फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Chapter of terror end after killing of Khalistan Commando Force chief Paramjit Singh Panjwad

खत्म हुआ आतंक का अध्याय: पंजाब को दहलाना चाहता था परमजीत पंजवड़, लंबी है इसके गुनाहों की लिस्ट

Sat, 06 May 2023 10:00 PM IST
निवेदिता वर्मा सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 06 May 2023 10:00 PM IST
सार

1990 में केसीएफ की कमान संभालने के बाद परमजीत सिंह पंजवड़ ने खालिस्तानी आतंकवादी संगठन को काफी मजबूत किया और इसके लिंक कनाडा, यूके, जर्मनी व अमेरिका तक बनाए और अपना हेडक्वार्टर पाकिस्तान में लाहौर को बना लिया।

विज्ञापन
Chapter of terror end after killing of Khalistan Commando Force chief Paramjit Singh Panjwad
परमजीत पंजवड़ - फोटो : फाइल

विस्तार

खालिस्तान कमांडो फोर्स ( केसीएफ ) के मुखिया परमजीत सिंह पंजवड़ की लाहौर में हत्या के बाद आतंक का एक अध्याय समाप्त हो गया है। पाकिस्तान में कुछ ही समय में हरिंदर रिंदा की मौत के बाद पंजवड़ की हत्या से आईएसआई के मंसूबों पर पानी फिर गया है और एजेंसी की कमर टूट गई है। केएसीएफ ऐसा संगठन था, जिसका यूरोप में खासा प्रभाव था और वहां से फंड से लेकर ड्रग तस्करी तक के पैसे का इस्तेमाल पंजाब में आतंकवाद को जिंदा करने के लिए किया जा रहा था और इसका मुख्य कर्ताधर्ता परमजीत सिंह पंजवड़ था।

विज्ञापन


भारत में कई हत्याओं का जिम्मेदार था पंजवड़
1990 में केसीएफ की कमान संभालने के बाद परमजीत सिंह पंजवड़ ने खालिस्तानी आतंकवादी संगठन को काफी मजबूत किया और इसके लिंक कनाडा, यूके, जर्मनी व अमेरिका तक बनाए और अपना हेडक्वार्टर पाकिस्तान में लाहौर को बना लिया। पंजवड़ का संगठन खालिस्तान कमांडो फोर्स भारत में कई हत्याओं के लिए भी जिम्मेदार है, जिसमें 1995 में पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या भी शामिल है।
विज्ञापन


केएसीएफ का एजेंडा सीधा था कि बम व गोलियां मारकर हिंसा के माध्यम से खालिस्तान के एक सिख स्वतंत्र राज्य का निर्माण किया जाए। यही वजह है कि पंजवड़ ने मुख्य रूप से सीआरपीएफ , बीएसएफ और अन्य पुलिस बलों सहित भारतीय सुरक्षा बलों को निशाना बनाया । इसने उन हिंदुओं को निशाना बनाया जो खालिस्तान आंदोलन के खिलाफ थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


लाभ सिंह की मौत के बाद हुआ पंजवड़ का उदय
परमजीत सिंह पंजवड़ का उदय तब हुआ जब सुरक्षा बलों ने12 जुलाई 1988 को लाभ सिंह को मार डाला, जिसके बाद खालिस्तान कमांडो फोर्स की कमान थी । लाभ सिंह की मौत के बाद खालिस्तान कमांडो फोर्स वासन सिंह जफरवाल, परमजीत सिंह पंजवड़ और गुरजंट सिंह राजस्थानी के नेतृत्व वाले गुटों में विभाजित हो गई। 

जनरल अरुण वैद्य की हत्या का आरोप भी केसीएफ पर
केसीएफ इतना खूंखार संगठन माना जाता था जिसने 1984 के सिख विरोधी दंगों में उनकी संलिप्तता को लेकर ललित मास्कीन की हत्या की। बाद में जनरल अरुण वैद्य की हत्या की, जिन्होंने ऑपरेशन ब्लू स्टार में भारतीय सेना का नेतृत्व किया था। कांग्रेस (आई) के नेता औरजन दास की हत्या कर केएसीएफ का खौफ बढ़ाया। पंजाब पुलिस के महानिदेशक जूलियो फ्रांसिस रिबेरो पर आधुनिक हथियारों से जालंधर शहर में उनके मुख्यालय के अंदर हमला किया। जिसमें एक गार्ड मारा गया और रिबेरो, उसकी पत्नी और चार अन्य अधिकारी घायल हो गए। 

देश की सबसे बड़ी बैंक डकैती में शामिल था केसीएफ
केसीएफ के कई प्रमुख सदस्यों ने भारत की सबसे बड़ी बैंक डकैती में भाग लिया। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के 5.7 करोड़ रुपये लूटे गए। जून 1991 में उत्तर-पश्चिमी पंजाब में एक पैसेंजर ट्रेन पर हुए हमले में लगभग पचास लोग मारे गए थे, जिसकी जिम्मेदारी केसीएफ ने ली थी और उस समय कमांड पंजवड़ के हाथ थी। एजेंसियों के मुताबिक, उस समय पंजवड़ पाकिस्तान पहुंच चुका था। सितंबर 1993 में नई दिल्ली में भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष मनिंदरजीत सिंह बिट्टा को निशाना बनाकर बम विस्फोट किया गया जिसमें आठ लोग मारे गए। इसमें भी केसीएफ का हाथ था। खालिस्तान कमांडो फोर्स पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या में शामिल था और इसका पूरा तानाबान पाकिस्तान में केसीएफ के मुख्यालय में बुना गया था।

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को मारने की योजना हो गई थी विफल
2008 में, पंजाब पुलिस ने डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को मारने के लिए केसीएफ के प्रयास को विफल कर दिया था। जिसकी पूरी योजना पंजवड़ ने तैयार की थी।चंडीगढ़ में 30 जून 1999 में पासपोर्ट कार्यालय के पास जो बम ब्लास्ट हुआ था, वो पंजवड़ ने ही कराया था. उस बम ब्लास्ट में 4 लोग जख्मी हो गए थे, जबकि कई गाड़ियों को भी नुकसान पहुंचा था. बम को स्कूटर की डिग्गी में रखा गया था।


परमजीत सिंह पंजवड़ 2008 तक केसीएफ के शेष गुट के प्रमुख बना रहा और उस समय भारत में शीर्ष 10 सर्वाधिक वांछित अपराधियों में से उनका नाम था। पंजवड़ ने अपने अमेरिका में जबरदस्त लिंक बनाकर रखे थे। कुलबीर सिंह को अमेरिका ने भारत को सौंपा था, जो दस संगीन मामलों में वांछित था और पंजवड़ का करीबी था। एजेंसियों के मुताबिक, कनाडा से काफी फंड पंजवड़ को मुहैय्या करवाया जाता था। भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने वर्ष 2020 में 9 आतंकियों की लिस्ट जारी की, जिसमें पंजवड़ का नाम शामिल था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed