{"_id":"6503e805b7a8ca0e0d0be446","slug":"colonel-manpreet-singh-of-mohali-martyred-in-anantnag-of-jammu-2023-09-15","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"एक थे कर्नल मनप्रीत: जिद, जज्बा और जुनून की मिसाल... सिख लाइट इन्फेंट्री में भर्ती का किस्सा जानते हैं आप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक थे कर्नल मनप्रीत: जिद, जज्बा और जुनून की मिसाल... सिख लाइट इन्फेंट्री में भर्ती का किस्सा जानते हैं आप
Fri, 15 Sep 2023 12:02 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 15 Sep 2023 12:02 PM IST
सार
शहीद कर्नल मनप्रीत के पिता स्व. लखमीर सिंह सेना में सिपाही थे। 12 सिख लाइट इन्फेंट्री में हवलदार के पद से रिटायर हुए। उसके बाद पंजाब यूनिवर्सिटी में सिक्योरिटी सुपरवाइजर के तौर पर काम किया। वर्ष 2014 में ब्रेन हैमरेज से उनकी मौत हो गई थी।
विज्ञापन
कर्नल मनप्रीत सिंह।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में शहीद हुए भड़ौजियां गांव के सपूत कर्नल मनप्रीत सिंह 12 सिख लाइट इन्फेंट्री में थे। इस इन्फेंट्री में वे अपनी जिद के कारण ही शामिल हुए थे। कर्नल के भाई संदीप सिंह ने बताया कि सेना में ज्वाइनिंग के वक्त जब उनसे पूछा गया कि वह किस बटालियन से जुड़ेंगे तो उन्होंने कहा था कि वह अपने दादा शीतल सिंह और पिता लखमीर सिंह वाली बटालियन 12 सिख लाइट इन्फेंट्री को ही ज्वाइन करेंगे।
मनप्रीत के दादा तीन भाई थे-शीतल सिंह, साधु सिंह और त्रिलोक सिंह। तीनों ने भारतीय सेना में सेवाएं दीं। शीतल सिंह ने भारत-पाक बंटवारे से लेकर सेना से सेवानिवृत्त होने तक तीन युद्धों में हिस्सा लिया। शीतल सिंह के चार बेटे हुए। उनमें से तीन ने सेना ज्वाइन की।
विज्ञापन
विज्ञापन
यह भी पढ़ें: अमर जवान: बलिदान के कुछ घंटे पहले पत्नी से कर्नल मनप्रीत की आखिरी बात, मैं एक मिशन पर हूं...अब बची सिर्फ याद
विज्ञापन
मनप्रीत के दादा तीन भाई थे-शीतल सिंह, साधु सिंह और त्रिलोक सिंह। तीनों ने भारतीय सेना में सेवाएं दीं। शीतल सिंह ने भारत-पाक बंटवारे से लेकर सेना से सेवानिवृत्त होने तक तीन युद्धों में हिस्सा लिया। शीतल सिंह के चार बेटे हुए। उनमें से तीन ने सेना ज्वाइन की।
विज्ञापन
पिता हवलदार पद से हुए थे रिटायर
शहीद कर्नल मनप्रीत के पिता स्व. लखमीर सिंह सेना में सिपाही थे। 12 सिख लाइट इन्फेंट्री में हवलदार के पद से रिटायर हुए। उसके बाद पंजाब यूनिवर्सिटी में सिक्योरिटी सुपरवाइजर के तौर पर काम किया। वर्ष 2014 में ब्रेन हैमरेज से मौत हुई तो मनप्रीत के छोटे भाई संदीप सिंह को उनकी जगह नौकरी मिल गई। मनप्रीत की एक बहन है।
संदीप ने बताया कि जब हम छोटे थे तो देखते थे पापा अपने से बड़े अफसरों को सैल्यूट करते हैं। मनप्रीत ने तभी से सोच लिया था कि वह एक दिन सेना में अफसर बनेंगे। फिर जब पापा उनके साथ खड़े होंगे तो वही अफसर उन्हें सैल्यूट करेंगे, जिन्हें वो तब सैल्यूट करते थे।
बहन बोलीं- प्रैक्टिल बनाते वक्त लिख दिया था सेना में ही जाऊंगा
बहन संदीप कौर ने कहा कि उनके बड़े भाई शुरू से सेना में जाना चाहते थे। बचपन में उसकी प्रैक्टिल बनाते समय एक बार उन्होंने उसमें लिख दिया था कि वह सेना में ही जाएंगे। वह बहुत मेहनती और पढ़ाई में होशियार थे। भाई से राखी पर बात हुई थी, तब उन्होंने जल्द आने का कहा था। भाई हमेशा छुट्टी पर बिना बताए आकर सरप्राइज देते थे।
शहीद कर्नल मनप्रीत के पिता स्व. लखमीर सिंह सेना में सिपाही थे। 12 सिख लाइट इन्फेंट्री में हवलदार के पद से रिटायर हुए। उसके बाद पंजाब यूनिवर्सिटी में सिक्योरिटी सुपरवाइजर के तौर पर काम किया। वर्ष 2014 में ब्रेन हैमरेज से मौत हुई तो मनप्रीत के छोटे भाई संदीप सिंह को उनकी जगह नौकरी मिल गई। मनप्रीत की एक बहन है।
संदीप ने बताया कि जब हम छोटे थे तो देखते थे पापा अपने से बड़े अफसरों को सैल्यूट करते हैं। मनप्रीत ने तभी से सोच लिया था कि वह एक दिन सेना में अफसर बनेंगे। फिर जब पापा उनके साथ खड़े होंगे तो वही अफसर उन्हें सैल्यूट करेंगे, जिन्हें वो तब सैल्यूट करते थे।
बहन बोलीं- प्रैक्टिल बनाते वक्त लिख दिया था सेना में ही जाऊंगा
बहन संदीप कौर ने कहा कि उनके बड़े भाई शुरू से सेना में जाना चाहते थे। बचपन में उसकी प्रैक्टिल बनाते समय एक बार उन्होंने उसमें लिख दिया था कि वह सेना में ही जाएंगे। वह बहुत मेहनती और पढ़ाई में होशियार थे। भाई से राखी पर बात हुई थी, तब उन्होंने जल्द आने का कहा था। भाई हमेशा छुट्टी पर बिना बताए आकर सरप्राइज देते थे।