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Chandigarh News: चंडीगढ़ के पुराने स्लाटर हाउस का होगा आधुनिकीकरण
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चंडीगढ़। नगर निगम ने इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 स्थित मौजूदा मल्टीस्पीशीज स्लाटर हाउस के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसके लिए करीब 48.88 करोड़ रुपये की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की गई है।
वर्ष 2000 में स्थापित यह स्लाटर हाउस अब मौजूदा जरूरतों के अनुरूप नहीं रह गया है। यहां वर्ष 2008 में अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र (ईटीपी) लगाया गया था। समय के साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, पशु कल्याण और पर्यावरण संरक्षण के मानकों में बड़े बदलाव आए हैं। मौजूदा ढांचा सीपीसीसी, एनजीटी और सरकारी पर्यावरण मानकों पर पूरी तरह खरा नहीं उतर रहा, इसलिए इसका आधुनिकीकरण जरूरी माना गया है। परियोजना के तहत स्लाटर हाउस में आधुनिक मशीनें और वैज्ञानिक प्रक्रियाएं लागू की जाएंगी।
इसमें स्टनिंग, शैकलिंग, डीहाइडिंग और ईविसरेशन जैसी प्रक्रियाओं के लिए नई मशीनरी लगाई जाएगी। साथ ही गंदे पानी के उपचार के लिए आधुनिक ईटीपी, ठोस अपशिष्ट के सुरक्षित निपटान के लिए रेंडरिंग प्लांट तथा अन्य जरूरी बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जाएगा। परियोजना के अनुसार सिविल और स्ट्रक्चरल कार्यों पर 14.43 करोड़ रुपये, जबकि मशीनरी और मुख्य संयंत्र पर 33.02 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके अलावा 3 प्रतिशत आकस्मिक खर्च जोड़कर कुल लागत 48.88 करोड़ रुपये आंकी गई है।
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सालाना 1.84 करोड़ पशु-पक्षियों की प्रोसेसिंग क्षमता होगी...
प्रस्तावित परियोजना के तहत स्लाटर हाउस की क्षमता को आधुनिक मानकों के अनुरूप बढ़ाते हुए सालाना करीब 1.84 करोड़ पशु-पक्षियों की प्रोसेसिंग का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना के अनुसार संयंत्र को वर्ष में 300 कार्य दिवस मानकर डिजाइन किया गया है। इसमें प्रतिदिन 1200 भेड़-बकरियों, 100 सूअरों और 60 हजार पोल्ट्री पक्षियों के प्रसंस्करण की क्षमता प्रस्तावित की गई है। कच्चा माल चंडीगढ़ के साथ-साथ हरियाणा और पंजाब के आसपास के शहरों से उपलब्ध कराया जाएगा। नगर निगम के अनुसार इस परियोजना का काम ई-टेंडरिंग के माध्यम से अनुभवी एजेंसियों को सौंपा जाएगा। कार्य आवंटन के बाद परियोजना को पूरा करने में 24 से 30 महीने लगने का अनुमान है। मेयर सौरभ जोशी का कहना है कि चंडीगढ़ की तरक्की के लिए मेहनत कर रहे हें। रुके हुए काम को पूरा करना हमारा फर्ज है।
प्रस्तावित प्रसंस्करण क्षमता
श्रेणी प्रतिदिन क्षमता वार्षिक क्षमता
भेड़/बकरी 1200 360000
सूअर 100 30000
पोल्ट्री 60000 1,80,00,000
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वर्ष 2000 में स्थापित यह स्लाटर हाउस अब मौजूदा जरूरतों के अनुरूप नहीं रह गया है। यहां वर्ष 2008 में अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र (ईटीपी) लगाया गया था। समय के साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, पशु कल्याण और पर्यावरण संरक्षण के मानकों में बड़े बदलाव आए हैं। मौजूदा ढांचा सीपीसीसी, एनजीटी और सरकारी पर्यावरण मानकों पर पूरी तरह खरा नहीं उतर रहा, इसलिए इसका आधुनिकीकरण जरूरी माना गया है। परियोजना के तहत स्लाटर हाउस में आधुनिक मशीनें और वैज्ञानिक प्रक्रियाएं लागू की जाएंगी।
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इसमें स्टनिंग, शैकलिंग, डीहाइडिंग और ईविसरेशन जैसी प्रक्रियाओं के लिए नई मशीनरी लगाई जाएगी। साथ ही गंदे पानी के उपचार के लिए आधुनिक ईटीपी, ठोस अपशिष्ट के सुरक्षित निपटान के लिए रेंडरिंग प्लांट तथा अन्य जरूरी बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जाएगा। परियोजना के अनुसार सिविल और स्ट्रक्चरल कार्यों पर 14.43 करोड़ रुपये, जबकि मशीनरी और मुख्य संयंत्र पर 33.02 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके अलावा 3 प्रतिशत आकस्मिक खर्च जोड़कर कुल लागत 48.88 करोड़ रुपये आंकी गई है।
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सालाना 1.84 करोड़ पशु-पक्षियों की प्रोसेसिंग क्षमता होगी...
प्रस्तावित परियोजना के तहत स्लाटर हाउस की क्षमता को आधुनिक मानकों के अनुरूप बढ़ाते हुए सालाना करीब 1.84 करोड़ पशु-पक्षियों की प्रोसेसिंग का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना के अनुसार संयंत्र को वर्ष में 300 कार्य दिवस मानकर डिजाइन किया गया है। इसमें प्रतिदिन 1200 भेड़-बकरियों, 100 सूअरों और 60 हजार पोल्ट्री पक्षियों के प्रसंस्करण की क्षमता प्रस्तावित की गई है। कच्चा माल चंडीगढ़ के साथ-साथ हरियाणा और पंजाब के आसपास के शहरों से उपलब्ध कराया जाएगा। नगर निगम के अनुसार इस परियोजना का काम ई-टेंडरिंग के माध्यम से अनुभवी एजेंसियों को सौंपा जाएगा। कार्य आवंटन के बाद परियोजना को पूरा करने में 24 से 30 महीने लगने का अनुमान है। मेयर सौरभ जोशी का कहना है कि चंडीगढ़ की तरक्की के लिए मेहनत कर रहे हें। रुके हुए काम को पूरा करना हमारा फर्ज है।
प्रस्तावित प्रसंस्करण क्षमता
श्रेणी प्रतिदिन क्षमता वार्षिक क्षमता
भेड़/बकरी 1200 360000
सूअर 100 30000
पोल्ट्री 60000 1,80,00,000