केलों को बंदरों और घरों को लावारिस कुत्तों से बचाएगा ये रंगीन पानी, जानिए कैसे
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केलों को बंदरों और घरों को लावारिस कुत्तों से एक रंगीन पानी बचाएगा। कुत्तों और बंदरों से परेशान लोगों के लिए ये पानी रामबाण है। जानिए कैसे होता है बचाव। दअसल, चंडीगढ़ ही नहीं गोवा भी लावारिस कुत्तों की समस्या से बहुत ज्यादा त्रस्त है। शहरों से लेकर गांवों तक कुत्तों का जबरदस्त आतंक है। इसके अतिरिक्त गोवा में केले की खेती भी बंदरों के खतरे से जूझती रहती है।
किसान इस खेती से इसलिए मुंह मोड़ लेता है, क्योंकि केलों को बंदर चट कर जाते हैं। इन सब परेशानियों से निजात के लिए गोवा के लोगों ने गजब का टोटका ढूंढा हुआ है। यह टोटका दशकों पुराना है, लेकिन लोगों का कहना है कि यह इतना कारगर है कि केलों के पेड़ों से बंदर और घरों से कुत्ते दूर रहते हैं।
गेट केआगे बोतलों में रखा, टंगा रंगीन पानी
गोवा के गांव मार्जोडा और बेटलबतीम निवासी पीडी बस्ता, ट्रिफान डिकोस्टा व रीटा कालदेरा ने बताया कि यहां लावारिस कुत्तों की समस्या बहुत गंभीर है। डॉग बाइट से तो खतरा है ही, लेकिन ये कुत्ते घरों के बरामदों में जबरन घुस जाते हैं। जब इन्हें निकालने की कोशिश की जाती है तो ये हमलावर हो जाते हैं। काफी लोग डॉग बाइट के शिकार हो चुके हैं।
इसके अलावा घरों में ये कुत्ते मल-मूत्र से भी माहौल पूरी तरह खराब व बदबूदार बना देते हैं। लेकिन ऐसे में अब वे दशकों पुराने अपने पूर्वजों का टोटका अपना रहे हैं। वे घरों के आगे वे नीले, लाल, बैंगनी, गुलाबी व पीले रंग के पानी की बोतलें भरकर दरवाजों के आगे रख अथवा टांग देते हैं। उनका मानना है कि बोतलों में रंगीन पानी को देखकर कुत्ते उनके घरों के आगे खड़े ही नहीं होते। ग्रामीणों ने बताया कि रंगीन पानी से क्यों बचते हैं, ये तो उन्हें नहीं मालूम, लेकिन बरसों से ये टोटका कारगर रहा है।
रंगीन पानी देखकर बंदर भी भागते हैं
ग्रामीण रामचंद्रन ने बताया कि गोवा में केले की खेती भी बड़े पैमाने पर होती है। लेकिन केला उत्पादक किसान बंदरों से बहुत भयभीत रहते हैं, क्योंकि बंदरों की टोली एकदम से केलों के पेड़ों पर धावा बोलते हैं और न केवल केले चट कर जाते हैं, बल्कि काफी केले बर्बाद भी कर देते हैं। इसलिए किसानों ने अब केलों के पेड़ों पर रंगीन पानी बोतलें टांगनी शुरू कर दी है। इन बोतलों को देख बंदर भी डरकर केलों के पेड़ों से दूर रहते हैं।