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'ऑपरेशन ब्लू स्टार जैसा है सतलोक आश्रम कांड'

Thu, 20 Nov 2014 05:32 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 20 Nov 2014 05:32 PM IST
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Comparison between Satlok Ashram scandal and Operation Blue Star

हरियाणा सरकार के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने सतलोक आश्रम कांड की तुलना ऑपरेशन ब्लू स्टार से कर डाली। मंत्री अनिल विज ने कहा कि भाजपा सरकार सतलोक आश्रम में आपरेशन ब्लू स्टार नहीं करना चाहती है।

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उन्होंने कहा कि हरियाणा पुलिस ने अब तक बिना बल प्रयोग और फायरिंग के आश्रम से हजारों लोगों को बाहर निकालने में सफलता हासिल की है। इसके अलावा, लगभग पांच हजार लोग अब भी आश्रम में मौजूद हैं जिन्हें जल्द ही सुरक्षित बाहर निकाल लिया जाएगा।
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यहां पत्रकारों से बातचीत में विज ने कहा कि पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करवाने के लिए हरियाणा सरकार वचनबद्ध है। विज ने कहा कि सरकार बिना किसी जानमाल के नुकसान के सतलोक आश्रम बरवाला से संत रामपाल की गिरफ्तारी की कोशिश की।
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मामले को धैर्यपूवर्क सुलझाया जा रहा है

Comparison between Satlok Ashram scandal and Operation Blue Star

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इस मामले में विपक्षी पार्टियां आग में घी डालने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि वे इस मामले को राजनीतिक अखाड़ा नही बनाना चाहते।

कांग्रेस तथा इनेलो सहित विपक्षी पार्टियों का भी दायित्व बनता है कि संत रामपाल से यदि किसी भी पार्टी के नजदीकी संबंध है तो वे रामपाल को अदालत के आदेशों का पालन करने की सलाह दें। रामपाल ने अपने बचाव के लिए आश्रम में मानव श्रृंखला बना रखी है।

विज ने कहा कि पत्रकारों को लगी चोट के संबंध में कहा कि सरकार ने इस बाबत रिपोर्ट मांगी है और जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार को बने मात्र 20 दिन हुए है इसके बावजूद मामले को धैर्यपूवर्क सुलझाया जा रहा है।

क्या है ऑपरेशन ब्लू स्टार मामला

Comparison between Satlok Ashram scandal and Operation Blue Star

आपरेशन ब्लू स्टार भारतीय सेना द्वारा 3 से 6 जून 1984 को अमृतसर (पंजाब, भारत) स्थित हरिमंदिर साहिब परिसर को खालिस्तान समर्थक जनरैल सिंह भिंडरावाले और उनके समर्थकों से मुक्त कराने के लिए चलाया गया अभियान था।

सैन्य कार्रवाई में भीषण ख़ून-ख़राबा हुआ। अकाल तख़्त पूरी तरह तबाह हो गया। सरकार के श्वेतपत्र के विवादित आंकड़े के अनुसार 83 सैनिक मारे गए और 249 घायल हुए। 493 चरमपंथी या आम नागरिक मारे गए, 86 घायल हुए और 1592 को गिरफ़्तार किया गया।

इसका दुष्परिणाम तब सामने आया जब दो सिख सुरक्षाकर्मियों ने कुछ ही महीने बाद 31 अक्टूबर को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या कर दी। इसके बाद सिख विरोधी दंगा भड़का था। जब तक ये विवादित मामला उठ खड़ा होता है।

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