{"_id":"616898ee5e0f4112b2646e3a","slug":"cii-vice-president-dies-of-dengue-health-department-silent-chandigarh-news-pkl4300486194","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीआईआई के उपाध्यक्ष की डेंगू से मौत, स्वास्थ्य विभाग चुप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सीआईआई के उपाध्यक्ष की डेंगू से मौत, स्वास्थ्य विभाग चुप
विज्ञापन
चंडीगढ़। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) चंडीगढ़ के उपाध्यक्ष डॉ. दीपक कांसल की बीते 8 अक्तूबर को मौत हो चुकी है, परिजनों का कहना है कि उन्हें डेंगू हुआ था, लेकिन स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी ही नहीं है। स्वास्थ्य विभाग न तो डॉ. दीपक कांसल की डेंगू से मौत की पुष्टि कर रहा है, न यह जानकारी दे रहा है कि शहर में डेंगू की क्या स्थिति है।
डॉ. दीपक कांसल के परिवार का कहना है कि डेंगू के चलते उनकी प्लेटलेट्स काफी कम हो गई थीं, जिससे उनकी मौत हुई है। डेंगू दिनोंदिन भयावह रूप लेता जा रहा है लेकिन स्वास्थ्य विभाग डेंगू के बढ़ते मामलों और प्रभावित क्षेत्रों और मौत के आंकड़ों पर मौन साधे हुए है। इसे लेकर विशेषज्ञ भी चिंतित हैं। उनका कहना है कि वास्तविक स्थिति के सामने न आने से बचाव व राहत कार्य में अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाएगा। वहीं प्रभावित क्षेत्र में लापरवाही से स्थिति और विकराल होगी।
निदेशक स्वास्थ्य का क ार्यालय है सेक्टर-16 में
चौंकाने वाली बात यह है कि एक तरफ स्वास्थ्य विभाग शहर की जनता को कोरोना के साथ ही अन्य बीमारियों से बचाने का दावा कर रहा है, लेकिन जिस सेक्टर में स्वास्थ्य निदेशक का कार्यालय है, उसी सेक्टर में 7 दिन पहले डेंगू से एक मौत होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन उसकी भनक किसी भी स्वास्थ्य अधिकारी या कर्मचारी को भी नहीं है। सेक्टर-16 निवासी डॉ. दीपक कांसल की बुखार के कारण स्थिति बिगड़ने पर उनकी डेंगू जांच कराई गई थी। इसमें डेंगू की पुष्टि हुई थी। मोहाली के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। 55 वर्षीय कासंल अपने पीछे माता-पिता, पत्नी और एक पुत्र व एक पुत्री छोड़ गए हैं।
विज्ञापन
अनदेखी पर है सजा का प्रावधान
वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन के सलाहकार डॉ. आरएस बेदी
का कहना है कि डेंगू को लेकर पारदर्शिता रखना बेहद जरूरी है। इसमें सरकारी और निजी अस्पतालों के बीच सूचना का आदान-प्रदान प्रतिदिन होना जरूरी है। अनदेखी पर सजा का प्रावधान है। डॉ. बेदी का कहना है कि डेंगू की वास्तविक स्थिति के बारे में जानकारी होने पर स्वास्थ्य विभाग को जनता का सहयोग आसानी से मिल सकता है। प्लेटलेट्स की कमी वाली स्थिति में युवाओं से जुड़ी संस्था से सहयोग लिया जा सकता है। वहीं प्रभावित क्षेत्र में अतिरिक्त बचाव कार्य करके स्थिति पर नियंत्रण का प्रयास किया जा सकता है। लेकिन कुछ भी पता न चलने वाली स्थिति घातक हो सकती है।
शहर में डेंगू के 31 मरीज मिले
स्वास्थ्य विभाग ने देर रात यह जानकारी दी कि शहर में वीरवार को डेंगू के 31 मरीज मिले। इससे डेंगू के मरीजों की संख्या 219 पर पहुंच गई है। वहीं, दूसरे प्रदेशों के 80 मरीजों को पीजीआई, जीएमसीएच-32 और जीएमएसएच 16 में भर्ती कर इलाज किया गया है। वीरवार को जिन क्षेत्रों से डेंगू के मरीज मिले हैं उनमें मौलीजागरां, मनीमाजरा, दरिया, सेक्टर-22, सेक्टर-26, सेक्टर-40, सेक्टर-20, सेक्टर 19, बापूधाम, धनास और सारंगपुर शामिल हैं।
विज्ञापन
डॉ. दीपक कांसल के परिवार का कहना है कि डेंगू के चलते उनकी प्लेटलेट्स काफी कम हो गई थीं, जिससे उनकी मौत हुई है। डेंगू दिनोंदिन भयावह रूप लेता जा रहा है लेकिन स्वास्थ्य विभाग डेंगू के बढ़ते मामलों और प्रभावित क्षेत्रों और मौत के आंकड़ों पर मौन साधे हुए है। इसे लेकर विशेषज्ञ भी चिंतित हैं। उनका कहना है कि वास्तविक स्थिति के सामने न आने से बचाव व राहत कार्य में अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाएगा। वहीं प्रभावित क्षेत्र में लापरवाही से स्थिति और विकराल होगी।
विज्ञापन
निदेशक स्वास्थ्य का क ार्यालय है सेक्टर-16 में
चौंकाने वाली बात यह है कि एक तरफ स्वास्थ्य विभाग शहर की जनता को कोरोना के साथ ही अन्य बीमारियों से बचाने का दावा कर रहा है, लेकिन जिस सेक्टर में स्वास्थ्य निदेशक का कार्यालय है, उसी सेक्टर में 7 दिन पहले डेंगू से एक मौत होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन उसकी भनक किसी भी स्वास्थ्य अधिकारी या कर्मचारी को भी नहीं है। सेक्टर-16 निवासी डॉ. दीपक कांसल की बुखार के कारण स्थिति बिगड़ने पर उनकी डेंगू जांच कराई गई थी। इसमें डेंगू की पुष्टि हुई थी। मोहाली के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। 55 वर्षीय कासंल अपने पीछे माता-पिता, पत्नी और एक पुत्र व एक पुत्री छोड़ गए हैं।
विज्ञापन
अनदेखी पर है सजा का प्रावधान
वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन के सलाहकार डॉ. आरएस बेदी
का कहना है कि डेंगू को लेकर पारदर्शिता रखना बेहद जरूरी है। इसमें सरकारी और निजी अस्पतालों के बीच सूचना का आदान-प्रदान प्रतिदिन होना जरूरी है। अनदेखी पर सजा का प्रावधान है। डॉ. बेदी का कहना है कि डेंगू की वास्तविक स्थिति के बारे में जानकारी होने पर स्वास्थ्य विभाग को जनता का सहयोग आसानी से मिल सकता है। प्लेटलेट्स की कमी वाली स्थिति में युवाओं से जुड़ी संस्था से सहयोग लिया जा सकता है। वहीं प्रभावित क्षेत्र में अतिरिक्त बचाव कार्य करके स्थिति पर नियंत्रण का प्रयास किया जा सकता है। लेकिन कुछ भी पता न चलने वाली स्थिति घातक हो सकती है।
शहर में डेंगू के 31 मरीज मिले
स्वास्थ्य विभाग ने देर रात यह जानकारी दी कि शहर में वीरवार को डेंगू के 31 मरीज मिले। इससे डेंगू के मरीजों की संख्या 219 पर पहुंच गई है। वहीं, दूसरे प्रदेशों के 80 मरीजों को पीजीआई, जीएमसीएच-32 और जीएमएसएच 16 में भर्ती कर इलाज किया गया है। वीरवार को जिन क्षेत्रों से डेंगू के मरीज मिले हैं उनमें मौलीजागरां, मनीमाजरा, दरिया, सेक्टर-22, सेक्टर-26, सेक्टर-40, सेक्टर-20, सेक्टर 19, बापूधाम, धनास और सारंगपुर शामिल हैं।