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मेयर साहब! ऐसे हालात रहेंगे तो फिर तो मिल चुका चंडीगढ़ को क्लीन सिटी का तगमा
राजेश ढल्ल, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 04 Sep 2018 11:02 AM IST
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कचरा सेग्रिगेशन के लिए 31 दिसंबर 2019 और डंपिंग ग्राउंड की कैपिंग के लिए 31 दिसंबर 2020 की डेडलाइन तय की, ऐसे में चंडीगढ़ क्लीन सिटी कैसे बनेगा। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पॉलिसी मंगलवार को होने वाली अधिकारियों की बैठक में मंजूरी के लिए रखी जाएगी। मगर ड्राफ्ट की गई सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पॉलिसी में सूखा और गीला कचरा अलग-अलग इकट्ठा करने का सिस्टम पूरी तरह लागू करने के लिए नगर निगम ने 31 दिसंबर 2019 की जबकि डड्डूमाजरा के डपिंग ग्राउंड की कैपिंग के लिए 31 दिसंबर 2020 की डेडलाइन रखी है।
खास बात यह है कि इन्हीं दोनों कामों के पूरा होने पर ही अगले साल स्वच्छ सर्वेक्षण में अहम मापदंडों पर नगर निगम को 7 स्टार रेटिंग मिलनी है। ऐसे में जब निगम की डेडलाइन ही 2020 की होगी तो स्वच्छता सर्वेक्षण में शहर की रेटिंग गिरनी तय है। सूखा और गीला कचरा अलग-अलग इकट्ठा करने के काम में नगर निगम की गति दो करोड़ से ज्यादा की राशि खर्च करने के बावजूद पहले से काफी धीमी चल रही है। नगर निगम ने पिछले साल 5 जून से दो करोड़ से ज्यादा राशि खर्च कर हर घर में दो-दो डस्टबीन निशुल्क बांटने का अभियान चलाया था लेकिन अब तक शहर में कचरा सेग्रिगेशन शुरू ही नहीं हो सका है जबकि इसी कैटेगरी में इस साल हुए स्वच्छ सर्वेक्षण में नगर निगम को कम अंक मिले थे।
बता दें कि केंद्र सरकार ने नगर निगम को पिछले साल गांधी जयंती (दो अक्तूबर) तक शहर में कचरा सेग्रिगेशन सिस्टम पूरी तरह से लागू करवाने का टारगेट दिया गया था। हालत यह है कि नगर निगम को अब भी इस काम को पूरी तरह लागू कराने के लिए डेढ़ साल का समय चाहिए। स्वच्छ सर्वेक्षण 2019 के अनुसार अगर सूखा और गीला कचरा शहर में 25 प्रतिशत अलग-अलग इकट्ठा हो रहा है तो वन स्टार जबकि 50 प्रतिशत इकट्ठा होने पर टू स्टार और 80 प्रतिशत तक इकट्ठा होने पर 3 स्टार और शत प्रतिशत पर 5 स्टार रेटिंग मिलनी है।
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ऐसे में इस रेटिंग में शहर की हालत सुधरने की उम्मीद नहीं नजर आ रही, क्योंकि अगले मार्च माह में स्वच्छ सर्वेक्षण पूरा हो जाएगा जबकि कचरा सेग्रिगेशन को पूरी तरह लागू करवाने के लिए निगम ने 31 दिसंबर 2019 की डेडलाइन तय की है। मालूम हो कि इस कचरा प्रबंधन नीति की अधिसूचना जारी कर नगर निगम की ओर से इसी जानकारी सुप्रीम कोर्ट को बतानी है। सुनवाई की अगली तारीख 9 अक्तूबर तय की गई है।
डपिंग ग्राउंड के कचरे से भी नहीं मिलेगी अभी मुक्ति
डड्डूमाजरा डपिंग ग्राउंड की कैपिंग के लिए भी नगर निगम ने पॉलिसी में 31 दिसंबर 2020 की डेडलाइन रखी है जबकि इस काम के लिए नगर निगम ने हाल ही में एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट मंगवाया है। ऐसे में डड्डूमाजरा के डपिंग ग्राउंड में जो लाखों टन कचरा पड़ा हुआ है, उसका हाल साल 2020 तक ऐसे ही रहेगा। इसके तहत जो डपिंग ग्राउंड में इस समय कचरा पड़ा हुआ है, उसे भी प्रोसेस किया जाना है।
मलबा प्रोसेसिंग प्लांट लगेगा मार्च 2019 तक
पॉलिसी में नगर निगम की ओर से दावा किया गया है कि शहर में मलबे को प्रोसेस करने का प्लांट 31 मार्च 2019 तक लग जाएगा। यह काम जरूर पूरा हो सकता है। अगले सर्वेक्षण के अनुसार अगर कोई शहर अपने यहां से निकलने वाले सारे मलबे को प्रोसेस करके टाइल्स और पेवर ब्लॉक बनाता है तो उसे 5 से 7 स्टार रेटिंग मिलेगी।
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खास बात यह है कि इन्हीं दोनों कामों के पूरा होने पर ही अगले साल स्वच्छ सर्वेक्षण में अहम मापदंडों पर नगर निगम को 7 स्टार रेटिंग मिलनी है। ऐसे में जब निगम की डेडलाइन ही 2020 की होगी तो स्वच्छता सर्वेक्षण में शहर की रेटिंग गिरनी तय है। सूखा और गीला कचरा अलग-अलग इकट्ठा करने के काम में नगर निगम की गति दो करोड़ से ज्यादा की राशि खर्च करने के बावजूद पहले से काफी धीमी चल रही है। नगर निगम ने पिछले साल 5 जून से दो करोड़ से ज्यादा राशि खर्च कर हर घर में दो-दो डस्टबीन निशुल्क बांटने का अभियान चलाया था लेकिन अब तक शहर में कचरा सेग्रिगेशन शुरू ही नहीं हो सका है जबकि इसी कैटेगरी में इस साल हुए स्वच्छ सर्वेक्षण में नगर निगम को कम अंक मिले थे।
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बता दें कि केंद्र सरकार ने नगर निगम को पिछले साल गांधी जयंती (दो अक्तूबर) तक शहर में कचरा सेग्रिगेशन सिस्टम पूरी तरह से लागू करवाने का टारगेट दिया गया था। हालत यह है कि नगर निगम को अब भी इस काम को पूरी तरह लागू कराने के लिए डेढ़ साल का समय चाहिए। स्वच्छ सर्वेक्षण 2019 के अनुसार अगर सूखा और गीला कचरा शहर में 25 प्रतिशत अलग-अलग इकट्ठा हो रहा है तो वन स्टार जबकि 50 प्रतिशत इकट्ठा होने पर टू स्टार और 80 प्रतिशत तक इकट्ठा होने पर 3 स्टार और शत प्रतिशत पर 5 स्टार रेटिंग मिलनी है।
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ऐसे में इस रेटिंग में शहर की हालत सुधरने की उम्मीद नहीं नजर आ रही, क्योंकि अगले मार्च माह में स्वच्छ सर्वेक्षण पूरा हो जाएगा जबकि कचरा सेग्रिगेशन को पूरी तरह लागू करवाने के लिए निगम ने 31 दिसंबर 2019 की डेडलाइन तय की है। मालूम हो कि इस कचरा प्रबंधन नीति की अधिसूचना जारी कर नगर निगम की ओर से इसी जानकारी सुप्रीम कोर्ट को बतानी है। सुनवाई की अगली तारीख 9 अक्तूबर तय की गई है।
डपिंग ग्राउंड के कचरे से भी नहीं मिलेगी अभी मुक्ति
डड्डूमाजरा डपिंग ग्राउंड की कैपिंग के लिए भी नगर निगम ने पॉलिसी में 31 दिसंबर 2020 की डेडलाइन रखी है जबकि इस काम के लिए नगर निगम ने हाल ही में एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट मंगवाया है। ऐसे में डड्डूमाजरा के डपिंग ग्राउंड में जो लाखों टन कचरा पड़ा हुआ है, उसका हाल साल 2020 तक ऐसे ही रहेगा। इसके तहत जो डपिंग ग्राउंड में इस समय कचरा पड़ा हुआ है, उसे भी प्रोसेस किया जाना है।
मलबा प्रोसेसिंग प्लांट लगेगा मार्च 2019 तक
पॉलिसी में नगर निगम की ओर से दावा किया गया है कि शहर में मलबे को प्रोसेस करने का प्लांट 31 मार्च 2019 तक लग जाएगा। यह काम जरूर पूरा हो सकता है। अगले सर्वेक्षण के अनुसार अगर कोई शहर अपने यहां से निकलने वाले सारे मलबे को प्रोसेस करके टाइल्स और पेवर ब्लॉक बनाता है तो उसे 5 से 7 स्टार रेटिंग मिलेगी।