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Chandigarh News: अनुमति बिना शोरूम के पैसे वसूलना न कब्जा देना पड़ा महंगा, रकम लौटाने का आदेश
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चंडीगढ़। द शालीमार एस्टेट्स को परियोजना की अनुमति प्राप्त किए बिना पैसे वसूलना और उपभोक्ता को शोरूम का न ही कब्जा और न पैसे लौटाना महंगा पड़ गया। उपभोक्ता आयोग ने कंपनी के खिलाफ फैसला सुनाते हुए उपभोक्ता को शोरूम बेचने के नाम पर वसूले 17.30 लाख रुपये 10 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाने और मानसिक तनाव और कोर्ट खर्च के लिए 50 हजार का मुआवजा देने का आदेश दिया।
जीरकपुर निवासी शिकायतकर्ता प्रतीक अरोड़ा ने कोर्ट में बताया कि उसने फरवरी 2006 में आईटी सिटी मोहाली स्थित शालीमार प्लाजा प्रोजेक्ट में एक शोरूम खरीदा था। इसके लिए उसने 17.30 लाख रुपये दिए। शोरूम पहले अभा जैन और दुलारी जैन के नाम था। बाद में शोरूम का ट्रांसफर शिकायतकर्ता के नाम किया गया, लेकिन जब शिकायतकर्ता ने अक्तूबर 2012 में साइट का दौरा किया तो प्रोजेक्ट में कोई प्रगति नहीं हुई थी। जब उसने प्रोजेक्ट की स्थिति और शोरूम का कब्जा देने की तारीख के बारे में पूछा तो कंपनी ने कोई जवाब नहीं दिया और प्रोजेक्ट को अधूरा छोड़ दिया। क्योंकि किसी कारण प्रोजेक्ट की साइट का आवंटन रद्द कर दिया गया था। इसके बाद शिकायतकर्ता ने कंपनी से पैसे लौटाने की मांग की तो कोई जवाब नहीं दिया गया। इस पर उसने कंपनी के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में केस दायर किया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने कंपनी के खिलाफ फैसला सुनाया।
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जीरकपुर निवासी शिकायतकर्ता प्रतीक अरोड़ा ने कोर्ट में बताया कि उसने फरवरी 2006 में आईटी सिटी मोहाली स्थित शालीमार प्लाजा प्रोजेक्ट में एक शोरूम खरीदा था। इसके लिए उसने 17.30 लाख रुपये दिए। शोरूम पहले अभा जैन और दुलारी जैन के नाम था। बाद में शोरूम का ट्रांसफर शिकायतकर्ता के नाम किया गया, लेकिन जब शिकायतकर्ता ने अक्तूबर 2012 में साइट का दौरा किया तो प्रोजेक्ट में कोई प्रगति नहीं हुई थी। जब उसने प्रोजेक्ट की स्थिति और शोरूम का कब्जा देने की तारीख के बारे में पूछा तो कंपनी ने कोई जवाब नहीं दिया और प्रोजेक्ट को अधूरा छोड़ दिया। क्योंकि किसी कारण प्रोजेक्ट की साइट का आवंटन रद्द कर दिया गया था। इसके बाद शिकायतकर्ता ने कंपनी से पैसे लौटाने की मांग की तो कोई जवाब नहीं दिया गया। इस पर उसने कंपनी के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में केस दायर किया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने कंपनी के खिलाफ फैसला सुनाया।
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