ट्रेन में लटके थे हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, अगर ये आदमी नहीं होता तो नहीं बचती जान
मनोहर लाल देर रात चलती ट्रेन पर काफी समय तक खिड़की पर लटके रहे, लेकिन किसी ने बोगी का दरवाजा व खिड़की खोलकर उन्हें भीतर खींचने की हिम्मत नहीं की। क्योंकि वह इलाका चंबल घाटी के डाकुओं का था। लेकिन रतिया के कालूराम ने हिम्मत दिखाते हुए रात के अंधेरे में न केवल मनोहर लाल को पहचाना, बल्कि उसने जान बचाई।
अपनी आपबीती रतिया में शुक्रवार को सीएम ने 'कनेक्ट टू पीपल' कैंपेन के तहत उस वक्त जनता के साथ साझा की, जब वे उसी वर्कर कालूराम के घर चाय पीने गए। कालूराम का कहना था कि वे फूले नहीं समा रहे हैं कि सीएम अचानक उनके घर पहुंचे और आज तक 23 साल पुरानी बात भी नहीं भूले।
चंबल की घाटी में रूकी थी ट्रेन
ये देखकर उनके सामने से जो बोगी गुजर रही थी, वह उसकी का दरवाजा पकड़कर चढ़ गए। लेकिन बोगी का दरवाजा और खिड़की बंद थी। ट्रेन चल रही थी और वे चलती ट्रेन में लटके हुए ही दरवाजे और खिड़की को जोर-जोर पीटकर अंदर मौजूद यात्रियों से दरवाजा खोलने की अपील कर रहे थे। अधिकतर यात्री सोए हुए थे। लेकिन छह यात्री अचानक उठे और उन्हें लटका देख डर गए। उन्हें लगा कोई डाकू व संदिग्ध लटका हुआ है। किसी ने हिम्मत नहीं की। लेकिन उसी बोगी में मौजूद कालूराम ने हिम्मत जुटाकर खिड़की खेालकर न केवल उन्हे पहचाना बल्कि फटाफट भीतर खींचा।
सीएम ने बताया कि जब वे लटके हुए थे तो बीच में एक नदी भी आई थी, एक बार तो मन में आया कि वे नदी में कूद जाएं,। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। ट्रेन के भीतर पहुंचने के बाद वे बहुत घबराए हुए थे। कालूराम ने उन्हें अपने कंबल में लपेटा और उन्हे सामान्य स्थिति में लाकर उनकी जान बचाई।