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चंडीगढ़: महामारी के दौर में गूंजी किलकारी.. नन्हे देवदूतों ने दिया जीने का संदेश
Wed, 02 Jun 2021 12:57 PM IST
निवेदिता वर्मा
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 02 Jun 2021 12:57 PM IST
सार
कइयों ने कोरोना योद्धाओं के घर में जन्म लेकर उन्हें ईश्वर का आशीर्वाद प्रदान किया तो कइयों ने संक्रमण के इस दौर में खुद को सुरक्षित रखते हुए अपनी पहली वर्षगांठ मनाई।
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कोरोना काल में जन्मे बच्चे।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कोरोना महामारी के इस दौर में जब हर तरफ निराशा, दुख और कष्ट का माहौल छाया हुआ है, इन सबके बीच नन्ही किलकारियों ने दुनिया में आकर आशा की किरण जगाने का प्रयास किया है। इन नन्हे देवदूतों ने कोरोना के चरम में जन्म लेकर लोगों को जीवन चक्र चलते रहने का संदेश दिया।
मानो गर्भ में रहते हुए देखा मरीजों का दर्द
गर्भावस्था के दौरान कोरोना महामारी शुरू हुई थी। मैंने 8 महीने तक लगातार कोरोना के मरीजों के बीच ड्यूटी की। नौवें महीने में मैंने मातृत्व अवकाश लिया। मुझे ऐसा लगता है कि मेरे साथ गर्भ में पल रही मेरी बेटी अश्वी ने भी कोरोना के मरीजों का दुख दर्द देखा है। 29 सितंबर को मैंने उसे जन्म दिया। उसके आने से घर में खुशियों ने दस्तक दे दी है। -बबिता, नर्सिंग ऑफिसर, जीएमएसएच- 16
मेरे घर आई दो नन्हीं परियां
2020 में 21 मई का दिन मैं कभी नहीं भूल सकता। उस दिन मेरे घर दो नन्ही परियों ने जन्म लिया। पीजीआई में मेरी पत्नी की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी। उस वक्त हर तरफ संक्रमण का खौफ छाया हुआ था, लेकिन सच कहूं तो बेटियों के जन्म से हमारे पूरे परिवार में खुशियों की लहर दौड़ पड़ी। हमने उनका नाम हरनाल और हरगजल रखा है। हमारे पूरे परिवार ने दोनों बेटियों का पहला जन्मदिन 21 मई को मिलकर मनाया। -चंदीप सिंह, एडवोकेट
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कोरोना योद्धा माता-पिता के घर आया शहजादा
हम दोनों ने कोरोना महामारी की दौर में एक साथ ड्यूटी की है। मैं नर्सिंग ऑफिसर के तौर पर व मेरी पत्नी टेक्नीशियन के रूप में जीएमसीएच 32 में सेवाएं दे रहे हैं। 28 मार्च 2020 को मेरे बेटे वर्तिक का जन्म जीएमसीएच- 32 में हुआ था। उस समय परिवार के सभी लोग इस बात से डरे हुए थे कि संक्रमण के इस दौर में जाने क्या होगा। लेकिन ईश्वर ने हम कोरोना योद्धाओं पर कृपा बरसाई और सब कुछ सकुशल हो गया। हमने अपने बेटे का पहला जन्मदिन धूमधाम से मनाया है। -कुमोद व पूनम, (नर्सिंग ऑफिसर व टेक्नीशियन) जीएमसीएच- 32
लावित का हमारी जिंदगी में आना ईश्वर का नायाब तोहफा
महामारी के इस दौर में लावित का हमारी जिंदगी में आना ईश्वर का एक नायाब तोहफा ही है। 31 अक्तूबर 2020 को जीएमसीएच- 32 में मेरी पत्नी की डिलीवरी हुई। उस समय संक्रमण का क्रम तेजी से बढ़ रहा था। अस्पतालों में ओपीडी बंद थी। सिर्फ कोरोना के मरीजों का ही इलाज चल रहा था। लावित जन्म के कुछ दिनों तक बिल्कुल ठीक रहा, लेकिन फिर उसे इंफेक्शन हो गया। थोड़ी परेशानी हुई, लेकिन पीजीआई में इलाज के बाद वह बिल्कुल स्वस्थ है। उसके जन्म से हमारे घर में हर तरफ खुशियां ही खुशियां छाई हैं। सच कहूं तो आईसीयू में कोरोना के गंभीर मरीजों का इलाज कर घर लौटने पर उसका चेहरा देखकर मेरी सारी थकान दूर हो जाती है। -डबकेश कुमार, नर्सिंग ऑफिसर जीएमसीएच- 33
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मानो गर्भ में रहते हुए देखा मरीजों का दर्द
गर्भावस्था के दौरान कोरोना महामारी शुरू हुई थी। मैंने 8 महीने तक लगातार कोरोना के मरीजों के बीच ड्यूटी की। नौवें महीने में मैंने मातृत्व अवकाश लिया। मुझे ऐसा लगता है कि मेरे साथ गर्भ में पल रही मेरी बेटी अश्वी ने भी कोरोना के मरीजों का दुख दर्द देखा है। 29 सितंबर को मैंने उसे जन्म दिया। उसके आने से घर में खुशियों ने दस्तक दे दी है। -बबिता, नर्सिंग ऑफिसर, जीएमएसएच- 16
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मेरे घर आई दो नन्हीं परियां
2020 में 21 मई का दिन मैं कभी नहीं भूल सकता। उस दिन मेरे घर दो नन्ही परियों ने जन्म लिया। पीजीआई में मेरी पत्नी की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी। उस वक्त हर तरफ संक्रमण का खौफ छाया हुआ था, लेकिन सच कहूं तो बेटियों के जन्म से हमारे पूरे परिवार में खुशियों की लहर दौड़ पड़ी। हमने उनका नाम हरनाल और हरगजल रखा है। हमारे पूरे परिवार ने दोनों बेटियों का पहला जन्मदिन 21 मई को मिलकर मनाया। -चंदीप सिंह, एडवोकेट
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कोरोना योद्धा माता-पिता के घर आया शहजादा
हम दोनों ने कोरोना महामारी की दौर में एक साथ ड्यूटी की है। मैं नर्सिंग ऑफिसर के तौर पर व मेरी पत्नी टेक्नीशियन के रूप में जीएमसीएच 32 में सेवाएं दे रहे हैं। 28 मार्च 2020 को मेरे बेटे वर्तिक का जन्म जीएमसीएच- 32 में हुआ था। उस समय परिवार के सभी लोग इस बात से डरे हुए थे कि संक्रमण के इस दौर में जाने क्या होगा। लेकिन ईश्वर ने हम कोरोना योद्धाओं पर कृपा बरसाई और सब कुछ सकुशल हो गया। हमने अपने बेटे का पहला जन्मदिन धूमधाम से मनाया है। -कुमोद व पूनम, (नर्सिंग ऑफिसर व टेक्नीशियन) जीएमसीएच- 32
लावित का हमारी जिंदगी में आना ईश्वर का नायाब तोहफा
महामारी के इस दौर में लावित का हमारी जिंदगी में आना ईश्वर का एक नायाब तोहफा ही है। 31 अक्तूबर 2020 को जीएमसीएच- 32 में मेरी पत्नी की डिलीवरी हुई। उस समय संक्रमण का क्रम तेजी से बढ़ रहा था। अस्पतालों में ओपीडी बंद थी। सिर्फ कोरोना के मरीजों का ही इलाज चल रहा था। लावित जन्म के कुछ दिनों तक बिल्कुल ठीक रहा, लेकिन फिर उसे इंफेक्शन हो गया। थोड़ी परेशानी हुई, लेकिन पीजीआई में इलाज के बाद वह बिल्कुल स्वस्थ है। उसके जन्म से हमारे घर में हर तरफ खुशियां ही खुशियां छाई हैं। सच कहूं तो आईसीयू में कोरोना के गंभीर मरीजों का इलाज कर घर लौटने पर उसका चेहरा देखकर मेरी सारी थकान दूर हो जाती है। -डबकेश कुमार, नर्सिंग ऑफिसर जीएमसीएच- 33