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स्वास्थ्य विभाग का हाल: डिलीवरी के 48 घंटे के अंदर ही हजारों माताओं को अस्पताल से दे दी छुट्टी, तर्क भी अजीब
Sat, 01 Feb 2025 03:12 PM IST
निवेदिता वर्मा
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 01 Feb 2025 03:12 PM IST
सार
पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड की अनदेखी करते हुए शहर के सरकारी अस्पतालों में भर्ती प्रसूताओं को समय से पहले छुट्टी दी जा रही है जबकि विशेषज्ञों के अनुसार तय मानक के अनुसार प्रसूता और नवजात का अस्पताल में रुकना बेहद जरूरी है। क्योंकि उस दौरान उन्हें संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा होता है।
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गर्भवती
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
गर्भवतियों और नवजात की सुरक्षा को लेकर स्वास्थ्य विभाग अनदेखी का रवैया अपनाए हुए है।
स्थिति यह है कि पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड की अनदेखी करते हुए शहर के सरकारी अस्पतालों में भर्ती प्रसूताओं को समय से पहले छुट्टी दी जा रही है जबकि विशेषज्ञों के अनुसार तय मानक के अनुसार प्रसूता और नवजात का अस्पताल में रुकना बेहद जरूरी है। क्योंकि उस दौरान उन्हें संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा होता है। लेकिन विभाग ने इसके महत्व को समझे बिना 2015 से 2023 के बीच 73000 से ज्यादा महिलाओं को डिलीवरी के बाद दो दिन से पहले अस्पताल से छुट्टी दे दी। यह चौंकाने वाला मामला सेंट्रल ऑडिट की रिपोर्ट में सामने आया है, जिसमें ऑडिट टीम ने आपत्ति जताते हुए इसका कारण पूछा।
जवाब में बताया गया कि ज्यादातर मामलों में महिलाओं ने मजदूरी का हवाला देकर जल्दी छुट्टी करने की जिद की, जिसके कारण उन्हें 2 दिन से पहले अस्पताल से डिस्चार्ज करना पड़ा। इस जवाब पर ऑडिट टीम ने आपत्ति जताई है क्योंकि मानकों का पालन सुनिश्चित करना विभाग की जिम्मेदारी है।
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स्थिति यह है कि पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड की अनदेखी करते हुए शहर के सरकारी अस्पतालों में भर्ती प्रसूताओं को समय से पहले छुट्टी दी जा रही है जबकि विशेषज्ञों के अनुसार तय मानक के अनुसार प्रसूता और नवजात का अस्पताल में रुकना बेहद जरूरी है। क्योंकि उस दौरान उन्हें संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा होता है। लेकिन विभाग ने इसके महत्व को समझे बिना 2015 से 2023 के बीच 73000 से ज्यादा महिलाओं को डिलीवरी के बाद दो दिन से पहले अस्पताल से छुट्टी दे दी। यह चौंकाने वाला मामला सेंट्रल ऑडिट की रिपोर्ट में सामने आया है, जिसमें ऑडिट टीम ने आपत्ति जताते हुए इसका कारण पूछा।
जवाब में बताया गया कि ज्यादातर मामलों में महिलाओं ने मजदूरी का हवाला देकर जल्दी छुट्टी करने की जिद की, जिसके कारण उन्हें 2 दिन से पहले अस्पताल से डिस्चार्ज करना पड़ा। इस जवाब पर ऑडिट टीम ने आपत्ति जताई है क्योंकि मानकों का पालन सुनिश्चित करना विभाग की जिम्मेदारी है।
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