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किसान आंदोलन: अंबाला जाने के लिए जान जोखिम में डाल रहे लोग, टिवाणा में घग्गर पर बने अस्थाई पुल की हालत खस्ता

Sat, 06 Jul 2024 12:22 PM IST
निवेदिता वर्मा सुदेश तनेजा, संवाद, राजपुरा (पंजाब)
सुदेश तनेजा, संवाद, राजपुरा (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 06 Jul 2024 12:22 PM IST
सार

पिछले पांच माह से शंभू बॉर्डर पर चल रहे किसानों के धरने के कारण वाहन चालक इसी रास्ते से निकलते हैं क्योंकि इस रास्ते से अंबाला की दूरी केवल पांच किलोमीटर की है। जबकि जीरकपुर से डेराबस्सी के रास्ते ये दूरी लगभग 25 किलोमीटर है। 

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Condition of temporary bridge built on Ghaggar in Tiwana is bad kisan andolan on shambhu border
अस्थाई कच्चे रास्ते से गुजरते वाहन चालक - फोटो : संवाद

विस्तार

पिछले पांच माह से शंभू बॉर्डर पर किसानों का धरना चल रहा है। इस धरने के कारण अमृतसर, पटियाला, मोहाली से अंबाला व दिल्ली जाने वाले वाहन गांव टिवाणा-झजों में घग्गर नदी पर बने अस्थाई पुल से निकल रहे हैं। बारिश के चलते इस पुल की हालत खस्ता हो चुकी है। 

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गांव के लोगों ने वाहन चालकों को इस रास्ते से न जाने देने के लिए बड़े पत्थर तक रख दिए हैं लेकिन वाहन चालक पत्थर हटाकर जान जोखिम में डालकर इसी रास्ते से निकल रहे हैं। जंड मंगोली व घनौर के रास्ते भी बारिश के चलते कीचड़ से लथपथ हो चुके हैं, वहां से निकलना भी वाहन चालकों के लिए खतरे से कम नहीं है। 
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गांव टिवाणा के गुरप्रीत सिंह, मेघराज टिवाणा, गांव बासमां के बगा सिंह, गांव झजों के करनैल सिंह, गांव छडुबड़ के चरनजीत सिंह, गांव बुढनपुर के अमर सिंह ने बताया कि घग्घर नदी पार करने के लिए गांववालों ने छोटा अस्थाई पुल बनाया हुआ था जहां से नजदीकी गांव के लोग आते-जाते रहते थे। कुछ वाहन चालक शंभू बॉर्डर का टोल बचाने के लिए भी इसी रास्ते का उपयोग करते थे। 

ग्रामीणों ने कहा कि पिछले तीन दिनों से लगातार चल रही बारिश के चलते घग्गर में पानी बढ़ गया है वहीं गांव के कच्चे रास्ते पर भी फिसलन है। उन्होंने बड़े वाहन चालकों को यह रास्ता न अपनाने की अपील भी की है।

इन गांवों के लोग करते रहे हैं अस्थाई पुल का उपयोग

शंभू बार्डर से सटे गांव राजगढ़, महमूदपुर, तेपला, बासमां, संजरपुर, बपरौर, ननहेड़ा, गदापुर नंदगढ़ और रामनगर सैणिया के विद्यार्थी, व्यवसायी, दिहाड़दार इसी पुल से आते-जाते रहते हैं लेकिन किसानों के रास्ता रोके जाने से उक्त गांव के लोग बेहद परेशान हो चुके हैं और अब उनका धैर्य जवाब देने लगा है। 

दस से पन्द्रह मिनट में अंबाला पहुंचने वालों को अब डेढ़ से दो घंटे लग रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बीते दिनों गांव राजगढ़ की परमजीत कौर की अचानक तबीयत खराब हो गई थी। अस्थाई रास्ते से कार को ले जाना संभव नहीं था इसलिए उसका पति पाला राम व बेटा विक्की बाइक पर बैठाकर उसे अंबाला की तरफ ले जा रहे थे। उसने रास्ते में दम तोड़ दिया। रास्ता लंबा और कच्चा होने के कारण वह समय पर अस्पताल नहीं पहुंच सके। उन्होंने किसानों से अपील की कि नेशनल हाईवे से अंबाला जाने के लिए कम से कम एक रास्ता खोल दें।

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