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LS Polls: हरियाणा में BJP मोदी और राम नाम के सहारे, कांग्रेस को गारंटी पर भरोसा; क्षेत्रीय मुद्दे भी गूंज रहे

Sat, 04 May 2024 07:56 AM IST
विजय पुंडीर आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: विजय पुंडीर Updated Sat, 04 May 2024 07:56 AM IST
सार

Haryana Lok Sabha Election 2024 BJP vs Congress: हरियाणा में भाजपा का असल उदय 2014 के चुनाव में हुआ। मोदी लहर में पार्टी ने करीब 41% वोट पाकर हरियाणा की सात सीटें जीतीं। वहीं, 2019 में दस की दस सीटें अपने नाम कीं और वोट शेयर बढ़कर 58 फीसदी पहुंच गया। 

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Haryana Lok Sabha Election Competition Between Bjp Congress for LS Polls in Haryana Regional Issues Raised
भाजपा और कांग्रेस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा में लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा और कांग्रेस के बीच जंग दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है। दसों सीट जीतने के लिए भाजपा-कांग्रेस के सेनापति मैदान में उतर गए हैं। मतदाताओं को लुभाने के लिए तरकश से तीर निकाल कर अब सीधे निशाने पर लगाए जा रहे हैं। भाजपा का पूरा जोर विधानसभा वार रैलियों पर है। इन रैलियों में दिए जाने वाले भाषणों के लिए भाजपा के थिंक टैंक ने विशेष रणनीति बनाई है। पिछले चुनाव का प्रदर्शन (10-0) दोहराने के लिए पार्टी पीएम मोदी को केंद्र में रखने के साथ मतदाताओं के धुव्रीकरण के लिए वह अपने भाषणों में  बदलाव कर रही है।

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उधर, कांग्रेस अपने प्रचार में घोषणा पत्र के साथ स्थानीय मुद्दों को भुनाने में जुटी है। यहां तक कि कांग्रेस घोषणा पत्र के साथ आगामी विधानसभा चुनावों में किए जाने वाले वादों को भी अभी से जनता के सामने रख रही है। पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा यहां तक कह चुके हैं कि यह चुनाव लोकसभा के साथ प्रदेश की सत्ता के लिए भी है।
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हरियाणा में भाजपा का असल उदय 2014 के चुनाव में हुआ। मोदी लहर में पार्टी ने करीब 41% वोट पाकर हरियाणा की सात सीटें जीतीं। वहीं, 2019 में दस की दस सीटें अपने नाम कीं और वोट शेयर बढ़कर 58 फीसदी पहुंच गया। पिछले दो चुनावों को देखते हुए भाजपा इस बार भी अपनी नैय्या मोदी के सहारे पार करने की कोशिश में है।

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रोहतक में नौकरी का मुद्दा, पंचकूला में ट्रांसफर पॉलिसी का हो रहा गुणगान
बीते 27 अप्रैल को सीएम सैनी ने झज्जर में रैली के दौरान नौकरी देने का मुद्दा उठाया। उन्होंने अपनी रैली में कहा-कांग्रेस राज में एक युवा को नौकरी लगने के लिए पूरा गांव मंत्री और मुख्यमंत्री के चक्कर काटता था। मगर मनोहर लाल की सरकार बनने के बाद नौकरियों का सिस्टम ऐसा बना दिया गया कि अब किसी को भी कहीं कोई पैसे देने की जरूरत नहीं है। वहीं, जब वह रोहतक लोकसभा क्षेत्र की कोसली क्षेत्र में पहुंचे तो उन्होंने सेना के जांबाज जवानों की बात छेड़ दी। उन्होंने कहा-अहीरवाल भाई देश की सुरक्षा में सीमा पर खड़े रहते हैं। 2014 से पहले सीमा पर पत्थरबाजी होती थी, मगर मोदी के पीएम बनने के बाद सीमा पर न तो पत्थरबाजी होती है और न ही पत्थरबाज नजर आते हैं। अगले दिन जब वह पंचकूला पहुंचे तो वहां वह ट्रांसफर पॉलिसी का गुणगान करते हैं। वह कहते हैं- हरियाणा सरकार ने ट्रांसफर पॉलिसी ऐसी बनाई, जिससे हर कर्मचारी को लाभ मिला। इसी तरह पूर्व सीएम मनोहर लाल भी रैलियों में खास रणनीति के तहत भाषण देते नजर आते हैं। हालांकि साढ़े नौ साल तक उन्होंने अपनी सरकार चलाई है, मगर वह अपने काम के बजाय पीएम मोदी के काम अधिक गिनवाते हैं। 

सत्ता विरोधी लहर का लाभ लेने को स्थानीय मुद्दे उठा रही कांग्रेस
चुनाव विश्लेषक सतीश त्यागी ने बताया कांग्रेस का मकसद है कि चुनाव स्थानीय मुद्दों पर ही लड़ा जाए। कांग्रेस को पता है कि यदि स्थानीय मुद्दों पर पर चुनाव लड़ा गया तो उसे सत्ता विरोधी लहर का फायदा मिलेगा। जिन लोगों की नाराजगी है, उसके वोट वह ले सकती है। 

त्यागी कहते हैं कि कांग्रेसियों की असल नजर विधानसभा चुनावों पर है। इसलिए वह स्थानीय मुद्दों को ही उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस नेता अपने घोषणा पत्र को सही से पढ़ लें  और जनता तक ले जाएं तो उन्हें इसका काफी लाभ मिल सकता है।

वोटों का ध्रुवीकरण करने को क्षेत्रवार मुद्दे उठा रही भाजपा...हर रैली में जय श्रीराम के नारे
चुनाव विश्लेषक व पॉलिटिक्स ऑफ चौधर के लेखक सतीश त्यागी कहते हैं- पिछले दस साल में भाजपा ने काफी चुनाव लड़े और जीते हैं। उनके पास अच्छा अनुभव और मंझे हुए रणनीतिकार भी हैं। इसलिए उनके भाषण मोदी पर केंद्रित होने के साथ क्षेत्रीय मुद्दों पर टिके हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में जब कांग्रेस की सरकार थी तो उस दौरान गैर जाट युवकों को नौकरियों के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा था। खासकर रोहतक के युवाओं को। उन्हें नौकरियां नहीं मिलती थीं। मनोहर सरकार दावा करती आई है कि उसने नौकरियां खूब दी हैं। रोहतक में गैर जाट भारी संख्या में हैं। इसलिए भाजपा ने सोच समझकर यह मुद्दा उठाया है। मगर भाजपा जीटी बेल्ट में नौकरियों की बात नहीं करेगी, क्योंकि इन इलाकों के लोगों को नौकरियां कम मिली हैं। वहीं, पंचकूला में सरकारी कर्मचारियों की संख्या ज्यादा है। इसलिए ट्रांसफर पॉलिसी का जिक्र किया गया। पानीपत में मुस्लिम आबादी है, इसलिए वोटों के धुव्रीकरण के लिए रोड शो में जयश्री राम के नारे लगाए गए। कोसली रेवाड़ी से जुड़ा क्षेत्र है। वहां पर सैनिकों की अच्छी खासी संख्या है। इसलिए पत्थरबाजों का जिक्र कर देश भावना की बात हुई।

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