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Chandigarh News: नेता प्रतिपक्ष पर असमंजस, हुड्डा नहीं बने तो खाली करना होगा आवास
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कांग्रेस नेता बोले- एक से डेढ़ हफ्ते में तय हो जाएगा नेता प्रतिपक्ष का नाम, हुड्डा रेस में आगे
सरकार की ओर से आवास खाली करने को लेकर नोटिस की चर्चा, हुड्डा बोले- ऐसी कोई बात नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में नेता प्रतिपक्ष को लेकर असमंजस बरकरार है। कांग्रेस अब तक अपने 37 विधायकों में से नेता प्रतिपक्ष का नाम तय नहीं कर पाई है। पिछले दिनों दिल्ली में हाईकमान की बैठक भी हुई, मगर नेता प्रतिपक्ष पर कोई बातचीत नहीं की गई।
हालांकि नेता प्रतिपक्ष की दौड़ में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा सबसे आगे हैं। पिछले दिनों विधानसभा सत्र के दौरान उनके कड़े तेवर देखने को मिले। कई मुद्दों पर उन्होंने सरकार को घेरने की कोशिश की थी। उनके समर्थन में 32 विधायक पहले ही सहमति जता चुके हैं। वहीं, यदि वह नेता प्रतिपक्ष नहीं बनते हैं तो पार्टी अशोक अरोड़ा के नाम पर मुहर लगा सकती है। ऐसे में पूर्व सीएम हुड्डा को सेक्टर सात स्थित आवास को खाली करना पड़ सकता है। विधायक के तौर पर उन्हें एमएलए फ्लैट आवंटित किया जाएगा।
2014 से 2019 तक उन्हें एमएलए फ्लैट आवंटित किया गया था। चर्चा है कि सरकार की ओर से उन्हें कोठी खाली करने को लेकर नोटिस दिया गया है और उन्होंने 15 दिन का समय मांगा है। इस पर पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं है। उन्हें कोई नोटिस नहीं मिला। वहीं, कांग्रेस से जुड़े पदाधिकारियों ने बताया कि जब तक नेता प्रतिपक्ष तय नहीं होता, तब तक पूर्व सीएम कोठी खाली नहीं करेंगे। कोठी खाली नहीं करने की स्थिति में जो भी पैनल रेंट आएगा, उसे भर दिया जाएगा। सरकार ने उन्हें यह कोठी नेता प्रतिपक्ष के तौर पर दी थी। नेता प्रतिपक्ष को कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिलता है। वहीं, कांग्रेस के सूत्रों ने यह भी बताया है कि अगले एक से डेढ़ हफ्ते के भीतर नेता प्रतिपक्ष का फैसला हो जाएगा।
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सरकार की ओर से आवास खाली करने को लेकर नोटिस की चर्चा, हुड्डा बोले- ऐसी कोई बात नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में नेता प्रतिपक्ष को लेकर असमंजस बरकरार है। कांग्रेस अब तक अपने 37 विधायकों में से नेता प्रतिपक्ष का नाम तय नहीं कर पाई है। पिछले दिनों दिल्ली में हाईकमान की बैठक भी हुई, मगर नेता प्रतिपक्ष पर कोई बातचीत नहीं की गई।
हालांकि नेता प्रतिपक्ष की दौड़ में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा सबसे आगे हैं। पिछले दिनों विधानसभा सत्र के दौरान उनके कड़े तेवर देखने को मिले। कई मुद्दों पर उन्होंने सरकार को घेरने की कोशिश की थी। उनके समर्थन में 32 विधायक पहले ही सहमति जता चुके हैं। वहीं, यदि वह नेता प्रतिपक्ष नहीं बनते हैं तो पार्टी अशोक अरोड़ा के नाम पर मुहर लगा सकती है। ऐसे में पूर्व सीएम हुड्डा को सेक्टर सात स्थित आवास को खाली करना पड़ सकता है। विधायक के तौर पर उन्हें एमएलए फ्लैट आवंटित किया जाएगा।
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2014 से 2019 तक उन्हें एमएलए फ्लैट आवंटित किया गया था। चर्चा है कि सरकार की ओर से उन्हें कोठी खाली करने को लेकर नोटिस दिया गया है और उन्होंने 15 दिन का समय मांगा है। इस पर पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं है। उन्हें कोई नोटिस नहीं मिला। वहीं, कांग्रेस से जुड़े पदाधिकारियों ने बताया कि जब तक नेता प्रतिपक्ष तय नहीं होता, तब तक पूर्व सीएम कोठी खाली नहीं करेंगे। कोठी खाली नहीं करने की स्थिति में जो भी पैनल रेंट आएगा, उसे भर दिया जाएगा। सरकार ने उन्हें यह कोठी नेता प्रतिपक्ष के तौर पर दी थी। नेता प्रतिपक्ष को कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिलता है। वहीं, कांग्रेस के सूत्रों ने यह भी बताया है कि अगले एक से डेढ़ हफ्ते के भीतर नेता प्रतिपक्ष का फैसला हो जाएगा।
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