चंडीगढ़: 40 साल बाद कॉलोनी नंबर-4 खाली, 2500 अवैध मकान ध्वस्त, 12 घंटे तक चला ध्वस्तीकरण अभियान
शनिवार को नगर निगम की गाड़ियां लगाकर प्रशासन ने लोगों का सामान उन्हें आवंटित घरों में ले जाने के लिए लगा दीं। कुछ लोग निजी वाहनों से भी अपना सामान ले गए। कुछ लोगों ने बताया कि परिवार के सदस्य बाहर गए हैं। उनके आते ही रविवार सुबह उन लोगों ने भी घर खाली कर दिया।
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चंडीगढ़ प्रशासन ने रविवार को लगातार 12 घंटे अभियान चलाकर इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 स्थित 40 साल साल पुराने कॉलोनी नंबर-4 में बने 2500 अवैध मकानों को ध्वस्त कर दिया। इसके साथ ही शहर के बीचोंबीच 65 एकड़ भूमि को खाली करा लिया, जिसकी कीमत लगभग दो हजार करोड़ रुपये आंकी गई है।
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान पुलिस व अन्य विभागों के दो हजार कर्मचारी तैनात रहे। इनमें 10 कार्यकारी मजिस्ट्रेट भी शामिल थे। यह भूमि वन विभाग और संपदा विभाग की है। बता दें कि चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) ने दो दिन पहले से ही यहां से लोगों को आवंटित फ्लैटों में स्थानांतरित करना शुरू कर दिया था।
कॉलोनी के ज्यादातर लोग यहां से जा चुके थे। बचे हुए लोग सुबह अपना सामान लेकर फ्लैटों की ओर निकल गए। जिनको फ्लैट नहीं मिले हैं, वह दूसरे ठिकाने की तरफ निकल गए। ऐसे में खाली कॉलोनी को तोड़ना प्रशासन के लिए मुश्किल नहीं था। सुबह पांच बजे ही अतिक्रमण हटाओ दस्ता कॉलोनी नंबर चार में पहुंच गया और शांति के साथ ध्वस्तीकरण कर 65 एकड़ भूमि को खाली करा लिया।
मूर्तियों को विधि विधान से बुड़ैल जेल पहुंचाया
कॉलोनी के अंदर लगभग 10 से 12 मंदिर, एक गुरुद्वारा साहिब और एक मस्जिद बनी हुई थी। गुरुद्वारा साहिब और मस्जिद को शनिवार को ही खाली करा लिया गया था। उसके बाद रविवार सुबह बुड़ैल जेल से पंडितों को बुलाकर पूरे विधि विधान के साथ देवी-देवताओं की मूर्तियों को बुड़ैल जेल स्थित मंदिर में स्थापित करवाया गया।
500 मीटर के दायरे में आवाजाही बंद, यातायात प्रभावित
पुलिस ने सुबह सबसे पहले हल्लोमाजरा चौक से एसडीएम (पूर्व) के दफ्तर तक का रास्ता बैरिकेड लगाकर बंद कर दिया। कुछ लोगों ने रास्ते से जाने का प्रयास किया तो पुलिस ने डीसी के आदेश का हवाला देते हुए रोक दिया। इस दौरान 500 मीटर के दायरे में लोगों के आने और जाने पर भी पूरी सख्ती थी। सुबह जो लोग सामान लेकर जा रहे थे, सिर्फ उन्हें ही आने-जाने की अनुमति थी।
फैक्ट्रियों में भी रहा काम प्रभावित
कॉलोनी नंबर चार में रहने वाले ज्यादातर लोग इंडस्ट्रियल एरिया में बनी फैट्रियों में काम करते हैं। जिन लोगों को फ्लैट आवंटित हो गए हैं, वह अपना सामान शिफ्ट करने में व्यस्त रहे, वहीं जिनको आवास नहीं मिला है, वह नया ठिकाना तलाश करते दिखे। कई लोगों के सामान सड़क किनारे पड़े थे। उधर, फैक्ट्रियों में ज्यादातर मजदूर नहीं पहुंचे। इस कारण काम प्रभावित रहा। कॉलोनी नंबर-4 के हटने से अब फैक्ट्री वालों को भी समस्या होगी, क्योंकि काम करने वाले लोग दूर से आएंगे तो उनका वेतन भी बढ़ाना होगा।
एक दिन पहले ही काट दिया बिजली-पानी का कनेक्शन
आदेश के अनुसार, प्रशासन ने बिजली विभाग और नगर निगम से कहकर कॉलोनी में एक दिन पहले ही बिजली व पानी का कनेक्शन काट दिया था। शनिवार को भी लोगों ने अंधेरे में ही काम चलाया, जो लोग फ्लैटों में जा रहे थे उन्होंने टॉर्च के सहारे अपना मकान खाली कराया। इस दौरान पुलिस और निगम के कर्मचारी भी लोगों को टॉर्च दिखाकर मदद करते दिखे।
आठ साल पहले खाली कराया था कॉलोनी नंबर-5, हुआ था विरोध
आठ साल पहले तत्कालीन डीसी मोहम्मद शाहीन के नेतृत्व में प्रशासन ने कॉलोनी नंबर-5 को खाली करवाया था। इसे लेकर काफी विरोध भी हुआ था। तब यहां लगभग 35 हजार लोग रहते थे। प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए लोगों को स्थानांतरित किया और लगभग 37 एकड़ भूमि को खाली कराया था। इस बार प्रशासन ने सावधानी बरतते हुए लोगों को पहले स्थानांतरित किया फिर कार्रवाई की, जिससे किसी भी प्रकार का कोई हंगामा नहीं हुआ।