{"_id":"5f061b562bb4346bdb702c74","slug":"cm-capt-amarinder-singh-responded-over-sukhbir-badal-protests-rally","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुखबीर पर कैप्टन का पलटवार, बोले- पहले केंद्र से नाता तोड़ो फिर पंजाब में वैट के खिलाफ प्रदर्शन करो","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सुखबीर पर कैप्टन का पलटवार, बोले- पहले केंद्र से नाता तोड़ो फिर पंजाब में वैट के खिलाफ प्रदर्शन करो
Thu, 09 Jul 2020 12:48 AM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Thu, 09 Jul 2020 12:48 AM IST
विज्ञापन
सुखबीर सिंह बादल, सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह।
- फोटो : फाइल फोटो
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बुधवार को शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के प्रधान सुखबीर सिंह बादल को भाजपा के अपने राजनैतिक आकाओं के इशारे पर नाचना बंद करने की नसीहत देते हुए कहा कि तेल पर वैट बढ़ाने संबंधी राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन करने से पहले केंद्र से गठजोड़ तोड़ें।
विज्ञापन
सुखबीर द्वारा वैट वृद्धि पर सामाजिक दूरी का नियम तोड़कर रोष प्रदर्शन करने पर कैप्टन ने कहा कि अकाली दल के प्रधान को पंजाब के लोगों की जान जोखिम में डालकर राजनीति से प्रेरित कदम उठाने के बजाय केंद्र सरकार पर तेल कीमतें घटाने के लिए दबाव बनाना चाहिए। देश में अनलॉक 1.0 की शुरुआत से ही केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कई गुना वृद्धि की है।
विज्ञापन
यह वृद्धि देशवासियों को और भी चुभती है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट के बावजूद यह बढ़ोतरी की गई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अब विश्व में सबसे शीर्ष पर हैं।
विज्ञापन
अकालियों को केंद्र के साथ गठजोड़ में नहीं रहना चाहिए : कैप्टन
पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाने की मांग को लेकर प्रधानमंत्री को पत्र लिखने संबंधी सुखबीर के दावे पर कैप्टन ने कहा कि इससे पता चलता है कि केंद्र सरकार अपने ही हिस्सेदार की तरफ से उठाए मुद्दे पर ज्यादा ध्यान नहीं देती, जिस कारण अकाली दल को एक दिन के लिए भी गठजोड़ में नहीं रहना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी स्वाभिमानी राजनैतिक पार्टी, जो असली मायनों में अपने लोगों के हितों की परवाह करती हो, वह बहुत पहले ही केंद्र सरकार से नाता तोड़ लेती। हालांकि सत्ता की लालसा में न तो सुखबीर बादल और न ही हरसिमरत कौर, जो केंद्रीय मंत्रिमंडल में मंत्री हैं, कभी ऐसा करने के बारे में सोचेंगे।