान करते थे लेकिन नए साल के जनवरी माह में होने वाले चुनाव में मनोनीत वोट नहीं करेंगे क्योंकि पंजाब व हरियाणा कोर्ट ने मनोनीत पार्षदों के वोटिंग अधिकार को खारिज कर दिया है।
पिछले साल चुनाव में भाजपा में हुई थी क्रास वोटिंग
16 साल बाद भाजपा ने निगम की मेयर की कुर्सी पर नौ मनोनीत पार्षदों और कांग्रेस से पार्टी छोड़कर भाजपा में आए चार पार्षदों की मदद से कब्जा किया था। लेकिन उस समय भी भाजपा पार्षदों ने क्रास वोटिंग की थी। कांग्रेस के पास सिर्फ आठ वोट थे लेकिन कांग्रेस के उम्मीदवार मुकेश बस्सी ने भाजपा पार्षदों की क्रास वोटिंग का फायदा उठाते हुए 15 मत हासिल किए थे।
उस समय भाजपा के पूर्व सांसद सत्यपाल जैन और पंचकूला के वर्तमान विधायक ज्ञानचंद गुप्ता के बीच बंटी हुई थी। उस दौरान मुझे 16 वोट हासिल हुए थे, जबकि भाजपा उम्मीदवार रजना शाही को 13 मत हासिल हुए थे। भाजपा इस समय चार गुटों में बंटी हुई है। जिसका फायदा कांग्रेस को मिला सकता है। इस समय भी उन्हें वैसी ही भाजपा में गुटबाजी दिख रही है।
- राज कुमार गोयल, पूर्व मेयर
भाजपा के नेताओं और पार्षदों के बीच की गुटबाजी किसी से छिपी हुई नहीं है। शहर के विकास पर कम गुटबाजी पर भाजपा नेता ज्यादा यकीन करते हैं जिसका खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है। मेयर चुनाव के लिए कांग्रेस पार्टी जल्द ही बैठक करेगी।
- प्रदीप छाबड़ा, कांग्रेस अध्यक्ष
पिछले साल चुनाव में भाजपा में हुई थी क्रास वोटिंग
16 साल बाद भाजपा ने निगम की मेयर की कुर्सी पर नौ मनोनीत पार्षदों और कांग्रेस से पार्टी छोड़कर भाजपा में आए चार पार्षदों की मदद से कब्जा किया था। लेकिन उस समय भी भाजपा पार्षदों ने क्रास वोटिंग की थी। कांग्रेस के पास सिर्फ आठ वोट थे लेकिन कांग्रेस के उम्मीदवार मुकेश बस्सी ने भाजपा पार्षदों की क्रास वोटिंग का फायदा उठाते हुए 15 मत हासिल किए थे।
उस समय भाजपा के पूर्व सांसद सत्यपाल जैन और पंचकूला के वर्तमान विधायक ज्ञानचंद गुप्ता के बीच बंटी हुई थी। उस दौरान मुझे 16 वोट हासिल हुए थे, जबकि भाजपा उम्मीदवार रजना शाही को 13 मत हासिल हुए थे। भाजपा इस समय चार गुटों में बंटी हुई है। जिसका फायदा कांग्रेस को मिला सकता है। इस समय भी उन्हें वैसी ही भाजपा में गुटबाजी दिख रही है।
- राज कुमार गोयल, पूर्व मेयर
भाजपा के नेताओं और पार्षदों के बीच की गुटबाजी किसी से छिपी हुई नहीं है। शहर के विकास पर कम गुटबाजी पर भाजपा नेता ज्यादा यकीन करते हैं जिसका खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है। मेयर चुनाव के लिए कांग्रेस पार्टी जल्द ही बैठक करेगी।
- प्रदीप छाबड़ा, कांग्रेस अध्यक्ष