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सिटको ने बिना समझौते और संचालन व्यवस्था के चलाई कैंटीन, झेलना पड़ा 10 करोड़ का नुकसान
Sat, 26 Sep 2020 11:34 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Sat, 26 Sep 2020 11:34 AM IST
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सिटको
- फोटो : फाइल फोटो
भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) ने अपनी रिपोर्ट में सिटको की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठाए हैं। कैग ने कहा है कि चंडीगढ़ इंडस्ट्रियल एंड टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (सिटको) ने बिना समझौते और संचालन व्यवस्था के सेक्टर-9 स्थित यूटी सचिवालय में कैंटीन व न्यू दिल्ली यूटी गेस्ट हाउस को चलाया, जिसकी वजह से सिटको को करीब 10 करोड़ का नुकसान हो चुका है।
बता दें सिटको एक कॉरपोरेशन है, जो चंडीगढ़ प्रशासन के तहत काम करता है। सिटको शहर में इंडस्ट्रियल और पर्यटन संबंधित गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए काम कर रहा है। वैश्विक महामारी कोरोना की वजह से पर्यटन पर बुरा असर पड़ा है। लॉकडाउन की वजह से सिटको के सभी होटल और रेस्टोरेंट बंद रहे, जिसकी वजह से भी सिटको को करोड़ों का घाटा लगा है। इस समय सिटको बुरे दौर से गुजर रहा है।
सिटको का सेक्टर-9 स्थित यूटी सचिवालय पर 8.27 करोड़ और न्यू दिल्ली यूटी गेस्ट हाउस पर 1.52 करोड़ रुपये का बकाया है। यही कारण है कि सिटको के चेयरमैन ने पिछले महीने प्रशासन को पत्र लिखकर लंबित पड़े इन 10 करोड़ रुपये की अदायगी की मांग की थी। इन्हीं को देखते हुए भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक ने अपनी रिपोर्ट में कई सवाल उठाए हैं।
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कैंटीन और दिल्ली गेस्ट हाउस को लेकर नहीं हुआ समझौता
सिटको अप्रैल 1983 से यूटी सचिवालय में कैंटीन चला रहा है। उसकी तरफ से कई बार इस कैंटीन को चलाने के लिए राशि की अदायगी करने के लिए पत्र लिखा गया। इसी तरह गेस्ट हाउस को भी विभाग वर्ष 1990 से चलाकर रहा है। सिटको बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने कैंटीन को चलाने के लिए तैयार किए गए व्यवस्थाओं को मंजूरी दी थी।
यूटी प्रशासन के साथ किए गए कई करार को देखते हुए ही ये मंजूरी दी गई थी, जिसमें होटलों का हस्तांतरण भी शामिल था। इसके अलावा यूटी प्रशासन की मांग पर न्यू दिल्ली गेस्ट हाउस को भी चलाने के लिए सिटको को मंजूरी दी गई थी। गेस्ट हाउस में अधिकारियों की विजिट के दौरान आवास सुविधाओं की कमी के चलते ही ये फैसला लिया गया था।
हालांकि दोनों जगहों के लिए विभाग की तरफ से कोई एग्रीमेंट नहीं किया गया। वर्ष 2016 में सिटको की तरफ से दिल्ली गेस्ट हाउस को लेकर ड्राफ्ट एग्रीमेंट भेजा गया था, जो जुलाई 2019 तक फाइनल नहीं हो पाया। वहीं, यूटी सचिवालय कैंटीन को लेकर सिटको ने कोई एग्रीमेंट नहीं मांगा।
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बता दें सिटको एक कॉरपोरेशन है, जो चंडीगढ़ प्रशासन के तहत काम करता है। सिटको शहर में इंडस्ट्रियल और पर्यटन संबंधित गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए काम कर रहा है। वैश्विक महामारी कोरोना की वजह से पर्यटन पर बुरा असर पड़ा है। लॉकडाउन की वजह से सिटको के सभी होटल और रेस्टोरेंट बंद रहे, जिसकी वजह से भी सिटको को करोड़ों का घाटा लगा है। इस समय सिटको बुरे दौर से गुजर रहा है।
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सिटको का सेक्टर-9 स्थित यूटी सचिवालय पर 8.27 करोड़ और न्यू दिल्ली यूटी गेस्ट हाउस पर 1.52 करोड़ रुपये का बकाया है। यही कारण है कि सिटको के चेयरमैन ने पिछले महीने प्रशासन को पत्र लिखकर लंबित पड़े इन 10 करोड़ रुपये की अदायगी की मांग की थी। इन्हीं को देखते हुए भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक ने अपनी रिपोर्ट में कई सवाल उठाए हैं।
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कैंटीन और दिल्ली गेस्ट हाउस को लेकर नहीं हुआ समझौता
सिटको अप्रैल 1983 से यूटी सचिवालय में कैंटीन चला रहा है। उसकी तरफ से कई बार इस कैंटीन को चलाने के लिए राशि की अदायगी करने के लिए पत्र लिखा गया। इसी तरह गेस्ट हाउस को भी विभाग वर्ष 1990 से चलाकर रहा है। सिटको बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने कैंटीन को चलाने के लिए तैयार किए गए व्यवस्थाओं को मंजूरी दी थी।
यूटी प्रशासन के साथ किए गए कई करार को देखते हुए ही ये मंजूरी दी गई थी, जिसमें होटलों का हस्तांतरण भी शामिल था। इसके अलावा यूटी प्रशासन की मांग पर न्यू दिल्ली गेस्ट हाउस को भी चलाने के लिए सिटको को मंजूरी दी गई थी। गेस्ट हाउस में अधिकारियों की विजिट के दौरान आवास सुविधाओं की कमी के चलते ही ये फैसला लिया गया था।
हालांकि दोनों जगहों के लिए विभाग की तरफ से कोई एग्रीमेंट नहीं किया गया। वर्ष 2016 में सिटको की तरफ से दिल्ली गेस्ट हाउस को लेकर ड्राफ्ट एग्रीमेंट भेजा गया था, जो जुलाई 2019 तक फाइनल नहीं हो पाया। वहीं, यूटी सचिवालय कैंटीन को लेकर सिटको ने कोई एग्रीमेंट नहीं मांगा।