अमर उजाला पड़ताल: जीएमएसएच-16 में प्रसव के बाद एक ही बेड पर लिटाए जा रहे दो महिलाएं और दो नवजात
वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन के सलाहकार व बालरोग विशेषज्ञ डॉ. आरएस बेदी का कहना है कि एक बेड पर दो नवजातों को भर्ती करने की स्थिति में क्रास इंफेक्शन होने का खतरा होगा। दोनों बच्चों को संक्रमण हो सकता है। इससे बचाव के लिए मरीज से मरीज की दूरी कम से कम एक से डेढ़ मीटर होनी चाहिए।
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विस्तार
चंडीगढ़ के सेक्टर 16 स्थित सरकारी अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के वार्ड की स्थिति बदतर है। वहां भर्ती प्रसूताएं एक-एक पल डर के साए में गुजारने को मजबूर हैं। कारण, एक बेड पर दो प्रसूताओं व दो नवजातों को भर्ती किया जाना है। इससे संक्रमण का खतरा तो मंडरा ही रहा, दूसरी तरफ दुर्घटना का भी डर बरकरार है। उधर, स्वास्थ्य सचिव का कहना है कि मरीजों के दबाव के कारण ये स्थिति उत्पन्न हो रही है। इन सबके बीच अस्पताल में भर्ती प्रसूताओं व उनके नवजातों के साथ चिकित्सा सुविधा के नाम पर खुलेआम नाइंसाफी की जा रही है।
केस- 1
जीएमएसएच-16 के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के वार्ड में बेड नबंर-25 पर रविवार को दो महिलाएं और दो नवजात लेटे हुए थे। दोनों प्रसूताएं इस डर से परेशान थीं कि कहीं उनका बच्चा बेड से गिर न जाए। दोनों चाहकर भी न तो करवट ले पा रही थीं न ही ठीक से लेट पा रही थीं।
केस- 2
वार्ड के ही बेड नंबर-26 पर भर्ती दोनों प्रसूताएं अपने अपने बच्चे को गोद में लिए रो रही थीं। पूछने पर बताया कि वे और उनका परिवार बेहद डरा हुआ है इसलिए वे दोनों ही अस्पताल में रुकना नहीं चाहतीं। वे ड्यूटी पर तैनात स्टाफ से लगातार छुट्टी करने के लिए आग्रह कर रहीं थीं।
डॉ. आरएस बेदी बोले-ये संक्रमण फैलाने की व्यवस्था है
वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन के सलाहकार व बालरोग विशेषज्ञ डॉ. आरएस बेदी का कहना है कि ऐसा स्थिति में क्रास इंफेक्शन होने का खतरा होगा। इससे उस बेड पर भर्ती दोनों बच्चों को संक्रमण हो सकता है। इससे बचाव के लिए मरीज से मरीज की दूरी कम से कम एक से डेढ़ मीटर होनी चाहिए। ऐसी स्थिति से बचाव के लिए गंभीर मरीजों और सामान्य मरीजों को उनकी स्थिति के अनुसार अन्य सिविल अस्पताल में शिफ्ट किया जाना चाहिए। ट्राएज के मानक के अनुसार उन मरीजों का विश्लेषण होना चाहिए। इसके साथ ही आसपास के प्रदेशों से रेफर मरीजों का दबाव करना होगा। इनके लिए वहां सुविधाओं को विस्तार देने पर काम करना होगा।
कोरोना से बचाव का मानक कहां गया
वार्ड में भर्ती प्रसूताओं व उनके परिजनों का कहना है कि एक तरफ तो कोरोना से बचाव के लिए सभी लोगों को मास्क पहनने और अन्य मानकों का पालन करने का निर्देश दिया जा रहा है, वहीं एक बेड पर चार लोगों को भर्ती कर अपने ही आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। एक प्रसूता के पति का कहना है कि जब निदेशक स्वास्थ्य के नाक के नीचे ये अव्यवस्था है तो अन्य जगहों पर क्या आलम होगा खुद ही अनुमान लगाया जा सकता है। गौरतलब है कि मौजूदा समय में मंकी पॉक्स, टोमैटो फीवर जैसे संक्रमण का खतरा बरकरार है। ये दोनों ही संक्रमण सबसे ज्यादा बच्चों को ही अपनी चपेट में लेते हैं। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग जनता को जागरूक भी कर रहा है। लेकिन अस्पताल में ही इसे लेकर अनदेखी की जा रही है।
शौचालय पर महिला-पुरुष लिखा ही नहीं
वहीं विभाग के वेटिंग एरिया के पास बनाए गए शौचालय पर महिला-पुरुष तक नहीं लिखा गया है। ऐसे में वहां भर्ती महिलाओं के परिजनों को शौचालय के स्तर पर भी काफी परेशानी हो रही है। एक गर्भवती के पति ने बताया कि शौचालय के अंदर जाने में इस बात का डर लगता है कि कहीं गलती से महिला वाले में चला गया तो बेवजह फजीहत हो जाएगी। यही हाल महिलाओं के साथ भी है लेकिन अस्पताल प्रशासन को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
मरीजों का दबाव होने के कारण कुछ परेशानी जरूर हो रही है लेकिन एक बेड पर दो महिलाओं और दो नवजातों को भर्ती करने की सूचना मुझे नहीं है। अगर ऐसा किया जा रहा है तो अतिरिक्त बेड लगवाने की व्यवस्था की जाएगी जिससे इस समस्या पर कुछ काबू पाया जा सके। -यशपाल गर्ग, स्वास्थ्य सचिव