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कोचवाणी: खुद इंटरनेशनल मुक्केबाज नहीं बन पाए, अब बच्चों को बना रहे इंटरनेश्नल स्तर का मुक्केबाज
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संवाद न्यूज एजेंसी
चंडीगढ़। बचपन में अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज बनने का सपना देखा, लेकिन आर्थिक तंगी और सुविधाओं की कमी ने राह रोक दी। अब पंजाब पुलिस में एएसआई जोगिंदर सिंह अपने इसी अधूरे सपने को जरूरतमंद बच्चों की सफलता में जी रहे हैं। पिछले छह वर्षों से वह सेक्टर-3 स्थित बोगनविलिया गार्डन में 40 से 50 बच्चों को निशुल्क बॉक्सिंग का प्रशिक्षण दे रहे हैं। उनका लक्ष्य बच्चों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है।
सेक्टर-9 स्थित पंजाब पुलिस मुख्यालय में तैनात जोगिंदर सिंह के पास प्रशिक्षण लेने वाले ज्यादातर बच्चे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से हैं। किसी के पिता कुक हैं तो किसी के परिवार का गुजारा दिहाड़ी, दुकान पर काम या राजमिस्त्री के काम से चलता है। जोगिंदर बच्चों को निशुल्क प्रशिक्षण देने के साथ खेल के जरूरी उपकरण उपलब्ध कराने में भी मदद करते हैं।
बच्चों के पदक ही सबसे बड़ा पुरस्कार
जोगिंदर सिंह के प्रशिक्षण में तैयार खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का मान बढ़ाया है। कुक के बेटे रोहित चमोली ने दुबई में जूनियर बॉक्सिंग चैंपियनशिप में मंगोलिया के ओटगन बयार को हराकर स्वर्ण पदक जीता। गाड़ी चालक के बेटे स्पर्श ने नेपाल और चीन में स्वर्ण पदक हासिल किए, जबकि राजमिस्त्री के बेटे कुलदीप ने कजाकिस्तान में कांस्य पदक जीता।
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अधूरे सपने को बच्चों के जरिए कर रहे पूरा
नयागांव में रहने वाले जोगिंदर सिंह बताते हैं कि आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण वह खुद पेशेवर मुक्केबाजी का प्रशिक्षण नहीं ले सके। उनका सपना अधूरा रह गया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अब जरूरतमंद बच्चों को आगे बढ़ाने में जुटे हैं। उनका कहना है कि जब उनके प्रशिक्षित खिलाड़ी पदक जीतकर लौटते हैं तो उन्हें सबसे बड़ी खुशी मिलती है। बच्चों की यही सफलता उन्हें लगातार मेहनत करने की प्रेरणा देती है।
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चंडीगढ़। बचपन में अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज बनने का सपना देखा, लेकिन आर्थिक तंगी और सुविधाओं की कमी ने राह रोक दी। अब पंजाब पुलिस में एएसआई जोगिंदर सिंह अपने इसी अधूरे सपने को जरूरतमंद बच्चों की सफलता में जी रहे हैं। पिछले छह वर्षों से वह सेक्टर-3 स्थित बोगनविलिया गार्डन में 40 से 50 बच्चों को निशुल्क बॉक्सिंग का प्रशिक्षण दे रहे हैं। उनका लक्ष्य बच्चों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है।
सेक्टर-9 स्थित पंजाब पुलिस मुख्यालय में तैनात जोगिंदर सिंह के पास प्रशिक्षण लेने वाले ज्यादातर बच्चे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से हैं। किसी के पिता कुक हैं तो किसी के परिवार का गुजारा दिहाड़ी, दुकान पर काम या राजमिस्त्री के काम से चलता है। जोगिंदर बच्चों को निशुल्क प्रशिक्षण देने के साथ खेल के जरूरी उपकरण उपलब्ध कराने में भी मदद करते हैं।
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बच्चों के पदक ही सबसे बड़ा पुरस्कार
जोगिंदर सिंह के प्रशिक्षण में तैयार खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का मान बढ़ाया है। कुक के बेटे रोहित चमोली ने दुबई में जूनियर बॉक्सिंग चैंपियनशिप में मंगोलिया के ओटगन बयार को हराकर स्वर्ण पदक जीता। गाड़ी चालक के बेटे स्पर्श ने नेपाल और चीन में स्वर्ण पदक हासिल किए, जबकि राजमिस्त्री के बेटे कुलदीप ने कजाकिस्तान में कांस्य पदक जीता।
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अधूरे सपने को बच्चों के जरिए कर रहे पूरा
नयागांव में रहने वाले जोगिंदर सिंह बताते हैं कि आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण वह खुद पेशेवर मुक्केबाजी का प्रशिक्षण नहीं ले सके। उनका सपना अधूरा रह गया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अब जरूरतमंद बच्चों को आगे बढ़ाने में जुटे हैं। उनका कहना है कि जब उनके प्रशिक्षित खिलाड़ी पदक जीतकर लौटते हैं तो उन्हें सबसे बड़ी खुशी मिलती है। बच्चों की यही सफलता उन्हें लगातार मेहनत करने की प्रेरणा देती है।