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चंडीगढ़ः एक्साइज एंड टैक्सेशन विभाग लेने के बाद अब डीसी की कुर्सी के लिए छिड़ी जंग
अनुभव अवस्थी, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 28 Jun 2018 10:34 AM IST
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डीसी कार्यालय पर पसरा सन्नाटा
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डीसी अजीत बालाजी जोशी से एक्साइज एंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट लेने के बाद सचिवालय से लेकर राजभवन तक प्रशासनिक हलचल शुरू हो गई है। आने वाले दिनों में कई चौंकाने वाले परिवर्तन हो सकते हैं। यूटी सचिवालय की नजर अब डीसी की कुर्सी पर है। डीसी का कार्यकाल दिसंबर महीने में पूरा हो रहा है।
यूटी प्रशासन ने हरियाणा के मुख्य सचिव से चंडीगढ़ के डीसी के नाम का पैनल मांगा है। इसके बाद यूटी प्रशासन डीसी के नाम पर मंजूरी लेगा। सूत्रों की मानें तो सचिवालय और चंडीगढ़ प्रशासन के टकराव के चलते छह महीने पहले से ही डीसी की कुर्सी को लेकर माथापच्ची शुरू हो गई है।
डीसी के कार्यकाल को बढ़ाए जाने का है प्रावधान
डिप्टी कमिश्नर का कार्यकाल आगामी दिसंबर महीने में पूरा हो रहा है, लेकिन यूटी प्रशासन के नियमानुसार कामकाज को देखते हुए डीसी का कार्यकाल बढ़ाए जाने का प्रावधान है। ऐसे में डीसी कार्यकाल बढ़ाने के लिए यूटी प्रशासन के साथ उच्चाधिकारियों के पास प्रस्ताव भेज सकते हैं। लिहाजा, प्रशासन के एक वर्ग ने अभी से डीसी को हटाने की कवायद शुरू कर दी है।
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डीसी कार्यालय पर पसरा सन्नाटा
डिप्टी कमिश्नर बीते सोमवार से अवकाश पर चल रहे हैं। शायद उन्हें इसकी आशंका पहले ही थी कि एक्साइज एंड टैक्सेशन विभाग का कार्यभार उनसे ले लिया जाएगा। पहले डीसी बुधवार तक अवकाश पर थे, लेकिन डीसी ने दो दिन और अवकाश बढ़ा लिया है। डीसी के अवकाश पर होने से उनके कार्यालय में सन्नाटा पसरा हुआ है। फरियादी आ तो रहे हैं, लेकिन उन्हें बैरंग लौटना पड़ रहा है।
कई महीनों से डीसी का विरोध हो रहा था
एडवाइजर की ओर से डीसी से एक्साइज एंड टैक्सेशन कमिश्नर का कार्यभार लेने के साथ ही शहर में अफवाहों का बाजार गर्म है। यह भी है कि लिकर लॉबी पर नकेल कसने के चलते शराब से जुड़ा एक बड़ा वर्ग बीते कई महीनों से डीसी का विरोध कर रहा है। उसी के दबाव में डीसी को एक्साइज एंड टैक्सेशन विभाग से हटाया गया है। इसके अलावा शहर में सड़क और ग्रीन बेल्ट के बीच खाली पड़ी जमीन को ठेके पर देने को लेकर भी दोनों पक्षों में लंबे समय से तनातनी चल रही है।
एडवाइजर के करीबी होने का मिला लाभ
आईएएस जितेंद्र यादव को एडवाइजर का करीबी बताया जा रहा है। यही वजह रही कि अभी कुछ दिन पहले ही इन्हें डायरेक्टर टूरिज्म का कार्यभार सौंपा गया था।अब एक्साइज एंड टैक्सेशन विभाग के कमिश्नर का काम भी उन्हें दे दिया गया है। इसके बाद यूटी के आईएएस जितेंद्र यादव का रूतबा प्रशासन स्तर पर काफी बढ़ गया है। जबकि, हरियाणा का रुतबा कम हुआ है।
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यूटी प्रशासन ने हरियाणा के मुख्य सचिव से चंडीगढ़ के डीसी के नाम का पैनल मांगा है। इसके बाद यूटी प्रशासन डीसी के नाम पर मंजूरी लेगा। सूत्रों की मानें तो सचिवालय और चंडीगढ़ प्रशासन के टकराव के चलते छह महीने पहले से ही डीसी की कुर्सी को लेकर माथापच्ची शुरू हो गई है।
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डीसी के कार्यकाल को बढ़ाए जाने का है प्रावधान
डिप्टी कमिश्नर का कार्यकाल आगामी दिसंबर महीने में पूरा हो रहा है, लेकिन यूटी प्रशासन के नियमानुसार कामकाज को देखते हुए डीसी का कार्यकाल बढ़ाए जाने का प्रावधान है। ऐसे में डीसी कार्यकाल बढ़ाने के लिए यूटी प्रशासन के साथ उच्चाधिकारियों के पास प्रस्ताव भेज सकते हैं। लिहाजा, प्रशासन के एक वर्ग ने अभी से डीसी को हटाने की कवायद शुरू कर दी है।
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डीसी कार्यालय पर पसरा सन्नाटा
डिप्टी कमिश्नर बीते सोमवार से अवकाश पर चल रहे हैं। शायद उन्हें इसकी आशंका पहले ही थी कि एक्साइज एंड टैक्सेशन विभाग का कार्यभार उनसे ले लिया जाएगा। पहले डीसी बुधवार तक अवकाश पर थे, लेकिन डीसी ने दो दिन और अवकाश बढ़ा लिया है। डीसी के अवकाश पर होने से उनके कार्यालय में सन्नाटा पसरा हुआ है। फरियादी आ तो रहे हैं, लेकिन उन्हें बैरंग लौटना पड़ रहा है।
कई महीनों से डीसी का विरोध हो रहा था
एडवाइजर की ओर से डीसी से एक्साइज एंड टैक्सेशन कमिश्नर का कार्यभार लेने के साथ ही शहर में अफवाहों का बाजार गर्म है। यह भी है कि लिकर लॉबी पर नकेल कसने के चलते शराब से जुड़ा एक बड़ा वर्ग बीते कई महीनों से डीसी का विरोध कर रहा है। उसी के दबाव में डीसी को एक्साइज एंड टैक्सेशन विभाग से हटाया गया है। इसके अलावा शहर में सड़क और ग्रीन बेल्ट के बीच खाली पड़ी जमीन को ठेके पर देने को लेकर भी दोनों पक्षों में लंबे समय से तनातनी चल रही है।
एडवाइजर के करीबी होने का मिला लाभ
आईएएस जितेंद्र यादव को एडवाइजर का करीबी बताया जा रहा है। यही वजह रही कि अभी कुछ दिन पहले ही इन्हें डायरेक्टर टूरिज्म का कार्यभार सौंपा गया था।अब एक्साइज एंड टैक्सेशन विभाग के कमिश्नर का काम भी उन्हें दे दिया गया है। इसके बाद यूटी के आईएएस जितेंद्र यादव का रूतबा प्रशासन स्तर पर काफी बढ़ गया है। जबकि, हरियाणा का रुतबा कम हुआ है।