पहल: इंटिग्रेटेड रोड एक्सीडेंट डेटाबेस एप परियोजना लागू करने वाला पहला केंद्र शासित प्रदेश बना चंडीगढ़
प्रशासन ने पुलिस, स्वास्थ्य, इंजीनियरिंग/राजमार्ग और परिवहन विभागों के नोडल अधिकारियों के अलावा एसएसपी ट्रैफिक को इस परियोजना का समग्र नोडल अधिकारी बनाया है। परियोजना के प्रमुख हितधारक विभाग पुलिस, परिवहन, इंजीनियरिंग, राजमार्ग और स्वास्थ्य हैं। यह एप एनआईसी ने तैयार किया है।
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चंडीगढ़ यूटी प्रशासन ने इंटिग्रेटेड रोड एक्सीडेंट डेटाबेस (आईआरएडी) एप परियोजना को शहर में लागू कर दिया है। यह देश में सड़क सुरक्षा में सुधार के उद्देश्य से सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की एक पहल है। शुक्रवार को प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल ने इसका उद्घाटन किया। उन्होंने फील्ड अधिकारियों के लिए यूजर मैनुअल का भी अनावरण किया। परियोजना को लागू करने वाला चंडीगढ़ पहला केंद्र शासित प्रदेश बन गया है।
परियोजना के लागू होने के बाद शहर के किस स्पॉट पर कितने हादसे हुए, कितनों की मौत हुई, कितने घायल हुए और हादसे की वजह क्या रही। इन सभी तथ्यों की जानकारी एक क्लिक पर मिल जाएगी। कई विभाग होने से आंकड़े मिलने में समस्या न आए, इसके लिए अन्य मोबाइल एप जैसे सीसीटीएनएस, वाहन, सारथी आदि को भी आईआरएडी एप से जोड़ा गया है। शहर के अधिकारियों को आईआरएडी एप से परिचित कराने के लिए प्रशिक्षण भी दिया गया। प्रशासन ने पुलिस, स्वास्थ्य, इंजीनियरिंग/राजमार्ग और परिवहन विभागों के नोडल अधिकारियों के अलावा एसएसपी ट्रैफिक को इस परियोजना का समग्र नोडल अधिकारी बनाया है।
परियोजना के प्रमुख हितधारक विभाग पुलिस, परिवहन, इंजीनियरिंग, राजमार्ग और स्वास्थ्य हैं। यह एप एनआईसी ने तैयार किया है। उद्घाटन के मौके पर गृह सचिव नितिन कुमार यादव, डीजीपी प्रवीर रंजन समेत अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। बता दें कि इस परियोजना को पहले तमिलनाडु में शुरू किया गया था और विभिन्न विभागों के प्रयासों से घातक सड़क दुर्घटनाओं में काफी कमी देखी गई, जिसके बाद केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इसे पूरे देश में लागू करने के निर्देश दिए हैं।
आईआरएडी एप ऐसे करेगा काम
सड़क हादसा होने पर मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों द्वारा सड़क दुर्घटना का पूरा विवरण फोटो, वीडियो, घायल, मरे व्यक्ति का नाम, उम्र, पता, वाहन नंबर, स्थल, हादसे का कारण एप में भरा जाएगा। इससे हादसे की सूचना का अलर्ट चुनिंदा विभागों के कर्मियों को मिलेगा। इसके बाद डेटा का विश्लेषण किया जाएगा। बाद में सड़क हादसे को रोकने के लिए सड़क में सुधार पर कार्य किया जाएगा।