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सेक्टर 48 के अस्पताल में शिफ्ट हुए जीएमसीएच 32 के दो विभाग
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चंडीगढ़। जीएमसीएच-32 अस्पताल प्रशासन ने नॉन-कोविड मरीजों की परेशानी को ध्यान में रखते हुए अस्पताल के दो विभागों को पूर्व की तरह सेक्टर-48 के सिविल अस्पताल में शिफ्ट कर दिया है। इसके अंतर्गत कैंसर और मनोरोग विभाग के मरीज वहां स्थानांतरित किए गए हैं। उन मरीजों के इलाज और देखभाल के लिए और पूर्व की तरह संबंधित विशेषज्ञ, पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य कर्मचारियों की भी तैनाती वहां कर दी गई है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अगर कोरोना के केस आने बंद हो गए तो जल्द ही अन्य दो विभाग भी वहां स्थानांतरित कर दिए जाएंगे।
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कोविड में संभाली व्यवस्था
सेक्टर-48 के सिविल अस्पताल में जून 2019 से मरीजों को इलाज मिलना शुरू हुआ था। प्रशासन के निर्देश पर जीएमसीएच-32 के कैंसर, त्वचा रोग, ईएनटी और मनोरोग विभाग को वहां स्थानांतरित किया गया था, लेकिन महज कुछ महीने बाद ही कोविड-19 से स्थिति खराब होने पर 2020 में उसे कोविड अस्पताल बनाना पड़ा। कोरोना के चरम स्थिति में वहां पॉजिटिव गंभीर मरीजों को भर्ती कर इलाज किया गया, लेकिन पॉजिटिव केस के कम होने के साथ ही वहां मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा। इसे देखते हुए जीएमसीएच-32 के अस्पताल प्रशासन ने नॉन-कोविड मरीजों को भर्ती करने का निर्णय लिया है।
अभी होनी है नियुक्तियां
सेक्टर-48 स्थित सिविल अस्पताल को व्यवस्थित रूप से चलाने के लिए 248 नियमित नियुक्तियां की जानी हैं। इनमें 74 डॉक्टर्स, 161 पैरामेडिकल स्टाफ, 10 प्रशासनिक अधिकारी, एक संयुक्त नियंत्रक, एक डिप्टी कंट्रोलर और एक सेक्शन अफसर शामिल है, लेकिन ऐसा अब तक नहीं हो पाया है। मौजूदा समय में जीएमसीएच-32 के डॉक्टर और कर्मचारियों के बल पर ही इसका संचालन किया जा रहा है।
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जीएमसीएच-32 भी लौट रहा पटरी पर
जीएमसीएच-32 की ओपीडी 16 फरवरी से फिर से शुरू कर दी गई है। डायरेक्टर प्रिंसिपल जसविंदर कौर के निर्देश पर डॉक्टरों ने मरीजों को फिजिकल तौर पर देखना शुरू कर दिया है। वहीं दूसरी तरफ कोरोना संक्रमण के दोबारा बढ़ने के खतरे के बीच संजीवनी और टेलीमेडिसिन के जरिए भी मरीजों का इलाज किया जाना जारी रखा गया है। पूर्व की तरह व्यवस्था बहाल करने के क्रम में अस्पताल के 2 विभागों को सेक्टर-48 में शिफ्ट किया गया है।
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कोविड में संभाली व्यवस्था
सेक्टर-48 के सिविल अस्पताल में जून 2019 से मरीजों को इलाज मिलना शुरू हुआ था। प्रशासन के निर्देश पर जीएमसीएच-32 के कैंसर, त्वचा रोग, ईएनटी और मनोरोग विभाग को वहां स्थानांतरित किया गया था, लेकिन महज कुछ महीने बाद ही कोविड-19 से स्थिति खराब होने पर 2020 में उसे कोविड अस्पताल बनाना पड़ा। कोरोना के चरम स्थिति में वहां पॉजिटिव गंभीर मरीजों को भर्ती कर इलाज किया गया, लेकिन पॉजिटिव केस के कम होने के साथ ही वहां मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा। इसे देखते हुए जीएमसीएच-32 के अस्पताल प्रशासन ने नॉन-कोविड मरीजों को भर्ती करने का निर्णय लिया है।
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अभी होनी है नियुक्तियां
सेक्टर-48 स्थित सिविल अस्पताल को व्यवस्थित रूप से चलाने के लिए 248 नियमित नियुक्तियां की जानी हैं। इनमें 74 डॉक्टर्स, 161 पैरामेडिकल स्टाफ, 10 प्रशासनिक अधिकारी, एक संयुक्त नियंत्रक, एक डिप्टी कंट्रोलर और एक सेक्शन अफसर शामिल है, लेकिन ऐसा अब तक नहीं हो पाया है। मौजूदा समय में जीएमसीएच-32 के डॉक्टर और कर्मचारियों के बल पर ही इसका संचालन किया जा रहा है।
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जीएमसीएच-32 भी लौट रहा पटरी पर
जीएमसीएच-32 की ओपीडी 16 फरवरी से फिर से शुरू कर दी गई है। डायरेक्टर प्रिंसिपल जसविंदर कौर के निर्देश पर डॉक्टरों ने मरीजों को फिजिकल तौर पर देखना शुरू कर दिया है। वहीं दूसरी तरफ कोरोना संक्रमण के दोबारा बढ़ने के खतरे के बीच संजीवनी और टेलीमेडिसिन के जरिए भी मरीजों का इलाज किया जाना जारी रखा गया है। पूर्व की तरह व्यवस्था बहाल करने के क्रम में अस्पताल के 2 विभागों को सेक्टर-48 में शिफ्ट किया गया है।