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ट्राइसिटी में सिविल सर्विसेज की परीक्षा में टॉपर रही चंद्रज्योति पंजाब में शिक्षा के क्षेत्र में करना चाहती है सुधार
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चंडीगढ़। सिविल सर्विसेज की परीक्षा में ऑल इंडिया में 28वां रैंक हासिल कर ट्राइसिटी में टॉपर रहीं चंद्रज्योति की दिली इच्छा है कि पंजाब रीजन में सेवाओं का मौका मिले। यहां सेवाएं देकर वह शिक्षा के क्षेत्र में सुधार करना चाहती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था और महिलाओं की समस्याएं ने उन्हें आईएएस बनने के लिए प्रेरित किया।
भवन विद्यालय सेक्टर- 27 से से 12वीं कर चुकीं और मोहाली की रहने वाली चंद्रज्योति ने बताया कि पहले ही बार में सिविल सर्विसेज की परीक्षा उत्तीर्ण की है। चंद्रज्योति के पिता दलबारा सिंह आर्मी से रिटायर्ड डॉक्टर और माता मीणा सिंह गृहणी हैं।
मां के हौसले और सेल्फ स्टडी ..
चंद्रज्योति ने बताया कि 2018 में दिल्ली से इतिहास में ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने सिविल सर्विसेज के लिए तैयारी शुरू कर दी थी। आईएएस बनने का बचपन से ही सपना था, इसलिए उन्होंने स्कूल से ही अखबार पढ़ने की आदत डाल ली थी। चंद्रज्योति ने बताया उन्होंने दिल्ली में रहकर सेल्फ स्टडी की। इस दौरान कई बार उनका हौसला कमजोर पड़ जाता था कि वे नहीं कर पाएगी। ऐसे में उनकी माता उनके लिए हौसला बनी। वे दिल्ली जाकर कई दिन उनके साथ रहती और उन्हें अपने सपने को पूरा करने के लिए प्रेरित करती। चंद्रज्योति ने बताया प्रिलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू हर परीक्षा की घड़ी में उनकी मां उनके पास थी।
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ऐसे चढ़ी सफलता की सीढ़ी
1. रोजाना अखबार पढ़ना।
2. करंट अफेयर्स पर ज्यादा फोकस और रिवीजन।
3. बेसिक्स के लिए एनसीईआरटी की बुकें पढ़ी।
4. सभी विषयों के लिए लिमिटेड किताबें पढ़ी
5. प्रिलिम्स के लिए मॉक टेस्ट पर ज्यादा फोकस
6. मैंस में आंसर राइटिंग पर किया ज्यादा फोकस
7. कोचिंग सेंटर घूमने की बजाय सेल्फ स्टडी पर दिया ध्यान
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भवन विद्यालय सेक्टर- 27 से से 12वीं कर चुकीं और मोहाली की रहने वाली चंद्रज्योति ने बताया कि पहले ही बार में सिविल सर्विसेज की परीक्षा उत्तीर्ण की है। चंद्रज्योति के पिता दलबारा सिंह आर्मी से रिटायर्ड डॉक्टर और माता मीणा सिंह गृहणी हैं।
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मां के हौसले और सेल्फ स्टडी ..
चंद्रज्योति ने बताया कि 2018 में दिल्ली से इतिहास में ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने सिविल सर्विसेज के लिए तैयारी शुरू कर दी थी। आईएएस बनने का बचपन से ही सपना था, इसलिए उन्होंने स्कूल से ही अखबार पढ़ने की आदत डाल ली थी। चंद्रज्योति ने बताया उन्होंने दिल्ली में रहकर सेल्फ स्टडी की। इस दौरान कई बार उनका हौसला कमजोर पड़ जाता था कि वे नहीं कर पाएगी। ऐसे में उनकी माता उनके लिए हौसला बनी। वे दिल्ली जाकर कई दिन उनके साथ रहती और उन्हें अपने सपने को पूरा करने के लिए प्रेरित करती। चंद्रज्योति ने बताया प्रिलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू हर परीक्षा की घड़ी में उनकी मां उनके पास थी।
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ऐसे चढ़ी सफलता की सीढ़ी
1. रोजाना अखबार पढ़ना।
2. करंट अफेयर्स पर ज्यादा फोकस और रिवीजन।
3. बेसिक्स के लिए एनसीईआरटी की बुकें पढ़ी।
4. सभी विषयों के लिए लिमिटेड किताबें पढ़ी
5. प्रिलिम्स के लिए मॉक टेस्ट पर ज्यादा फोकस
6. मैंस में आंसर राइटिंग पर किया ज्यादा फोकस
7. कोचिंग सेंटर घूमने की बजाय सेल्फ स्टडी पर दिया ध्यान