फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Colors of politics: The leaders who used to sing the captain song today became the pride of Sidhu

पंजाब में सियासत के रंग : जो नेता करते थे कैप्टन का गान, आज बने सिद्धू की शान

Thu, 22 Jul 2021 04:20 AM IST
दुष्यंत शर्मा हर्ष कुमार सलारिया, चंडीगढ़
हर्ष कुमार सलारिया, चंडीगढ़ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 22 Jul 2021 04:20 AM IST
सार

  • कैप्टन के पंजाब में सियासी आधार पर लगा प्रश्नचिह्न
  • विधायक-बल जुटाने की होड़ में जुटे सिद्धू, कैप्टन खामोश
  • शक्ति प्रदर्शन की ताजा स्थिति में कैप्टन फिलहाल कमजोर 

विज्ञापन
Colors of politics: The leaders who used to sing the captain song today became the pride of Sidhu
सिद्धू के आसपास विधायकों का जमावड़ा... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब कांग्रेस के नवनियुक्त प्रधान नवजोत सिद्धू अपने साथ विधायकों को जोड़ने में लगे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह अभी खामोश हैं। शक्ति प्रदर्शन की ताजा स्थिति में भी कैप्टन फिलहाल कमजोर नजर आ रहे हैं। कैप्टन के साथ खड़े दिखाई देने वाले कई नेता अब सिद्धू की शान में नारे लगा रहे हैं। ऐसे में कैप्टन के पंजाब में सियासी आधार पर प्रश्नचिह्न लग गया है। 

विज्ञापन


प्रधानगी मिलते ही सिद्धू का मंत्री-विधायकों से मेल-मिलाप अभियान बुधवार को खुले शक्ति प्रदर्शन में बदल गया। अमृतसर स्थित अपने आवास पर सिद्धू ने सूबे के 70 कांग्रेसी विधायकों के पहुंचने का दावा किया, हालांकि दावे के विपरीत विधायकों की संख्या 50 से भी कम रही। सिद्धू के साथ विधायकों के इस बड़े जमघट ने मुख्यमंत्री और मौजूदा विधायक दल के नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह की पार्टी में कमजोर होती स्थिति के संकेत दे दिए हैं। 
विज्ञापन


प्रदेश कांग्रेस के साथ ही सियासी गलियारों में पार्टी की बदलती तस्वीर में कैप्टन के सियासी कद को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। पंजाब में कांग्रेस को स्थापित करने और सत्ता पर काबिज करने में कैप्टन की जो भूमिका रही है, उसी ने कैप्टन को पंजाब कांग्रेस का पर्याय बना दिया था और प्रदेश इकाई में उन्हें टक्कर देने वाला कोई नेता भी नहीं था। सिद्धू को प्रदेश इकाई की कमान मिलते ही कैप्टन बैकफुट पर नजर आने लगे हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन


आलाकमान के फैसले के खिलाफ कैप्टन के साथ दिखाई देने वाले मंत्री और विधायक बीते चार दिन में ही पाला बदलकर सिद्धू के पक्ष में नारे लगाते दिखाई दे रहे हैं। दूसरी ओर, प्रदेश प्रधान के रूप में सिद्धू की सफलता को लेकर भी सवालिया निशान लगाए जा रहे हैं। सियासी तजुर्बे के लिहाज में सिद्धू कहीं भी कैप्टन के आगे नहीं ठहरते। आलाकमान के आशीर्वाद का सिद्धू कितना सियासी फायदा उठा सकेंगे, यह 2022 के विधानसभा चुनाव में ही सामने आ सकेगा। 

2022 में पंजाब कांग्रेस का मुख्यमंत्री चेहरा कौन
कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ने का एलान कर चुकी पार्टी अध्यक्ष पंजाब के बदले सियासी समीकरणों में अब चुनाव की कमान किसे सौंपेंगी, यह सवाल उठने लगे हैं। यह जिम्मेदारी भी नवजोत सिद्धू को सौंपी गई तो कांग्रेस का अगला मुख्यमंत्री चेहरा कौन होगा। हालांकि, सिद्धू को चुनाव की कमान सौंपे जाने पर स्पष्ट हो जाएगा कि सिद्धू ही कांग्रेस के अगले मुख्यमंत्री होंगे। ऐसे पार्टी में कैप्टन के लिए सम्मानजनक स्थिति नहीं रह जाएगी। 

प्रधानी को लेकर इतिहास दोहराएगी पंजाब कांग्रेस
प्रदेश कांग्रेस के इतिहास पर नजर डालें तो प्रताप सिंह बाजवा को भी इसी तरह साइडलाइन कर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने प्रदेश कांग्रेस की कमान संभाली थी। इसके बाद कैप्टन ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी समेत जीत दर्ज कर मुख्यमंत्री पद हासिल किया था। वर्तमान में सिद्धू को जैसे प्रदेश प्रधान बनाया गया है, उसमें सुनील जाखड़ के रूप में कैप्टन अमरिंदर सिंह को ही साइडलाइन किया गया है। माना जा रहा है कि पार्टी आलाकमान अब 2022 के चुनाव सिद्धू के नेतृत्व में लड़ेगी। अब यह सिद्धू पर निर्भर होगा कि वे पार्टी को कितनी सफलता दिला सकेंगे और प्रदेश प्रधान के बाद कांग्रेस सरकार का मुख्यमंत्री बनकर इतिहास दोहराएंगे। 


कैप्टन के सामने यह है बड़ी चुनौती
आलाकमान की सिद्धू के प्रति मेहरबानी और कैप्टन की अनदेखी ने खासतौर पर कैप्टन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सिद्धू के तलख तेवर बता रहे हैं कि वह कैप्टन की शर्त के अनुसार सार्वजनिक तौर पर माफी मांगने को तैयार नहीं हैं। वह 23 जुलाई को विधिवत रूप से प्रधान पद संभालेंगे। उस दिन तक सिद्धू और कैप्टन एक-साथ आ गए तो पंजाब कांग्रेस का सारा क्लेश खत्म हो जाएगा। मौजूदा स्थिति ही बनी रही तो कैप्टन से विधायक दल का नेता पद वापस लेने की कोशिशें शुरू हो सकती हैं। कैप्टन इसे सबसे बड़ी चुनौती से निपटने के लिए अपने सियासी अनुभव का इस्तेमाल कर सिद्धू को चारों खाने चित्त करने का पासा फेंककर भी स्थिति बदल सकते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed