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जाट आरक्षण आंदोलन हिंसा की जांच के लिए आयोग गठित

Sat, 09 Apr 2016 06:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 09 Apr 2016 06:30 AM IST
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commission formed for investigate of violence during jat Reservations
सीएम मनोहर लाल खट्टर - फोटो : फाइल फोटो

हरियाणा सरकार ने कमीशन ऑफ इनक्वायरी एक्ट, 1952 के अंतर्गत शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट और राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस (रिटायर्ड) एसएन झा की अध्यक्षता में दो सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग का गठन किया है।

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यह आयोग बीती 18 से 23 फरवरी के बीच जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान रोहतक, झज्जर, सोनीपत, जींद, हिसार, कैथल और भिवानी में जानमाल की हानि, निजी और सार्वजनिक संपत्ति सहित सड़कों, नहरों, रेलवे स्टेशनों, पुलिस स्टेशनों को नुकसान पहुंचाने, अवैध रूप से पेड़ों को काटकर रास्तों को बंद करने और मानवाधिकारों का हनन से संबंधित सभी घटनाओं और उनकी परिस्थितियों की जांच करेगा। आयोग यह भी जांच करेगा कि प्रदेश में आंदोलन के दौरान सामाजिक ताने-बाने को नष्ट करने को षड्यंत्र तो नहीं रचा गया था। इस आयोग के अन्य सदस्य, पूर्व आईपीएस अधिकारी एनसी पाधी होंगे, जो केन्द्र सरकार में सुरक्षा सचिव रह चुके हैं।
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मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने हाल ही में राज्य विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सदन में घोषणा की थी कि आरक्षण आंदोलन के दौरान आगजनी और उपद्रव की घटनाओं की जांच कराने के लिए एक न्यायिक आयोग का गठन किया जाएगा। यह आयोग व्यक्तिगत या संगठनों के माध्यम से आयोग के समक्ष की जाने वाली शिकायतों और आरोपों की विशेषतौर पर जांच करेगा। यह आयोग अपनी पहली बैठक की तिथि से छह माह के भीतर अपनी रिपोर्ट जल्द से जल्द राज्य सरकार को सौंपेगा। आयोग का मुख्यालय चंडीगढ़ में होगा।
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बिहार मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष रहे हैं जस्टिस एसएन झा
दो सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग के प्रमुख जस्टिस एसएन झा वर्ष 1969 में कानूनी पेशे से जुड़े और उन्होंने पटना हाईकोर्ट में प्रैक्टिस की। उन्हें जुलाई, 1990 में पटना हाईकोर्ट में स्थायी जज के रूप में नियुक्त किया गया और फरवरी, 2004 में उन्हें जम्मू-कश्मीर का चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया। उसके बाद उन्हें अक्तूबर, 2005 में राजस्थान हाईकोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया। जस्टिस झा ने कस्टम, एक्साइज और सर्विस टैक्स अपीलेंट ट्रिब्यूनल नई दिल्ली के अध्यक्ष के रूप में भी अपनी सेवाएं दी हैं। वे बिहार स्टेट ह्युमन राइटस कमीशन के चेयरपर्सन भी रहे हैं।


खुफिया ब्यूरो को विशेष निदेशक रहे हैं एनसी पाधी
जांच आयोग के सदस्य एनसी पाधी को वर्ष 1979-81 के दौरान राष्ट्रीय पुलिस आयोग के साथ तीन वर्ष के अनुसंधान कार्य के बाद खुफिया ब्यूरो में नियुक्ति मिली और उन्होंने 25 वर्ष तक इस संस्था में कार्य किया। खुफिया ब्यूरो कैडर के हार्डकोर में उन्हें चयनित किया गया। लगभग 10 वर्षों तक उन्होंने कठिन क्षेत्रीय कार्य की सेवाएं दीं। इसके अलावा, मुख्यालयों पर महत्वपूर्ण मूल्यांकन डेस्कों पर भी उन्होंने कार्य किया है। उनकी इस्लामिक और उत्तर-पूर्व भारत मामलों में विशेषता है और वर्ष 2002-05 के दौरान वे खुफिया ब्यूरो में विशेष निदेशक रहे हैं। पाधी को वर्ष 2005 में भारत सरकार के कैबिनेट सचिवालय में सचिव सुरक्षा नियुक्त किया गया और वे नेशनल क्राइसिस मैनेजमैंट ग्रुप का प्रबंधन और सिक्योरिटी कोर ग्रुप के सदस्य के अलावा उनके पास विभिन्न सुरक्षा से संबंधित संस्थाओं व मुद्दों का चार्ज रहा है।

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