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पंजाब निकाय चुनाव: डबल इंजन बनाम घेराबंदी की जंग, सत्ता के सेमीफाइनल को जीतने में दलों ने लगाया दम

Tue, 26 May 2026 02:06 AM IST
Digvijay Singh मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Digvijay Singh Updated Tue, 26 May 2026 02:06 AM IST
सार

आम आदमी पार्टी के विधायकों और मंत्रियों के लिए यह चुनाव किसी परफॉर्मेंस टेस्ट से कम नहीं माना जा रहा। करीब आठ महीने बाद विधानसभा चुनाव होने हैं इसलिए पार्टी नेतृत्व यह परखना चाहता है कि साढ़े चार साल के कार्यकाल के बाद शहरी मतदाताओं पर पार्टी की पकड़ कितनी मजबूत है।

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Civic Body Elections In Punjab today 3.5 million voters will decide the fate of 7,555 candidates 32,000 police
पंजाब निकाय चुनाव - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पंजाब में निकाय चुनाव के लिए पिछले कई दिनों से तेज गर्मी के बीच चुनाव प्रचार चरम पर रहा। प्रत्याशियों के साथ सभी प्रमुख दलों के दिग्गज नेताओं ने भी मैदान में पूरी ताकत झोंकी।

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अब 26 मई को मतदाता उम्मीदवारों और उनके समर्थकों की मेहनत का फैसला करेंगे जबकि चुनाव परिणाम 29 मई को घोषित होंगे।

इन निकाय चुनावों को सत्ता का सेमीफाइनल माना जा रहा है। ऐसे में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के लिए यह चुनाव बेहद अहम बन गया है। वहीं विपक्षी दल भी इस बार मजबूती से मैदान में दिखे। पूरे चुनाव प्रचार के स्वरूप को देखें तो मुकाबला एक तरफ आम आदमी पार्टी की ‘डबल इंजन सरकार’ की चाह और दूसरी तरफ विपक्ष की घेराबंदी के बीच नजर आया।
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आम आदमी पार्टी के विधायकों और मंत्रियों के लिए यह चुनाव किसी परफॉर्मेंस टेस्ट से कम नहीं माना जा रहा। करीब आठ महीने बाद विधानसभा चुनाव होने हैं इसलिए पार्टी नेतृत्व यह परखना चाहता है कि साढ़े चार साल के कार्यकाल के बाद शहरी मतदाताओं पर पार्टी की पकड़ कितनी मजबूत है। यही कारण रहा कि पार्टी के कई बड़े चेहरे इस बार सीधे प्रचार में कम और रणनीतिकार की भूमिका में अधिक दिखाई दिए।
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आप ने रंगला पंजाब के विजन के साथ आप की सरकार और आप का एमसी का नारा देकर मतदाताओं से समर्थन मांगा। पार्टी नेताओं ने शहरी विकास के लिए राज्य सरकार और स्थानीय निकायों में एक ही पार्टी की सरकार को जरूरी बताया।

वहीं भाजपा ने पूरे चुनाव प्रचार में स्थानीय विकास में केंद्र सरकार की भूमिका को प्रमुखता से उठाया। भाजपा कार्यकर्ताओं ने वार्ड स्तर पर लोगों को केंद्र की योजनाओं और उनके लाभों की जानकारी दी। इसके अलावा श्री हरमंदिर साहिब के लंगर को जीएसटी मुक्त करने, वीर बाल दिवस की घोषणा, श्री करतारपुर साहिब कॉरिडोर खोलने, श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व और अन्य धार्मिक आयोजनों को राष्ट्रीय स्तर पर मनाने जैसे मुद्दों को भी भाजपा ने प्रचार में प्रमुखता से शामिल किया।

इसके साथ ही श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी का इतिहास सीबीएसई पाठ्यक्रम में शामिल कराना, श्री हेमकुंट साहिब में रोप-वे परियोजना और आनंद मैरिज एक्ट को कानूनी मान्यता दिलाने जैसे विषयों को भाजपा ने अपनी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बनाया। माना जा रहा है कि पार्टी इन मुद्दों का असर विधानसभा चुनाव तक बनाए रखना चाहती है।

कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल ने चुनाव प्रचार के दौरान स्थानीय और प्रदेश स्तरीय मुद्दों पर ज्यादा फोकस किया। दोनों दलों ने कानून व्यवस्था, विकास कार्यों और प्रशासनिक मामलों को लेकर सरकार को घेरते हुए मतदाताओं से समर्थन मांगा।

नशा और गैंगस्टरवाद भी बने बड़े मुद्दे

निकाय चुनाव में नशा और गैंगस्टरवाद का मुद्दा भी खूब उठा। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि पंजाब के शहरों और मोहल्लों में नशा आसानी से उपलब्ध हो रहा है। कारोबारियों और उद्योगपतियों के बीच गैंगस्टरों द्वारा रंगदारी और धमकी के मामलों को भी प्रमुखता से उठाया गया। इसके अलावा पानी निकासी, सफाई, सड़कें और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी समस्याएं भी हर बार की तरह इस बार चुनावी मुद्दों में शामिल रहीं।

कई वार्डों में चेहरों का असर भी अहम

स्थानीय निकाय चुनाव होने के कारण कई वार्डों में प्रत्याशियों की व्यक्तिगत छवि और पकड़ भी अहम फैक्टर बनकर उभरी। कई जगहों पर स्थानीय मुद्दों से ज्यादा उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पहचान और प्रभाव चुनाव प्रचार में दिखाई दिया। कुछ वार्डों में प्रत्याशियों के बीच व्यक्तिगत टिप्पणियां और सीधी राजनीतिक टक्कर भी देखने को मिली।

मुकेरियां में भाजपा-शिअद साथ आए

मुकेरियां में निकाय चुनाव के दौरान भाजपा और शिरोमणि अकाली दल का स्थानीय स्तर पर गठजोड़ भी देखने को मिला। भाजपा विधायक जंगी लाल महाजन ने स्पष्ट किया कि यह गठजोड़ केवल मुकेरियां निकाय चुनाव तक सीमित है। उन्होंने कहा कि पूरे पंजाब में दोनों दलों के गठबंधन को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ है और इस संबंध में अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व के स्तर पर ही होगा।

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