फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Children gave bicycle gifts .. so that the mummies stayed fit, Womens Day

Womens Day: बच्चों ने दी साइकिल गिफ्ट, ताकि मम्मियां रहे फिट और उनकी सेहत सुपरहिट

Tue, 03 Mar 2020 02:36 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो रूबी सिंह, चंडीगढ़
रूबी सिंह, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Tue, 03 Mar 2020 02:36 PM IST
विज्ञापन
Children gave bicycle gifts .. so that the mummies stayed fit, Womens Day
रूचि एवं उनके बेटे
मां.. जिंदगी का सबसे खूबसूरत रिश्ता। जिनकी लंबी उम्र के लिए हर बच्चे दुआ में यह मन्नत जरूर मांगते हैं। मां फिट रहें, इसके लिए उन्हें रोज कभी बातों से तो कभी फिटनेस मैसेज से बच्चे अवेयर करते हैं। ऐसा ही कुछ ट्राइसिटी के बच्चों की ओर से किया जा रहा है। ये बच्चे अपनी मां को फिट रखने के लिए सबसे बेस्ट कहे जाने वाली एक्साइज साइकलिंग के लिए मोटिवेट कर रहे हैं। मां के लिए साइकलिंग कितनी फिट रहेगी, इसके लिए वे पूरी तरह से इस बारे में न केवल रिसर्च कर रहे हैं बल्कि उनकी हिसाब की साइकिल भी खरीद रहे हैं। ऐसे ही कुछ बच्चों ने अपने मां को साइकिल तोहफे में देकर उनको फिट रखने का संदेश दिया है। इस तोहफे को पाकर मांएं भी बेहद खुश हैं। सिटी की ऐसी ही मांओं ने अपने बच्चों से पाए इस खूबसूरत तोहफेकी खुशी वुमन डे के वीकेंड संग सांझा की।
विज्ञापन


बेटी का मां को फिट रहने के लिए प्यारा गिफ्ट
मेरी बेटी प्रेरणा ने बंगलूरू में नौकरी पर जाने से पहले मुझे अपनी साइकिल तोहफे में दी। मैं न केवल साइकिलिंग करती हूं बल्कि साइकलिंग प्रोफेशनली चलाती हूं। शुरुआती तौर में साइकलिंग करते समय थोड़ा अजीब लगता था। लेकिन अब साइकिल ने मेरी जिंदगी की ही बदल दी। साइकलिंग ने न केवल मुझे फिट रख रही है बल्कि मेरी अब जिंदगी का सबसे खूबसूरत तोहफा बन गई है। मैं आज और मांओं को साइकलिंग के लिए प्रेरित करती हूं। मेरे ख्याल से साइकलिंग सभी वर्ग की लेडीज को करनी चाहिए, क्योंकि इससे सभी फिट रहने के साथ-साथ जिंदगी में आत्मविश्वास से भरपूर रहती हैं। आज मैंने साइकलिंग में कई मेडल जीते हैं। सोलो के अलावा मैं ग्रुप में साइकिलिंग कंपीटीशन में हिस्सा लेती हूं। मेरी बेटी प्रेरणा अब अमेरिका में हायर स्टडी के लिए जा रही है, लेकिन वह जब भी घर होती है वह मेरे साथ साइकिलिंग पर जरूर जाती है।
विज्ञापन

- नीरू सैनी, 52 वर्षीय शिक्षिका एवं साइकिलिस्ट

बेटे ने ऑस्ट्रेलिया जाने से पहले साइकिल की गिफ्ट, कई मेडल जीते

2016 में मेरे बेटे तुषार ने साइकिलिंग शुरू की थीं। वह खुद भी काफी साइकलिंग कंपीटीशन में हिस्सा लेता था। लेकिन 2017 में वह हायर एजूकेशन के लिए ऑस्ट्रेलिया चला गया। जाने से पहले उनसे मुझे अपनी यह साइकिल गिफ्ट की और कहा.. मां ये साइकिल आपको फिट रखेगी। उस दिन तो साइकिल चलाने से डर भी लगा, चोट भी लगी, क्योंकि कभी गियर वाली साइकिल चलाई नहीं थीं। लेकिन मैंने अपने बेटे से किया साइकिलिंग का वादा तोड़ा नहीं और साइकलिंग कभी बंद नहीं किया। आज प्रति दिन 21 किलोमीटर साइकलिंग करती हूं। मेरे ख्याल से हर महिला को साइकलिंग चलानी चाहिए। इससे आपका अकेलापन भी दूर होता है। आज मैं नंगल से लेकर सोलन तक सोलो एवं ग्रुप साइकलिंग कंपीटीशन में हिस्सा लेती हूं। 53 वर्षीय की उम्र में पहले साइकलिंग करना अजीब लेता था, लेकिन अब साइकलिंग मेरी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुकी हैं। हम अब लेडीज कभी ग्रुप में तो कभी सोलो साइकिलिंग करती हैं। मैंने इस प्रतियोगिता में कई मेडल भी जीत लिए हैं।
- नीलिमा पसरीजा, अकाउंट्स ऑफिसर

पूरे परिवार के साथ करती हूं साइकिलिंग
मेरे दोनों बेटे मेरे साथ साइकलिंग करते हैं। दोनों मुझे साइकलिंग के बारे में पूरी टेकनीक भी बताते हैं। हमारा पूरा परिवार वीकेंड पर साइकलिंग पर जाता है। मेरे पति मुझे साइकलिंग के लिए बेहद स्पोर्ट करते हैं। वर्किंग होने की वजह से कई बार साइकलिंग नहीं करती तो यह कमी उस दिन बेहद खलती है। इसलिए मेरी कोशिश करती है कि मैं साइकलिंग रोजाना करूं। हम लोग वीकेंड पर लिमिट तय करते है और फिर सभी एक साथ समय सीमा तय कर साइकिलिंग करते हैं। मैं अपने बच्चों के साथ साइकलिंग करते हुए सबसे ज्यादा इंज्चार्य करती हूं। मेरे ख्याल से हर वर्ग की महिलाओं को साइकलिंग करती चाहिए।
- रूचि लखानी, 42 वर्षीय, प्रोफेसर

बेटे की दिया फिटनेस का तोहफा.. साइकिलिंग से फिट हूं

मैं वर्किंग हूं तो काम करते हुए काफी थकान सी रहती थी। फिटनेस पर बिलकुल ध्यान नहीं रख पाती थीं। यहीं देखकर मेरे बेटे अबीर ने साइकिल तोहफे में दी और कहा, ‘मां ये साइकिल आपको फिट रखेगी’। फिर क्या था.. बस फिर साइकलिंग शुरू कर दी। आज जैसे ही ऑफिस से आती हूं, साइकलिंग करने चली जाती है। साइकलिंग ने मुझे फिट भी बनाया और नए दोस्त भी दिए हैं। मैं रोजाना छह से 10 किलोमीटर या कभी कभी अधिक लिमिट पर साइकिलिंग करती हूं। अब साइकिल मेरी जिंदगी का अहम हिस्सा है और इसको नहीं चलाने पर मुझे अजीब सा लगता है। साइकलिंग करने के लिए अब तो मैं अपनी सहेलियों को मोटिवेट करती हूं। मुझे मेरे बेटे का यह तोहफा बेहद अजीज है।
- रजनीश तिवारी, 58 वर्षीय, बैंक कैश ऑफिसर

हर मां अपने बच्चों के साथ यह अनोखा अनुभव जरूर जिएं
मैं अपनी बेटी के साथ साइकलिंग करती हूं। हर मां को अपने बच्चों के साथ यह अनोखा अनुभव जीना चाहिए। जिंदगी में चलने की सीख के बाद बच्चे सबसे पहले साइकिल को ही चलाना सीखते हैं। यह उनकी जिंदगी का सबसे खूबसूरत पल होता है और एक मां के साथ यह पल साझा करना हर बच्चे और मां के लिए खास है। मैं साइकलिंग फिट रखने के लिए करती हूं और दिन में एक समय जरूर साइकिलिंग करने जाती है। साइकिलिंग अब मेरा शौक नहीं मेरा जुनून भी बन गया है। मैंने बिना गेयर की साइकिल चलानी सीखी और अब गेयर साइकलिंग चलाती हूं। मैं साइकलिंग से अपनी जिंदगी के हर पल को इंजॉय कर रही हूं।
- दीपेंद्र कौर, एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed