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Chandigarh News: गुणवत्ता वाली शिक्षा देने में सिटी ब्यूटीफुल देश में दूसरे स्थान पर
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चंडीगढ़। नीति आयोग ने 17 सतत विकास लक्ष्यों पर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रदर्शन से जुड़ी सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (एसडीजी) इंडेक्स रिपोर्ट 2023-24 जारी की है। इसमें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के मामले में चंडीगढ़ 84 अंकों के साथ देशभर में दूसरे नंबर पर है। दिल्ली ने 85 अंक लेकर पहला स्थान पाया है।
वर्ष 2020-21 की एसडीजी रिपोर्ट में चंडीगढ़ पहले स्थान पर था लेकिन इस बार दिल्ली ने बाजी मारी है। हालांकि चंडीगढ़ का ओवरऑल स्कोर पिछली बार के 79 अंक से बेहतर हुआ है। नीति आयोग ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की रिपोर्ट अलग-अलग दी है। चंडीगढ़ और दिल्ली दोनों केंद्र शासित प्रदेश हैं। अगर राज्यों की बात करें तो केरल 82 अंकों के साथ पहले स्थान पर है। वहीं, ओवरऑल तीसरा स्थान है।
उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (ग्रॉस इनरोलमेंट रेश्यो) में चंडीगढ़ 64.8 प्रतिशत के साथ सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आगे है। नौवीं-दसवीं कक्षा में प्रशिक्षित शिक्षकों की संख्या केंद्र शासित प्रदेशों में चंडीगढ़ में सबसे अधिक है और राज्यों के साथ यह दूसरे स्थान पर है। शिक्षा विभाग ने बताया प्रशिक्षित शिक्षकों की संख्या पिछली रिपोर्ट में 89.49 प्रतिशत से बढ़ कर 99.1 हुई है। इसके अलावा विभाग 396 जेबीटी, 303 टीजीटी, 98 पीजीटी, 97 स्पेशल एजुकेटर और 100 एनटीटी शिक्षकों की भर्ती सत्र 2024-25 में कर रहा है जिसके तहत प्रशिक्षित शिक्षकों की संख्या में बढ़ोतरी होगी।
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कुछ मानकों में इस बार चंडीगढ़ का प्रदर्शन पिछली बार से कमजोर रहा है। इनमें 11वीं-12वीं कक्षा का सकल नामांकन रेश्यो (ग्रॉस एनरोलमेंट रेश्यो) और पहली से आठवीं कक्षा तक का एडजस्टमेंट नेट एनरोलमेंट रेट शामिल हैं। वर्ष 2020-21 की रिपोर्ट में 11वीं-12वीं में ग्रॉस एनरोलमेंट रेश्यो 83.43 प्रतिशत था जबकि साल 2023-24 में यह घटकर 81.7 प्रतिशत हो गया है। पहली से आठवीं कक्षा तक का एडजस्टमेंट नेट एनरोलमेंट रेट 2020-21 में 85.78 प्रतिशत था जो घट कर 84.6 प्रतिशत हुआ है। इसके अलावा बेसिक इन्फ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध करवाने और सभी स्कूलों में कंप्यूटर होने के मानक पर चंडीगढ़ ने 100 प्रतिशत स्कोर किया है। नीति आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, चंडीगढ़ में औसत वार्षिक ड्रॉपआउट रेट सेकंडरी लेवल पर शून्य प्रतिशत रहा है।
हरियाणा चौथे और पंजाब सातवें स्थान पर
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मामले में हरियाणा 77 अंकों के साथ राज्यों में दूसरे और ओवरऑल चौथे स्थान पर है। वहीं, हिमाचल प्रदेश भी 77 अंकों के साथ संयुक्त रूप से चौथे स्थान पर जबकि पंजाब 75 अंकों के साथ देशभर में ओवरऑल सातवें और केंद्र शासित प्रदेशों को छोड़कर राज्यों की श्रेणी में पांचवें स्थान पर है। सबसे खराब स्थिति बिहार की रही है, जिसे सिर्फ 32 अंक मिले हैं।
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वर्ष 2020-21 की एसडीजी रिपोर्ट में चंडीगढ़ पहले स्थान पर था लेकिन इस बार दिल्ली ने बाजी मारी है। हालांकि चंडीगढ़ का ओवरऑल स्कोर पिछली बार के 79 अंक से बेहतर हुआ है। नीति आयोग ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की रिपोर्ट अलग-अलग दी है। चंडीगढ़ और दिल्ली दोनों केंद्र शासित प्रदेश हैं। अगर राज्यों की बात करें तो केरल 82 अंकों के साथ पहले स्थान पर है। वहीं, ओवरऑल तीसरा स्थान है।
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उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (ग्रॉस इनरोलमेंट रेश्यो) में चंडीगढ़ 64.8 प्रतिशत के साथ सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आगे है। नौवीं-दसवीं कक्षा में प्रशिक्षित शिक्षकों की संख्या केंद्र शासित प्रदेशों में चंडीगढ़ में सबसे अधिक है और राज्यों के साथ यह दूसरे स्थान पर है। शिक्षा विभाग ने बताया प्रशिक्षित शिक्षकों की संख्या पिछली रिपोर्ट में 89.49 प्रतिशत से बढ़ कर 99.1 हुई है। इसके अलावा विभाग 396 जेबीटी, 303 टीजीटी, 98 पीजीटी, 97 स्पेशल एजुकेटर और 100 एनटीटी शिक्षकों की भर्ती सत्र 2024-25 में कर रहा है जिसके तहत प्रशिक्षित शिक्षकों की संख्या में बढ़ोतरी होगी।
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कुछ मानकों में इस बार चंडीगढ़ का प्रदर्शन पिछली बार से कमजोर रहा है। इनमें 11वीं-12वीं कक्षा का सकल नामांकन रेश्यो (ग्रॉस एनरोलमेंट रेश्यो) और पहली से आठवीं कक्षा तक का एडजस्टमेंट नेट एनरोलमेंट रेट शामिल हैं। वर्ष 2020-21 की रिपोर्ट में 11वीं-12वीं में ग्रॉस एनरोलमेंट रेश्यो 83.43 प्रतिशत था जबकि साल 2023-24 में यह घटकर 81.7 प्रतिशत हो गया है। पहली से आठवीं कक्षा तक का एडजस्टमेंट नेट एनरोलमेंट रेट 2020-21 में 85.78 प्रतिशत था जो घट कर 84.6 प्रतिशत हुआ है। इसके अलावा बेसिक इन्फ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध करवाने और सभी स्कूलों में कंप्यूटर होने के मानक पर चंडीगढ़ ने 100 प्रतिशत स्कोर किया है। नीति आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, चंडीगढ़ में औसत वार्षिक ड्रॉपआउट रेट सेकंडरी लेवल पर शून्य प्रतिशत रहा है।
हरियाणा चौथे और पंजाब सातवें स्थान पर
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मामले में हरियाणा 77 अंकों के साथ राज्यों में दूसरे और ओवरऑल चौथे स्थान पर है। वहीं, हिमाचल प्रदेश भी 77 अंकों के साथ संयुक्त रूप से चौथे स्थान पर जबकि पंजाब 75 अंकों के साथ देशभर में ओवरऑल सातवें और केंद्र शासित प्रदेशों को छोड़कर राज्यों की श्रेणी में पांचवें स्थान पर है। सबसे खराब स्थिति बिहार की रही है, जिसे सिर्फ 32 अंक मिले हैं।