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सिटी ब्यूटीफुल का चेहरा बिगाड़ा तो 50 हजार जुर्माना, एक साल की जेल
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 11 Nov 2016 10:56 PM IST
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Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
- फोटो : File Photo
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सिटी ब्यूटीफुल की पोस्टरों व अन्य माध्यमों से तस्वीर बिगाड़ने वालों की अब खैर नहीं होगी। चंडीगढ़ प्रशासन ने शहर की सुंदरता को बनाए रखने के लिए दिल्ली का प्रिवेंशन ऑफ डिफेसमेंट ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट को अपना लिया है। एक्ट के प्रावधानों के तहत शहर को गंदा करने वालों पर 50 हजार केजुर्माने और एक साल कैद की सजा का प्रावधान है। यह जानकारी चंडीगढ़ प्रशासन के सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल सुवीर सहगल ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में स्वयं संज्ञान मामले की सुनवाई के दौरान दी।
मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने स्वयं संज्ञान लेते हुए एक समाचार पत्र की खबर को आधार बनाकर केस की सुनवाई आरंभ की थी। समाचार यह था कि शहर में जिस प्रकार से छात्र संघ चुनावों के दौरान प्रचार किया जाता है, उससे शहर का पूरा चेहरा ही बिगड़ जाता है। दीवारों से लेकर पोल पर और मार्केट से लेकर स्कूलों व कॉलेजों की दीवारों पर ऐसे पोस्टर चिपका दिए जाते हैं। मामले में हाईकोर्ट ने आदेश जारी करते हुए प्रशासन और पुलिस को आदेश दिए थे कि वे इस दिशा में ठोस कदम उठाएं और डिफेसमेंट एक्ट की पालना करें। इस एक्ट की तथा हाईकोर्ट द्वारा जारी किए गए आदेशों की पालना न होने पर अवमानना के तहत सुनवाई आरंभ की गई।
पिछली सुनवाई पर प्रशासन को लगी फटकार के बाद प्रशासन की ओर से अब दोषियों पर शिकंजा कसने की तैयार कर ली गई है। प्रशासन की ओर से कोर्ट में मौजूद सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल सुवीर सहगल ने बताया कि प्रशासन की ओर से दिल्ली का प्रिवेंशन ऑफ डिफेसमेंट ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट 2007 अपनाने का फैसला लिया गया है। इस फैसले के चलते अब शहर का चेहरा बिगाड़ने वालों से सख्ती से निपटा जा सकेगा। एक्ट के सेक्शन 3 और 6 के तहत दोषियों पर 50 हजार के जुर्माने और एक वर्ष की सजा का प्रावधान होगा। सजा सख्त होने के चलते पालना का मार्ग भी आसान होगा। हाईकोर्ट ने शहर का चेहरा बिगाड़ने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती। प्रशासन सख्ती से कदम उठाए और अपनी यूनिवर्सिटी, कॉलेज व शहर को गंदा करने वाले ऐसे पढ़े लिखे लोगों से पालना करवाए।
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मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने स्वयं संज्ञान लेते हुए एक समाचार पत्र की खबर को आधार बनाकर केस की सुनवाई आरंभ की थी। समाचार यह था कि शहर में जिस प्रकार से छात्र संघ चुनावों के दौरान प्रचार किया जाता है, उससे शहर का पूरा चेहरा ही बिगड़ जाता है। दीवारों से लेकर पोल पर और मार्केट से लेकर स्कूलों व कॉलेजों की दीवारों पर ऐसे पोस्टर चिपका दिए जाते हैं। मामले में हाईकोर्ट ने आदेश जारी करते हुए प्रशासन और पुलिस को आदेश दिए थे कि वे इस दिशा में ठोस कदम उठाएं और डिफेसमेंट एक्ट की पालना करें। इस एक्ट की तथा हाईकोर्ट द्वारा जारी किए गए आदेशों की पालना न होने पर अवमानना के तहत सुनवाई आरंभ की गई।
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पिछली सुनवाई पर प्रशासन को लगी फटकार के बाद प्रशासन की ओर से अब दोषियों पर शिकंजा कसने की तैयार कर ली गई है। प्रशासन की ओर से कोर्ट में मौजूद सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल सुवीर सहगल ने बताया कि प्रशासन की ओर से दिल्ली का प्रिवेंशन ऑफ डिफेसमेंट ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट 2007 अपनाने का फैसला लिया गया है। इस फैसले के चलते अब शहर का चेहरा बिगाड़ने वालों से सख्ती से निपटा जा सकेगा। एक्ट के सेक्शन 3 और 6 के तहत दोषियों पर 50 हजार के जुर्माने और एक वर्ष की सजा का प्रावधान होगा। सजा सख्त होने के चलते पालना का मार्ग भी आसान होगा। हाईकोर्ट ने शहर का चेहरा बिगाड़ने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती। प्रशासन सख्ती से कदम उठाए और अपनी यूनिवर्सिटी, कॉलेज व शहर को गंदा करने वाले ऐसे पढ़े लिखे लोगों से पालना करवाए।
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प्रशासन ने दिल्ली प्रिवेंशन ऑफ डिफेसमेंट ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट को अपनाया
रॉक गार्डेन
- फोटो : file photo
नहीं हो रही नियमों की पालना
अवमानना याचिका में बताया गया कि एक ओर से शहर में डिफेसमेंट एक्ट की पालना नहीं हो रही है और मनमाने तरीके से कहीं पर भी पोस्टर और स्टीकर लगा दिए जाते हैं। इस बारे में हाईकोर्ट की ओर से जारी आदेशों की भी पालना नहीं हो रही है। प्रशासन दोषियों के खिलाफ नरम रवैया अपना रहा है। हाईकोर्ट ने उनकी दलील को स्वीकार तो कर लिया लेकिन साथ ही यह टिप्पणी भी की कि यह शहर सभी का है और सभी की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे शहर को साफ रखें।
हर वर्ष बदल जाती है सड़कों की सूरत
हाईकोर्ट ने कहा कि चुनावों के दौरान हर वर्ष शहर की सड़कों की सूरत ही बदल जाती है। क्या हर बार कार्रवाई करने के लिए हाईकोर्ट को याद दिलाना पड़ेगा। जब हाईकोर्ट सख्ती करता है तो नाम मात्र की कार्रवाई का ब्योरा पेश कर दिया जाता है। यह प्रैक्टिस बंद होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ प्रशासन को स्वयं और सख्ती से कार्रवाई करनी चाहिए।
अवमानना याचिका में बताया गया कि एक ओर से शहर में डिफेसमेंट एक्ट की पालना नहीं हो रही है और मनमाने तरीके से कहीं पर भी पोस्टर और स्टीकर लगा दिए जाते हैं। इस बारे में हाईकोर्ट की ओर से जारी आदेशों की भी पालना नहीं हो रही है। प्रशासन दोषियों के खिलाफ नरम रवैया अपना रहा है। हाईकोर्ट ने उनकी दलील को स्वीकार तो कर लिया लेकिन साथ ही यह टिप्पणी भी की कि यह शहर सभी का है और सभी की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे शहर को साफ रखें।
हर वर्ष बदल जाती है सड़कों की सूरत
हाईकोर्ट ने कहा कि चुनावों के दौरान हर वर्ष शहर की सड़कों की सूरत ही बदल जाती है। क्या हर बार कार्रवाई करने के लिए हाईकोर्ट को याद दिलाना पड़ेगा। जब हाईकोर्ट सख्ती करता है तो नाम मात्र की कार्रवाई का ब्योरा पेश कर दिया जाता है। यह प्रैक्टिस बंद होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ प्रशासन को स्वयं और सख्ती से कार्रवाई करनी चाहिए।