{"_id":"5c4982dbbdec22736e4ebc38","slug":"clash-in-bjp-chandigarh-aur-satish-kainth","type":"story","status":"publish","title_hn":"चंडीगढ़ः सतीश कैंथ ने फिर ठोकी ताल, मुश्किल में फंसी भाजपा...बड़े घमासान के आसार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चंडीगढ़ः सतीश कैंथ ने फिर ठोकी ताल, मुश्किल में फंसी भाजपा...बड़े घमासान के आसार
Thu, 24 Jan 2019 02:48 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 24 Jan 2019 02:48 PM IST
विज्ञापन
सतीश कैंथ
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भाजपा से निष्कासित पार्षद सतीश कैंथ के वित्त एवं अनुबंध समिति का चुनाव लड़ने के फैसले ने भाजपा को एक बार फिर मुश्किल में डाल दिया है। स्थिति यह है कि वित्त एवं अनुबंध समिति के चुनाव के लिए भाजपा बैठक के बावजूद अपने उम्मीदवार तय नहीं कर पाई है। नगर निगम के सचिव ने चुनाव के लिए सूचना जारी कर दी है। वीरवार शाम पांच बजे तक नामांकन करने की अंतिम समय रखा गया है। चुनाव 30 जनवरी को होना है। कुल 27 लोगों जिसमें 26 पार्षद और एक सांसद अपने मत का प्रयोग करेंगे। भाजपा के 20 पार्षद, एक अकाली दल का पार्षद, कांग्रेस का चार पार्षद और एक निर्दलीय पार्षद हैं।
भाजपा के 20 पार्षद में अब एक कम हो जाएगा क्योंकि भाजपा ने अपने बागी बनकर मेयर चुनाव लड़े सतीश कैंथ को पार्टी से निकाल दिया है। अब फिर से सतीश कैंथ ने वित्त एवं अनुबंध समिति की चुनाव लड़ने के लिए ताल ठोक दी है। ज्ञात हो कि मेयर चुनाव में भाजपा को 16 और सतीश कैंथ को 11 मत हासिल हुए थे। पांच वोट भाजपा का क्रास हुआ था। इसी को ध्यान में रखकर सतीश कैंथ ने फिर से चुनाव लड़ने का मन बना लिया है। यदि भाजपा का कोई भी उम्मीदवार हारता है तो फिर से भाजपा की किरकिरी होगी क्योंकि इस वर्ष लोकसभा चुनाव भी है। वित्त एवं अनुबंध समिति के चुनाव में जीतने के लिए पांच मत का होने जरूरी हैं।
कुल पांच लोगों का चुनाव होना है। जानकारी के अनुसार, भाजपा से अरुण सूद, आशा जसवाल, महेश इंद्र सिद्धू और राजेश गुप्ता उम्मीदवार हो सकते हैं। कांग्रेस के चार पार्षद हैं। इनमें से शीला देवी या रविंदर कौर गुजराल में से कोई एक उम्मीदवार हो सकता है। भाजपा के पार्षद इस बात से नाराज हैं कि उन लोगों को प्रत्याशी बनाया जा रहा है, जो पहले ही मेयर या अन्य बड़े पदों पर रह चुके हैं। यह असंतोष एकबार फिर पार्टी में गुटबाजी करा सकता है। दो गुटों में विभाजित भाजपा में सतीश कैंथ के नामांकन भरने के घोषणा के कारण नगर निगम की राजनीति एक बार फिर से गर्म हो गई है।
विज्ञापन
30 जनवरी को होंगे चुनाव....
ज्ञात हो कि नए मेयर बनने के साथ ही वित्त एवं अनुबंध समिति भी नई बनाई जानी है। इस महीने 30 जनवरी को नगर निगम सदन की बैठक होनी तय है। इसी बैठक में नगर निगम की वित्त एवं अनुबंध समिति के सदस्यों का चुनाव भी होगा। सदस्यों का चुनाव होने के बाद वित्त एवं अनुबंध समिति का गठन होगा। जिसकी बैठक फरवरी में होगी। इसी बैठक में सबसे पहले नगर निगम का बजट पास होगा उसके बाद सदन की बैठक में मंजूरी दी जाएगी।
विज्ञापन
भाजपा के 20 पार्षद में अब एक कम हो जाएगा क्योंकि भाजपा ने अपने बागी बनकर मेयर चुनाव लड़े सतीश कैंथ को पार्टी से निकाल दिया है। अब फिर से सतीश कैंथ ने वित्त एवं अनुबंध समिति की चुनाव लड़ने के लिए ताल ठोक दी है। ज्ञात हो कि मेयर चुनाव में भाजपा को 16 और सतीश कैंथ को 11 मत हासिल हुए थे। पांच वोट भाजपा का क्रास हुआ था। इसी को ध्यान में रखकर सतीश कैंथ ने फिर से चुनाव लड़ने का मन बना लिया है। यदि भाजपा का कोई भी उम्मीदवार हारता है तो फिर से भाजपा की किरकिरी होगी क्योंकि इस वर्ष लोकसभा चुनाव भी है। वित्त एवं अनुबंध समिति के चुनाव में जीतने के लिए पांच मत का होने जरूरी हैं।
विज्ञापन
कुल पांच लोगों का चुनाव होना है। जानकारी के अनुसार, भाजपा से अरुण सूद, आशा जसवाल, महेश इंद्र सिद्धू और राजेश गुप्ता उम्मीदवार हो सकते हैं। कांग्रेस के चार पार्षद हैं। इनमें से शीला देवी या रविंदर कौर गुजराल में से कोई एक उम्मीदवार हो सकता है। भाजपा के पार्षद इस बात से नाराज हैं कि उन लोगों को प्रत्याशी बनाया जा रहा है, जो पहले ही मेयर या अन्य बड़े पदों पर रह चुके हैं। यह असंतोष एकबार फिर पार्टी में गुटबाजी करा सकता है। दो गुटों में विभाजित भाजपा में सतीश कैंथ के नामांकन भरने के घोषणा के कारण नगर निगम की राजनीति एक बार फिर से गर्म हो गई है।
विज्ञापन
30 जनवरी को होंगे चुनाव....
ज्ञात हो कि नए मेयर बनने के साथ ही वित्त एवं अनुबंध समिति भी नई बनाई जानी है। इस महीने 30 जनवरी को नगर निगम सदन की बैठक होनी तय है। इसी बैठक में नगर निगम की वित्त एवं अनुबंध समिति के सदस्यों का चुनाव भी होगा। सदस्यों का चुनाव होने के बाद वित्त एवं अनुबंध समिति का गठन होगा। जिसकी बैठक फरवरी में होगी। इसी बैठक में सबसे पहले नगर निगम का बजट पास होगा उसके बाद सदन की बैठक में मंजूरी दी जाएगी।