गुड न्यूज: अब घर बैठे कराएं PGI से इलाज
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पीजीआई ने दूर-दराज इलाकों में रहने वाले मानसिक रूप से बीमार मरीजों का इलाज आसान बना दिया है। कंप्यूटर बेस्ड तकनीक से बीमार लोगों को अपने इलाके में ही इलाज मिल जाता है। इससे उन्हें पीजीआई नहीं आना पड़ता है।
पीजीआई ने टेलीसाइकेट्री के माध्यम से अब तक 2500 मानसिक बीमार मरीजों का इलाज करने में सफलता प्राप्त की है। पीजीआई के इस प्रोजेक्ट की भारत सरकार ने भी सराहना की है।
टेलीसाइकेट्री प्रोजेक्ट को भारत सरकार ने साल 2014 का बेस्ट गर्वनेंस प्रोजेक्ट के तौर पर सम्मानित किया है। पीजीआई ने इस प्रोजेक्ट को डिपार्टमेंट की डीन व साइकेट्री डिपार्टमेंट की एचओडी डॉ. सविता मल्होत्रा ने पूरा किया है। इस प्रोजेक्ट को साइकेट्रिस्टऑन वेब मॉडल का नाम दिया है।
इस तरह किया जाता है इलाज
पीजीआई ने जम्मू कश्मीर, श्रीनगर, उत्तराखंड व हिमाचल में एक-एक सेंटर खोला है। इसका नोडल सेंटर पीजीआई में स्थापित किया गया है। मान लीजिए हिमाचल में रहने वाला मानसिक रोगी में बिलासपुर में बनाए गए टेलीसाइकेट्री के सेंटर में आता है।
यहां पर बैठा कर्मचारी पीजीआई की ओर से तैयार किया गए सवाल-जवाब के फार्मेट को कंप्यूटर में मरीज से पूछे गए सवाल के आधार पर भरेगा। फार्मेट को भरते ही कंप्यूटर का सॉफ्टवेयर मरीज की मानसिक बीमारी डाइग्नोज कर देगा। उसके बाद ही उस बीमारी का इलाज भी सॉफ्टवेयर बता देगा।
कर्मचारी उसी फार्मेट के तहत मरीज को दवा देगा और वह ठीक हो जाएगा। यदि गंभीर बीमारी है तो पीजीआई के नोडल सेंटर को कनेक्ट कर विशेषज्ञ उसे देख लेगा। इसके लिए हर मरीज को यूनिक आइडेंटीफिकेशन नंबर मिलता है। इसके अलावा मरीज का इलेक्ट्रोनिक मेडिकल रिकार्ड भी मेन्टेन किया जाएगा।
साइकेट्रिस्ट का है विकल्प
देश में साइकेट्रिस्ट की काफी कमी है। एक जानकारी के मुताबिक हर एक लाख व्यक्तियों पर दो साइकेट्रिस्ट हैं। दूर-दराज इलाकों में तो विशेषज्ञ मिलते तक नहीं।
ऐसे में बीमार लोगों को पीजीआई या दूसरे संस्थान में जाना पड़ता है। डॉ. सविता मल्होत्रा के मुताबिक इस सॉफ्टवेयर को मेंटल हेल्थ के कई अनुभवी लोगों ने बनाया है। यह एक विशेषज्ञ डॉक्टर के बराबर ही काम करता है।