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रोस्टर लागू न करने पर आयोग सख्त, पीयू को एक और नोटिस, सात दिन में मांगा जवाब
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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी को केंद्रीय एससी-एसटी आयोग ने एक और नोटिस भेजा कर रोस्टर (पदोन्नति में आरक्षण) लागू न करने पर जवाब मांगा है। साथ ही पहले जारी पत्र का कोई जवाब न देने पर भी नाराजगी जाहिर की है। आयोग ने कहा कि सात दिन में जवाब दें अन्यथा पीयू के संबंधित लोगों को दिल्ली तलब किया जाएगा। सख्त पत्र आने के बाद पीयू अब जवाब देने की तैयारी कर रही है।
वर्षों से पीयू में रोस्टर लागू नहीं हो पा रहा है। दो बार इसका प्रस्ताव तैयार किया गया, लेकिन किसी न किसी मामले में इसे अटका दिया गया। सिंडिकेट में भी प्रस्ताव पहुंचा, लेकिन कमियां निकालकर वापस कमेटी को भेज दिया गया। कमेटी ने इस पर काम भी किया, लेकिन अब तक कोई बात नहीं बनी। एससी-एसटी, बीसी एसोसिएशन के प्रधान हरप्रीत सिंह ने यह प्रकरण उठाया। उन्होंने धरना-प्रदर्शन आदि किए। भूख हड़ताल आदि की भी चेतावनी दी गई। इसके बाद पीयू ने कमेटी जरूर बनाई, लेकिन रोस्टर लागू नहीं किया। यह प्रकरण केंद्र सरकार, चांसलर कार्यालय, एससी-एसटी आयोग पंजाब, केंद्रीय आयोग आदि जगह पहुंच गया। यूजीसी ने भी इसे गंभीरता से लिया, लेकिन पीयू इसे आगे नहीं बढ़ा रही। पिछले दिनों केंद्रीय एससी-एसटी आयोग को पत्र लिखा और रोस्टर लागू न करने की बात कही। इस पर आयोग ने जवाब मांगा, लेकिन पीयू ने गंभीरता से नहीं लिया और जवाब नहीं दिया। अब फिर से आयोग ने पीयू को आखिरी नोटिस जारी किया है। रोस्टर लागू न होने के कारण एक हजार से अधिक कर्मचारी प्रभावित हो रहे हैं।
इनसेट-
यूजीसी के आदेश हवा में उड़ाए
यूजीसी ने कुछ दिनों पहले पीयू से कहा था कि रोस्टर को अपनी वेबसाइट पर लगाया जाए और इसे गंभीरता से लें, लेकिन पीयू ने रोस्टर लागू ही नहीं किया तो वेबसाइट पर क्या दर्ज करते। सूत्रों का कहना है कि अब तक इस पर कोई काम नहीं किया गया। कर्मचारियों ने यूजीसी को भी इस प्रकरण में लापरवाही बरतने पर पीयू से जवाब मांगने को कहा है।
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इनसेट---
सिंडिकेट ने शिक्षक भर्ती में रोस्टर को आगे किया
कुछ कर्मचारियों का कहना है कि रोस्टर बहुत पहले ही लागू हो जाता, लेकिन सिंडिकेट के कुछ सदस्यों ने इसमें अड़ंगा लगाया। अब विश्वविद्यालय जब शिक्षकों की भर्तियां करने की तैयारियां कर रहा था तो सिंडिकेट ने यह कहते हुए उस पर रोक लगा दी कि रोस्टर लागू होने के बाद ही भर्तियां की जाएं जबकि अभी तक आरक्षित वर्ग के खाली पद ही नहीं भरे गए। कर्मचारियों का कहना है कि रोस्टर को एक हथियार के रूप में प्रयोग किया गया। अब कर्मचारी आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे। इस संबंध में रजिस्ट्रार से संपर्क किया गया, लेकिन नहीं हो सका।
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वर्षों से पीयू में रोस्टर लागू नहीं हो पा रहा है। दो बार इसका प्रस्ताव तैयार किया गया, लेकिन किसी न किसी मामले में इसे अटका दिया गया। सिंडिकेट में भी प्रस्ताव पहुंचा, लेकिन कमियां निकालकर वापस कमेटी को भेज दिया गया। कमेटी ने इस पर काम भी किया, लेकिन अब तक कोई बात नहीं बनी। एससी-एसटी, बीसी एसोसिएशन के प्रधान हरप्रीत सिंह ने यह प्रकरण उठाया। उन्होंने धरना-प्रदर्शन आदि किए। भूख हड़ताल आदि की भी चेतावनी दी गई। इसके बाद पीयू ने कमेटी जरूर बनाई, लेकिन रोस्टर लागू नहीं किया। यह प्रकरण केंद्र सरकार, चांसलर कार्यालय, एससी-एसटी आयोग पंजाब, केंद्रीय आयोग आदि जगह पहुंच गया। यूजीसी ने भी इसे गंभीरता से लिया, लेकिन पीयू इसे आगे नहीं बढ़ा रही। पिछले दिनों केंद्रीय एससी-एसटी आयोग को पत्र लिखा और रोस्टर लागू न करने की बात कही। इस पर आयोग ने जवाब मांगा, लेकिन पीयू ने गंभीरता से नहीं लिया और जवाब नहीं दिया। अब फिर से आयोग ने पीयू को आखिरी नोटिस जारी किया है। रोस्टर लागू न होने के कारण एक हजार से अधिक कर्मचारी प्रभावित हो रहे हैं।
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यूजीसी के आदेश हवा में उड़ाए
यूजीसी ने कुछ दिनों पहले पीयू से कहा था कि रोस्टर को अपनी वेबसाइट पर लगाया जाए और इसे गंभीरता से लें, लेकिन पीयू ने रोस्टर लागू ही नहीं किया तो वेबसाइट पर क्या दर्ज करते। सूत्रों का कहना है कि अब तक इस पर कोई काम नहीं किया गया। कर्मचारियों ने यूजीसी को भी इस प्रकरण में लापरवाही बरतने पर पीयू से जवाब मांगने को कहा है।
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सिंडिकेट ने शिक्षक भर्ती में रोस्टर को आगे किया
कुछ कर्मचारियों का कहना है कि रोस्टर बहुत पहले ही लागू हो जाता, लेकिन सिंडिकेट के कुछ सदस्यों ने इसमें अड़ंगा लगाया। अब विश्वविद्यालय जब शिक्षकों की भर्तियां करने की तैयारियां कर रहा था तो सिंडिकेट ने यह कहते हुए उस पर रोक लगा दी कि रोस्टर लागू होने के बाद ही भर्तियां की जाएं जबकि अभी तक आरक्षित वर्ग के खाली पद ही नहीं भरे गए। कर्मचारियों का कहना है कि रोस्टर को एक हथियार के रूप में प्रयोग किया गया। अब कर्मचारी आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे। इस संबंध में रजिस्ट्रार से संपर्क किया गया, लेकिन नहीं हो सका।