कुतुबमीनार से ऊंची मीनार देखनी हैं तो यहां आइए

अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 24 Oct 2013 04:55 PM IST
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 Chaparchiri is the Best tourist place of Chandigarh

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मोहाली के नजदीक गांव चप्पड़चिड़ी की फिजाओं में आज भी बहादुरी की दास्तां तैर रही है। 12 मई 1710 को बाबा बंदा सिंह बहादुर ने इसी सरजमीं पर सरहिंद के सूबेदार वजीर खान को मौत के घाट उतारा था।
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उसके बाद सरहिंद फतेह करके पहले खालसा राज्य की स्थापना की थी। यह इंकलाबी घटना थी, पहला राज था, जहां काश्तकारों को जमीन की मिल्कियत का हक दिया गया। यह पहली राजसत्ता थी, जो राज नहीं, सेवा पर आधारित थी।
चप्पड़चिड़ी की मिट्टी और सरकारी दस्तावेजों में दफन इस बहादुरी की दास्तां कुछ बुद्धिजीवियों और स्थानीय लोगों की पहल से लोगों के सामने आई। राज्य सरकार ने इसकी अहमियत समझी।
जिसके बाद चप्पड़चिड़ी में बाबा बंदा सिंह बहादुर जंगी यादगार की स्थापना की गई। 30 नवंबर, 2011 को देश भर की नामी शख्सीयतों व संत समाज की मौजूदगी में मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने यादगार को जनता को समर्पित किया।

कुतुब-मीनार से भी ऊंचा है फतेह-बुर्ज

Chaparchiriउद्घाटन के साथ ही चप्पड़चिड़ी यादगार एक टूरिस्ट स्पॉट के रूप में विकसित होती गई। यहां की सबसे बड़ी खासियत विशाल फतेह-बुर्ज है, जोकि कुतुब-मीनार से भी ऊंचा है और देश का सबसे बड़ा टावर है।

इसमें लिफ्ट लगने का काम भी जल्द पूरा हो जाएगा, जिसके बाद लोग ऊपर से नीचे की दुनिया देख सकेंगे। बीस एकड़ में विकसित की गई इस यादगार में बाबा बंदा सिंह बहादुर और उनके पांच जरनैलों के विशाल बुत हैं, जिन्हें छोटी-छोटी पहाड़ियों पर स्थापित किया गया है।

एक ओपन एयर थिएटर है और कैफेटेरिया भी है। इसके दरवाजे आदि पुराने स्टाइल में बनाए गए हैं, जो इसे हेरिटेज लुक देते हैं। यहां एक वाटर बॉडी है, जिसमें बुर्ज व बुतों की आकर्षक छवियां दिखती हैं।

रात को लाइटिंग के बाद यहां का नजारा ही अलग होता है। टूरिज्म विभाग द्वारा यहां पुरुष व महिला गाइड नियुक्त किए हैं। जोकि आने वालों को ऐतिहासिक विरासत से रूबरू कराते हैं। रोजाना यहां करीब पांच सौ टूरिस्ट आ रहे हैं। वीकेंड पर संख्या एक हजार तक भी पहुंच जाती है।

पांच सिख जरनैलों का इतिहास


1. भाई आली सिंहः गांव सलौदी के रहने वाले भाई आली सिंह वजीर खान की फौज में फौजदार थे। जब बाबा बंदा सिंह बहादुर पंजाब पहुंचे तो वह अपने साथियों समेत उनकी फौज में शामिल हो गए। उनके साथ ही नौ जून 1716 को शहीद हुए।

2. भाई माली सिंहः यह भाई आली सिंह के भाई थे। इन्हें बाबा बंदा सिंह बहादुर ने फौज के एक दस्ते का कमांडर बनाया। उन्होंने भी बाबा जी के साथ ही शहादत दी।

3. भाई फतेह सिंहः मालवा के भाई फतेह सिंह ने चप्पड़चिड़ी की जंग में अहम भूमिका निभाई। गांव चक्क फतेह सिंह वाला उनके नाम पर ही बसाया गया।

4. भाई राम सिंहः मीरापुर पट्टी गांव के रहने वाले भाई राम सिंह दिलेर जरनैल थे। उन्होंने भी बाबा बंदा सिंह बहादुर के साथ शहीदी प्राप्त की।

5. भाई बाज सिंहः भाई बाज सिंह एक महान योद्धा थे। बाबा बंदा सिंह बहादुर ने उन्हें सरहिंद का गवर्नर बनाया था। वह भी बाबाजी के साथ ही शहीद हुए थे।

कैसे पहुंच सकते हैं आप?

- खरड़-लांडरां रोड से नई सड़क बनाई गई है।
- मोहाली से सेक्टर 91 होते हुए सड़क मार्ग है।

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