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कैप्टन अमरिंदर सिंह बोले- पाक के ड्रोन मामले को 550 वें प्रकाश पर्व से जोड़ना सही नहीं

Fri, 04 Oct 2019 01:16 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Fri, 04 Oct 2019 01:16 AM IST
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CM Captain Amarinder Singh meets PM Modi and invites on 550th Prakash Parv
पीएम मोदी से कैप्टन अमरिंदर सिंह ने की मुलाकात - फोटो : अमर उजाला

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि राज्य सरकार पाकिस्तान से आतंकवाद की किसी भी चुनौती का मुंहतोड़ जवाब देने को पूरी तरह तैयार है लेकिन इस मुद्दे को श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व समागमों के पवित्र मौकों के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

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गुरुवार को पत्रकारों के साथ अनौपचारिक बातचीत के दौरान सवालों का जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि इन दोनों मुद्दों को आपस में नहीं जोड़ा जा सकता।

हाल ही में बरामद हुए दो ड्रोन के जरिए पकिस्तान से पंजाब में हथियारों की खेप भेजने की रिपोर्टों और सरहद पर तनावपूर्ण माहौल संबंधी सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इसका 550वें प्रकाश पर्व के मौके पर करतारपुर गलियारे के खुलने से कोई संबंध नहीं है।
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यह पूछे जाने पर कि प्रधानमंत्री के साथ मीटिंग के दौरान इस मसले संबंधी विचार-विमर्श हुआ, मुख्यमंत्री ने कहा कि वह प्रधानमंत्री को सिर्फ श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व समागमों का न्योता देने के लिए मिले थे। 

मुख्यमंत्री ने कहा की राज्य सरकार इस मसले से निपट रही है और किसी भी कीमत पर पंजाब में अमन-शंति की व्यवस्था को कायम रखने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा, ‘‘हम राज्य की अमन शांति और सद्भावना को भंग करने की हरगिज इजाजत नहीं देंगे। ’’

कैप्टन ने कहा कि पाकिस्तान न सिर्फ ड्रोन के जरिए बल्कि घुसपैठ और ड्रग आतंकवाद द्वारा भी पंजाब में गड़बड़ी पैदा करने की कोशिशें कर रहा है। उन्होंने कहा,‘‘हम ऐसा किसी भी सूरत में नहीं होने देंगे और इसमें कोई संदेह नहीं कि हम ऐसी स्थिति का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।’’ एक और सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब में ड्रोन की घुसपैठ का पता लगने के मद्देनजर उन्होंने भारतीय वायु सेना और बीएसएफ को सरहद पर चौकसी बढ़ाने के लिए कहा है। 

कैप्टन ने मोदी को पंजाब की तीनों नदियों के किनारे पक्के करने का प्रस्ताव सौंपा

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की ओर से केंद्र सरकार को पंजाब के सिंध जल समझौते की तीन पूर्वी नदियों को नहरों की तर्ज पर पक्का करने (कैनलाइजेशन) के प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय प्रोजेक्ट के अधीन लाने की अपील की है। इससे जल स्रोतों की संरक्षण और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को मजबूत किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ हुई मीटिंग के दौरान इस संबंध में प्रस्ताव सौंपा, जिसमें मुख्यमंत्री ने 985 किलोमीटर लंबे नदी किनारों पर तीव्र गति आर्थिक कोरिडोर के निर्माण संबंधी सुझाव दिया। इसके अलावा सतलुज, रावी और ब्यास के किनारों की अंदरूनी ढलानों की लाइनिंग, बाढ़ की रोकथाम के प्रबंधों और नदी प्रशिक्षण कामों पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे राज्य को अपनी जल शक्ति बढ़ाकर फसलीय विविधता, मानक शहरीकरण और कालोनियों का रचनात्मक ढांचा और राज्य के निवासियों के आर्थिक उत्थान को गति देने के मौके पैदा करने में बड़ी सहायता मिलेगी। 

भारत के विभाजन के समय राज्य के जल स्रोतों में हुई कटौती और 1966 में राज्य के पुनर्गठन के समय पैदा हुए विपरीत हालात पर अपने विचार साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सतलुज, रावी और ब्यास नदियों के जरिये राज्य के कृषि अधीन क्षेत्र का केवल 27 फीसदी सिंचित होने के कारण पंजाब का भूजल स्तर काफी नीचे जा चुका है। 

उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप राज्य के सात जिले के निकट भविष्य में मरुस्थल का रूप धारण कर सकते हैं, जो अपने आप में इन क्षेत्रों की आर्थिकता को गहरी चोट पहुंचाएगा। कैप्टन ने सतलुज नदी को नहरी तर्ज पर पक्का करने का सुझाव दिया, जिसके लिए तीन से पांच सालों के समय के दौरान 4000 करोड़ रुपये (0.7 बिलियन अमरीकी डॉलर) का निवेश अपेक्षित है और साथ ही कर से छूट, प्राइवेट और सरकारी जमीन का व्यापारिक प्रयोग जैसे वित्तीय उपबंध करने की भी जरूरत है। उन्होंने कहा की इसके लिए अंतर-राष्ट्रीय स्तर के तकनीकी-आर्थिक माहिरों द्वारा इसके व्यवहार्यता सम्बन्धी अध्ययन की शुरुआत से इस काम की शुरुआत की जा सकती है।

कुल 945.24 किलोमीटर है किनारों की लंबाई
कैप्टन ने मॉनसून के दौरान पाकिस्तान की तरफ जाते पानी को रोके जाने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा की राज्य की तीन नदियों के किनारे कच्चे हैं, जिनकी लंबाई 945.24 किलोमीटर (सतलुज 484.12 किलोमीटर, रावी 245.28 किलोमीटर और ब्यास 215.84 किलोमीटर) बनती है और यह राज्य के कुल क्षेत्र का करीब 60 फीसदी बनता है।

उन्होंने कहा की राज्य की कुल आबादी के 1/3 फीसदी हिस्से को मॉनसून के दौरान बाढ़ की मार झेलनी पड़ी। उन्होंने कहा की नहरी तर्ज पर नदियों को पक्के करने से पंजाब की आर्थिकता का घेरा बढ़ेगा, आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और राज्य की नौजवान पीढ़ी के लिए रोजगार के मौके बढ़ेंगे। 

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