चंडीगढ़: कॉलोनी नंबर-4 को तोड़ने की तैयारी में प्रशासन, कई लोग भुगत रहे अधिकारियों की गलती की सजा
कालोनी में करीब 200 से ज्यादा लोग ऐसे हैं, जिनके पास वर्ष 2006 के बायोमीट्रिक सर्वे के दस्तावेज हैं। उन्हें चिंता सता रही है कि कॉलोनी तोड़ने से पहले उन्हें अन्य किसी जगह विस्थापित किया जाएगा या नहीं। कॉलोनी में मकान टूटने के डर से लोगों को रात में नींद नहीं आ रही है।
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चंडीगढ़ यूटी प्रशासन ने कॉलोनी नंबर-4 को तोड़ने की तैयारी शुरू कर दी है। दो महीने का नोटिस पूरा हो चुका है। प्रशासन ने शनिवार तक का समय दिया है, लेकिन कॉलोनी में अब भी ऐसे कई लोग है, जो प्रशासन की गलती की सजा भुगत रहे हैं। कुछ लोग हैं, जिनके मकान के पैसे भी जमा हो गए हैं, वह हाउसिंग बोर्ड के ड्रॉ का इंतजार कर रहे हैं।
कुछ एस्टेट ऑफिस की तरफ से की गई गलतियों की वजह से मकान के इंतजार में बैठे हैं। करीब 200 से ज्यादा लोग ऐसे हैं, जिनके पास वर्ष 2006 के बायोमीट्रिक सर्वे के दस्तावेज हैं। उन्हें चिंता सता रही है कि कॉलोनी तोड़ने से पहले उन्हें अन्य किसी जगह विस्थापित किया जाएगा या नहीं। कॉलोनी में मकान टूटने के डर से लोगों को रात में नींद नहीं आ रही है।
लोग प्रशासन पर वादाखिलाफी का आरोप लगा रहे हैं, क्योंकि पहले प्रशासन के अधिकारियों ने कहा था कि जिन लोगों के पास बायोमीट्रिक सर्वे व अंगूठे के निशान की कॉपी मौजूद है, लेकिन किन्हीं कारणों से उन्हें पुनर्वास योजना के तहत मलोया में मकान नहीं मिला है तो उन्हें किफायती किराया आवासीय योजना के तहत 3000 रुपये प्रति महीने किराए पर मलोया में मकान दिया जाएगा लेकिन अब सभी को कॉलोनी से जाने के लिए कह दिया गया है।
मकान के पैसे भी जमा, सीएचबी नहीं निकाल रहा ड्रॉ
कॉलोनी नंबर-4 में परिवार सहित रहने वाले बिंदादीन ने बताया कि उनके सभी दस्तावेज पूरे हैं। एस्टेट ऑफिस ने भी फाइल को पास कर दिया है। मकान के लिए जो सिक्योरिटी मनी होती है, वो भी जमा करा दी है। अब सिर्फ चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने ड्रॉ निकालना है, जिसमें उन्हें मकान नंबर अलॉट होगा। बताया कि इस इंतजार में दो महीने हो गए हैं, लेकिन सीएचबी ने ड्रॉ नहीं निकाला। अब अगर कुछ दिन में कॉलोनी तोड़ दी जाएगी, तो वे कहां जाएंगे। गलती सीएचबी की है, लेकिन रात की नींद उनके पूरे परिवार की उड़ी हुई है।
मकान अलॉट होने के बाद कह दिया, नहीं मिल रही फोटो
कॉलोनी नंबर-4 में पिछले 40 साल से रहने वाले बालचंद ने बताया कि 2006 में सर्वे हुआ और पत्नी के साथ फोटो ली गई। सभी दस्तावेज दिखाने के बाद फाइल पास हो गई और जनवरी में उन्हें मलोया में मकान नंबर-2523 आवंटित हो गया। जब उन्होंने बिजली-पानी के कनेक्शन के लिए आवेदन किया तो अधिकारी कहने लगे कि फॉर्म पर और वर्तमान में उनकी फोटो नहीं मैच हो रही है। यह कहते हुए जो मकान मिल गया था, उसे रद्द कर दिया। जबकि इतने वर्षों से सभी तरह की जांच की बाद उन्हें मकान अलॉट हुआ। ये पूरी तरह से अन्याय है।
अन्य किसी के साथ जोड़ दिया मकान, कई सुनवाई के बाद भी नहीं अलॉट हुआ मकान
करीब 40 साल से कॉलोनी नंबर-4 में रह रहीं आशमीन ने बताया कि 2006 में सर्वे हुआ। उनके पास सभी दस्तावेज मौजूद हैं। फाइल पास हो गई और मकान के पैसे भी जमा करा दिए। इस बीच किसी ने उसी मकान में रहने का दावा कर दिया तो एस्टेट ऑफिस ने दोनों को एक साथ जोड़ दिया। इसके खिलाफ वह सभी अधिकारियों से मिलीं। वित्त सचिव की कोर्ट में सुनवाई हुई। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मौके पर जाकर देखें। कई बार अधिकारी जांच के लिए घर आए। पड़ोसियों के बयान लिए। सभी ने यही कहा कि जिसने दावा किया है वह पूरी कॉलोनी में कहीं नहीं रहती है। अधिकारी ने भी मकान देने के आदेश जारी कर दिए हैं लेकिन अब तक उन्हें मकान नहीं अलॉट हुआ है।
प्रशासन ने कॉलोनी में मौजूद सभी लोगों को मौका दिया है। ज्यादातर लोगों को मकान अलॉट कर दिया गया है। अगर कुछ लोग ऐसे हैं, जिनके पास बायोमीट्रिक सर्वे व सभी दस्तावेज मौजूद हैं, तो उनकी सुनवाई की जाएगी। मैंने डीसी को निर्देश दिया है कि वो ऐसे कुछ मामलों को देखें और उसके अनुसार ही फैसला लें। हालांकि जिन्होंने अतिक्रमण किया है, उन्हें जाना होगा। - धर्मपाल, सलाहकार, यूटी प्रशासक