अमृतसर: हाई प्रोफाइल ड्रामे के बीच कांग्रेस पार्षदों ने रमन बख्शी को मेयर घोषित किया, निगम कमिश्नर ने बैठक को बताया असांविधानिक
रमन बख्शी ने कहा कि वे पार्टी के पार्षदों का सम्मान करते हैं। पार्षदों ने उन्हें मेयर बनाया है। अगर उन्हें मेयर वाला दफ्तर नहीं मिला तो वे अपने दफ्तर से ही मेयर का काम देखेंगे। अगर उनके काम में रुकावट डालने की कोशिश की जाती है तो हाईकोर्ट जाएंगे।
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अमृतसर के मेयर करमजीत सिंह रिंटू की ओर से सोमवार को बुलाई पार्षदों की बैठक को रद्द किए जाने के बाद सोमवार को कांग्रेस पार्षदों ने हाई प्रोफाइल ड्रामे के बीच पार्षदों की बैठक में डिप्टी मेयर रमन बख्शी को मेयर घोषित कर दिया। पार्षदों ने कहा कि निगम की बैठक को रद्द नहीं किया जा सकता, इसलिए उन्होंने बैठक कर सीनियर डिप्टी मेयर रमन बख्शी को मेयर बनाए जाने का प्रस्ताव पेश किया और इसकी रिपोर्ट नगर निगम कमिश्नर संदीप रिशी को दी।
निगम कमिश्नर ने कांग्रेस पार्षदों की बैठक को असांविधानिक और अवैध करार देते हुए कहा कि इसमें उनकी कोई भूमिका नहीं, क्योंकि निगम हाउस की बैठक बुलाने या रद्द करने का अधिकार सिर्फ और सिर्फ मेयर के पास ही है। इसलिए वे उनका (कांग्रेस) पार्षदों का संदेश मेयर और सरकार तक पहुंचा देंगे। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस पार्षदों की ओर से मेयर घोषित रमन बख्शी ने कहा कि अगर उन्हें मेयर का दफ्तर नहीं मिलता तो वे अपने दफ्तर से ही मेयर का काम करेंगे। इसके साथ ही रमन बख्शी ने कहा कि अगर उनके काम में रुकावट डाली गई तो वे इंसाफ के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
गौर हो कि अमृतसर के मेयर करमजीत सिंह रिंटू की ओर से पंजाब विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस पार्टी को छोड़कर आम आदमी पार्टी में शामिल होने के बाद से ही कांग्रेसियों में रिंटू का विरोध हो रहा था। जिसे लेकर कांग्रेस विधायक तीन बार नगर निगम के कमिश्नर संदीप रिशी को पत्र देकर निगम की बैठक बुलाने की मांग की थी। इस दौरान मेयर रिंटू ने गत सप्ताह निगम कमिश्नर को 40 पार्षदों और पांच विधायकों का समर्थन होने संबंधी निगम कमिश्नर को मांग पत्र दिया था। साथ ही उन्होंने 21 मार्च को निगम हाउस की बैठक बुलाने का आदेश जारी किया और 19 मार्च को बैठक को रद्द कर दिया।
मेयर रिंटू के इस फैसले के खिलाफ कांग्रेस के 52 पार्षद सोमवार निगम हाउस में जुटे। निगम के सीनियर डिप्टी मेयर रमन बख्शी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्षद परेड करते हुए निगम कमिश्नर के दफ्तर पहुंचे और निगम हाउस की बैठक बुलाने को कहा लेकिन कमिश्नर संदीप रिशी ने इसमें अपनी असमर्थता जताई और कहा कि यह अधिकार मेयर के पास हैं। इसके बाद कांग्रेस पार्षदों ने शाम तीन बजे से लेकर सायं पांच बजे तक चले हाई प्रोफाइल ड्रामे के बीच खुद ही बैठक करने के बाद निगम के सीनियर डिप्टी मेयर रमन बख्शी को निगम का मेयर घोषित कर दिया।
इस संबंध में जब निगम कमिश्नर संदीप रिशी से बात की गई तो उन्होंने कांग्रेसियों की इस बैठक को असांविधानिक और अवैध करार दिया और कहा कि निगम हाउस की बैठक बुलाने का अधिकार मेयर के पास ही है। संदीप रिशी ने कांग्रेस पार्षदों से कहा कि अगर वे बैठक बुलाना चाहते हैं तो लिखित में उन्हें दें ताकि उसकी जानकारी मेयर को दी सके। वहीं दूसरी तरफ सीनियर डिप्टी मेयर रमन बख्शी ने कहा कि वे पार्टी के पार्षदों का सम्मान करते हैं। पार्षदों ने उन्हें मेयर बनाया है। अगर उन्हें मेयर वाला दफ्तर नहीं मिला तो वे अपने दफ्तर से ही मेयर का काम देखेंगे। अगर उनके काम में रुकावट डालने की कोशिश की जाती है तो हाईकोर्ट जाएंगे।
महिला पार्षदों की जगह पति या बेटे का पहुंचना महिला अधिकारों का मजाक
आम आदमी पार्टी के यूथ ज्वाइंट डायरेक्टर वरुण राणा ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान निगम चुनाव में 50 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई थीं लेकिन यह देखा गया कि महिलाओं के पार्षद बनने के बाद उनके पति या बेटे हाउस की बैठक में कार्रवाई करते हैं, जो महिला अधिकारों के साथ घटिया मजाक है। उन्होंने कहा कि वे बहुत जल्द ही इसे लेकर निगम कमिश्नर संदीप रिशी को एक मांग पत्र देंगे, ताकि निगम हाउस की बैठक में महिलाओं के सम्मान और अधिकार की रक्षा की जा सके।