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बिना मदद के कैसे चलेगा सदन?

Sat, 02 Nov 2013 06:39 PM IST
अमर उजाला, पंचकूला
अमर उजाला, पंचकूला Updated Sat, 02 Nov 2013 06:39 PM IST
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Child House depend on donation
पिछले तीन साल से सेक्टर-2 स्थित बाल सदन को सरकारी ग्रांट नहीं मिल रही है। आलम यह है कि लोगों के दिए दान से ही यहां रहने वाले बच्चों का लालन-पालन किया जा रहा है।
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इस बात का खुलासा उस वक्त हुआ जब सेशन जज एवं डिस्ट्रिक लीगल सर्विस अथॉरिटी (डीएलएसए) के चेयरमैन आरके सोंधी ने सदन का दौरा किया।

उनके साथ सीजेएम एवं डीएलएसए के सेक्रेटरी सुनील चौहान भी थे। बाल सदन के अलावा जितने भी अनाथालय चल रहे हैं, उन्हें भी ग्रांट नहीं मिल रही।


बाल सदन के निरीक्षण के दौरान सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त मिली, लेकिन इस बात पर हैरानी जताई गई कि जब पहले ग्रांट मिल रही थी तो अब तीन साल से सरकार की तरफ से ग्रांट क्यों नहीं मिल रही है।
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महिला एवं बाल कल्याण विभाग की जिम्मेदारी बनती है कि एनजीओ की तरफ से चलाए जा रहे अनाथालयों को ग्रांट दी जाए। पंचकूला में बाल सदन, बाल निकेतन व आशियाना के नाम से अनाथालय चल रहे हैं।
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बाल निकेतन की संचालिका मधु शर्मा ने बताया कि पिछले 25 साल से सरकार की तरफ से ग्रांट मिलती आ रही है, लेकिन पिछले तीन साल से विभाग पैसे जारी करने में आनाकानी कर रहा है, जबकि प्रति बच्चा एक हजार रुपये की ग्रांट मिलती है।


वहीं, आशियाना की जनरल सेक्रेटरी नीलम खुल्लर ने बताया कि ग्रांट नहीं मिलने की वजह से आशियाना चलाने में दिक्कत आ रही है। विभाग उन्हें पैसे ही जारी नहीं कर रहा है।

किसी एनजीओ को ग्रांट देने के लिए विभाग बाध्य नहीं करता है। पंचकूला में किसी अनाथालय को ग्रांट नहीं दी जा रही है।
- अनीता हुड्डा, प्रोग्राम ऑफिसर, आईसीडीएस
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