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Sawan 2024: भोलेनाथ के प्रिय मास सावन में बन रहा है चंद्र महाअधियोग, 50 वर्षों के बाद बन रहा है यह योग

Wed, 17 Jul 2024 02:07 PM IST
निवेदिता वर्मा नीरज कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
नीरज कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 17 Jul 2024 02:07 PM IST
सार

सावन का शुभारंभ 22 जुलाई दिन सोमवार से होगा। श्रावण का प्रारंभ यानि प्रतिपदा 21 जुलाई दिन रविवार को दोपहर बाद 3 बजकर 48 मिनट से शुरू हो रहा है। यह अगले दिन 22 जुलाई दिन सोमवार को दोपहर 1 बजकर 12 मिनट पर समाप्त हो रहा है।

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Chandramahadhiyog is being formed in Sawan 2024
Sawan 2024 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सावन का महीना भगवान शिव का प्रिय मास है। इस बार सावन में चंद्रमहाधियोग बन रहा है। यह दुर्लभ योग 50 वर्षों के बाद बन रहा है। खास बात यह इस सावन का शुभारंभ सोमवार से और अंत भी सोमवार से हो रहा है। है कि इस योग में भगवान शिव को रोज 108 बेलपत्र से पूजन किया जाए तो सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। 
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सेक्टर 30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख और कर्मकांडी बीरेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि सावन का शुभारंभ 22 जुलाई दिन सोमवार से होगा। श्रावण का प्रारंभ यानि प्रतिपदा 21 जुलाई दिन रविवार को दोपहर बाद 3 बजकर 48 मिनट से शुरू हो रहा है। यह अगले दिन 22 जुलाई दिन सोमवार को दोपहर 1 बजकर 12 मिनट पर समाप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि 22 जुलाई की सुबह 5 बजकर 38 मिनट पर सूर्योदय है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कहा गया है कि दिन का प्रारंभ सूर्योदय काल से होता है। इसलिए 22 जुलाई से सावन का शुभारंभ होगा।
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उन्होंने कहा कि सूर्योदय के समय कर्क लग्न है। कर्क का स्वामी चंद्रमा है। नक्षत्र श्रवण है। चंद्रमा से सप्तम और अष्टम स्थान में शुभ ग्रह है। चंद्रमा से सप्तम में शुक्र और अष्टम में बुध होने के कारण और दिन सोमवार और श्रवण नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है। ये तीनों योग होने के कारण चंद्रमहाधियोग बन रहा है।
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इस प्रकार करें पूजा यह होगा लाभ....

देवालय यूपजक परिषद के अध्यक्ष और सेक्टर 18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ लाल बहादुर दुबे ने बताया कि इस योग में भगवान शिव की पूजा करने से हृदय की बीमारी और कफ की बीमारी में लाभ होगा। यदि किसी की कुंडली में चंद्रमा नीच का हो, मारकेश हो तो उसकी शांति के लिए कुशा के जल से अभिषेक करें। वाहन सुख के लिए दही से, व्यापार में लाभ और नौकरी में प्रमोशन के लिए गन्ना के रस से, मृत्यु के भय को दूर करने के लिए शहद और घी से अभिषेक कीजिए। संतान सुख के लिए गाय का दूध से और विद्या प्राप्ति के दूर्वा चढ़ाना चाहिए।

दो अगस्त को होगी सावन की शिवरात्रि

सावन की त्रयोदशी 1 अगस्त दिन वीरवार को है। श्रावण की शिवरात्रि 2 अगस्त को है। एक अगस्त दिन वीरवार को दोपहर बाद 3 बजकर 29 मिनट पर द्वादशी तिथि समाप्त होकर त्रयोदशी तिथि प्रारंभ हो रहाहहै। सूर्यास्त शाम 7 बजकर 13 मिनट पर है। सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक प्रदोष काल है। यदि त्रयोदशी प्रदोष काल में हो तो उसी दिन प्रदोष व्रत किया जाता है।


2 अगस्त दिन शुक्रवार को चतुर्दशी तिथि दोपहर 3 बजकर 28 बजे प्रारंभ होता है। यह 3 अगस्त को दोपहर 3 बजकर 51 मिनट पर समाप्त हो रहा है। सूर्यास्त के बाद जो आठवां मुहूर्त होता है उसी में महाशिवरात्रि मनाई जाती है। इसलिए सावन की शिवरात्रि 2 अगस्त को होगी। नागपंचमी 9 अगस्त दिन शुक्रवार को मनाई जाएगी।
 
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